Sunday, August 10, 2008

नाम, कंप्यूटर और मैं

बच्चा पैदा होने से पहले ही नाम खोजने की प्रकिया शुरु हो जाती है। चिंकू, पिंकू, अमिताभ, आमिर ,राज या फिर मनोज। मुझे इस नाम से कभी वास्ता नहीं रहा क्योंकि मुझे हमेशा ऐसा लगता रहा कि लाख में कम से कम निन्यान्बे हज़ार मनोज नाम के हैं। और फिर, कहते हैं न कि न नाम-वाम मे क्या रखा है। वैसे ही, ब्लॉग बनाने की बात मेरे एक मित्र प्रसून ने की तो मुद्दे से ज्यादा मैं नाम के बारे में ही सोचता रहा। दरअसल, इसे बनाने में सहयोग करने वाले मेरे एक और मित्र ने जब मुझे बताया कि इसका नाम Manoj Bajpai लिखा है, तो मैं निराश हो गया। वजह ये कि ये मेरे नाम की सही स्पेलिंग नहीं है। मेरा ऑफिशियल नाम है Manoj Bajpayee। ये स्पेलिंग आज तक फिल्म वालों ने या मीडिया वालों ने कभी उपयोग में नहीं लायी। और जब मैंने इसे बदलना चाहता तो मुझ पर अंकज्योतिष अपनाने की टिप्पणी की गई।

वैसे, मेरा किसी भी गणित, किसी भी विज्ञान और किसी भी मान्यता से परहेज नहीं है। मैं विश्वास रखता हूं कि मेरा नाम 'गधा' भी होता तो लोग खूब कहते कि गधे ने 'सत्या' में अच्छा काम किया है, पिंजर में नेशनल अवार्ड लिया और 'मनी है तो हनी है' में कॉमेडी भी कर सकता है ये गधा। क्या फर्क पड़ता है?

वैसे, अगर सोचने जाए तो उल्लू को मनोज कहा जाता तो लोग कहते कि मनोज रात भर जगता है, फर्क क्या पड़ता है? बहरहाल, प्रकिय्रा खत्म हुई और मेरे नाम की स्पेलिंग चेंज कर दी गई। बदला कुछ भी नहीं पर मुझे संतुष्टि मिल गई।

ये कंप्यूटर भाई मेरे संपर्क में डेढ़ साल पहले आए है। इससे पहले मैं खुद को कंप्यूटर अज्ञानी कहता था। इस दौरान, इस विषय मे सिर्फ पहली ही पास कर पाया है। बहुत मुश्किल हो रही है, लेकिन फिर भी एक नए विज्ञान से, एक नयी वस्तु से खिलवाड़ करने में मजा आ रहा है। लेकिन, ये साहब इतने महंगे आते हैं कि डर भी लगता है कि सब नष्ट न हो जाए या कंप्यूटर की भाषा में डिलीट न हो जाए।

वैसे, बड़ा सही विज्ञान है यह। हाल फिलहाल में मैं जिसके संपर्क में भी आया उससे कुछ न कुछ सीखता रहा। फिल्म 'एसिड फैक्ट्री' के दौरान फरदीन खान और हमारे फोटोग्राफर मित्र जीतू ने मुझे म्यूजिक डाउनलोड़ करने की प्रक्रिया को समझाया । आजकल मैं संगीत सुन रहा है। माफ कीजिए, टेप पर नहीं अपने कंप्यूटर पर। समय कैसे बीत गया पता भी नहीं चला। लगता है कि ये कल की बात है जब बाबूजी बीरगंज (नेपाल) गए थे और पैनासोनिक का टेप रिकॉर्डर लेकर आए थे और अतिउत्साही मेरे भाइयों ने उसमें अपनी आवाज टेप की थी। वो सभी लगातार अपनी ही आवाज पर मोहित होते रहे थे। कितना कुछ बदल गया ? दुनिया करीब आई और इंसान दूर होते गए। वाह ! क्या विज्ञान की खोज है। फिर भी, मैं बोलने वाला कौन हूं? ग्लोब्लाइजेशन है भाई। इससे अलग सोचोगे तो प्रतिक्रियावादी होने का इल्जाम मढ़ दिया जाएगा। पहले ही अंक ज्योतिष पर विश्वास होने का इल्जाम लग चुका है। दंभी होने का भी इल्जाम लग चुका है। अब और इल्जाम नहीं चाहिए।

लेकिन हां, लगातार लिखने की प्रक्रिया जारी रहेगी ताकि सोचता रह सकूं। मेरे ब्लॉग में आप सबका स्वागत है। ब्लॉग लिखूं, अपनी फिल्म का प्रचार न करूं, ऐसा नहीं होगा। एक स्वार्थी अभिनेता की तरह कहूंगा कि 'मनी है तो हनी है' जरुर देखें। मेरी अगली फिल्म 'जुगाड़' दिल्ली में सीलिंग की समस्या से उपजी है। उसे देखना न भूलें।

आपका अपना और सिर्फ अपना

मनोज बाजपेयी with Payee

56 comments:

Rajesh Roshan said...

सबके सब नामचीन ब्लॉगर Itzmy पर .....? फिलहाल यह मेरे सोचने का इलाका नही है.... हिन्दी ब्लॉग्गिंग में आपका स्वागत.... शेक्सपियर ने लिखा है नाम में क्या रखा है आपने उसे थोड़ा और बढ़ा दिया..... बहुत बढ़िया

अविनाश वाचस्पति said...

मनोज
सिर्फ मनोज
नहीं है
इसमें मन भी है
ओज भी है
और मन की शक्ति
ओज की दिव्‍यता
से परिचित हैं
हम सब
आपमें है वो सब
इसे तारीफ न समझें
सिर्फ सच्‍चाई भी है
तो रहें मनोज
बनें मनोज
जगायें मनोज
फिल्‍म आपकी
न कहें आप
तब भी देखेंगे
देखने वाले।

जिस तरह पढ़ते हैं
ब्‍लॉग्‍ा हमारे बिना
कहे हमारे सब
चाहने वाले।

मिला हूं आपसे
अनेक बार
अब चाहें तो मिलें
रोज दिन में
नेक भावना लिए
अनेक बार।

गूगल सर्च में डालेंगे "अविनाश वाचस्‍पति"
कॉपी करके नाम मेरा
सर्च में और दबायेंगे एंटर
तो मेरे सारे ब्‍लॉग सामने
आ जायेंगे फिर उन्‍हें
क्लिकायेंगे तो हिन्‍दी
के जहान में पहुंच जायेंगे
पर समय चाहिये इस
सबके लिए बहुत सारा
जितना पढ़ने में लग रहा है इसे
इससे भी बहुत ज्‍यादा
पहले ही समय की बहुत
कमी है आपके पास
अब मिलेगा नहीं समय
देखना जनाब।

राजीव तनेजा said...

नमस्कार मनोज जी,

हिन्दी ब्लॉगजगत की दुनिया में आपका स्वागत है।

दिनेशराय द्विवेदी said...

मनोज जी, आप का हिन्दी ब्लाग जगत में स्वागत है। हम आप के अनुभवों से कुछ सीख सकें। लेकिन ब्लागरी का हिस्सा बनें ऐसे कि जैसे दूध में पानी जो अलग से दिखाई न दे।

कविता वाचक्नवी said...

स्वागत है मनोज जी, इस नेटीय-जगत में.

आप ने नाम की गत ( या दुर्गत) का जो वर्णन किया है, उसके उदाहरणों से मीडिया भरा पड़ा है. हिन्दी में उच्च्क्रित होने वाले नामों का ऐसा ऐसा रोमनीकरण मीडिया के दृश्य - श्रव्य दोनों समूहों ने किया है उनकी यदि प्रसिद्व नामों की ही लिस्ट एक बना ली जाए तो बढिया रिसर्च सामने आए. अपना नाम सभी को प्यारा होता है इसलिए आपकी आपत्ति उचित है.

संगीत सुनने से जब समय मिले तो अपने संस्मरण और ग्लैमर की दुनिया के भोथरेपन को हिन्दी में लिखने से मत चूकिएगा. इस बहाने बहुतों को लाभ मिलेगा.कुछ नई व रोचक चीजें भी सामने आएँगी.

सद्भाव सहित.

कविता वाचक्नवी said...

उच्च्क्रित* को `उच्चरित' पढ़ें

शैलेश भारतवासी said...

यह अच्छा हुआ कि itzmyblog वालों ने आपको भी खींच लाया। ब्लॉगिंग की दुनिया में आपका स्वागत है।

मनोज वैसे कामदेव को भी कहते हैं। कुछ युवतियों के लिए आप यह भी होंगे क्योंकि बॉलीवुड अभिनेताओं की तस्वीरें बंद कमरों ज़रूर चिपकती हैं।

लिखते रहिए।

हिन्द-युग्म

GIRISH BILLORE MUKUL said...

हिन्दी सिनेमा में मनोज बाजपेयी को प्रयोगकर्मी अभिनेता के रुप में जाना जाताहै। ............................................................................."बिहार के पश्चिमी चंपारण के छोटे से गांव बेलवा में जन्मे मनोज बाजपेयी ने शुरुआती दौर में कर्मभूमि दिल्ली को बनाया,और यहीं रामजस कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन के लिए तीन बार खारिज किए गए मनोज फिलहाल बॉलीवुड के सफल अभिनेता हैं।
आपके परिचय के पूर्व का इंट्रो लगता है ब्लोगिंग आपकी जगह कोई.............?
खैर छोडिए मुझे लगा की आपका स्वागत करून सो कर दिया
"इस शहर में वो लोग अनजान थे कल आज रिश्तों की पोटली लेके आएं हैं
चलो स्वागत करें अपना बनालेँ आगे आके ये सितारे हैं जो फलक को जगमगाएं हैं "

Suresh Chiplunkar said...

बहुत बढ़िया मनोज जी,
ब्लॉगिंग में आपका स्वागत है, आपकी लिखने की शैली आकर्षक है (कम से कम हिन्दी में तो है)। आजकल मुझे अपने-आप पर फ़ख्र होने लगा है कि अमिताभ, आमिर, शाहरुख, अशोक चक्रधर, मनोज वाजपेयी जैसे स्टार ब्लॉग लिखने लगे हैं और मैं भी ब्लॉग लिखता हूं, चलो कुछ तो समानता है, वरना दूर चमकने वाले सितारे और हम जैसे सड़क छाप आदमी की क्या बराबरी। आप ऐसे ही "हिन्दी" में लिखते रहें, शुभकामनायें. लोग कुछ भी कहें, मेरा पसन्दीदा क्रम इस प्रकार है, 1) शूल 2) सत्या और 3) पिंजर…

आनंद said...

बहुत-बहुत स्‍वागत है। ब्‍लॉग लिखना समय खाऊ काम तो है, पर इसमें मज़ा बहुत है। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं।
- आनंद

अजित वडनेरकर said...

हिन्दी ब्लागिंग में आपका स्वागत है।
आपकी कुछ फिल्में देखी हैं और आपका काम पसंद भी आया।
शुभकामनाएं।

उन्मुक्त said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में स्वागत है।

संगीता पुरी said...

हिन्दी ब्लॉग्गिंग में आपका स्वागत। आपकी कुछ फिल्में देखी हैं । शुभकामनाएं।किन्तु ज्योतिष से परहेज कैसा आपजैसे वैज्ञानिक दृष्टिकोणवालों के लिए भी एक नया ज्यैतिष विकसित किया गया है। देखिए मेरे ब्लाग पर.--www.gatyatmakjyotish.wordpress.com

mahendra mishra said...

मनोज जी,

हिन्दी ब्लॉगजगत की दुनिया में आपका स्वागत है ..
Mahendra Mishra
jabalapur.mp

RC Mishra said...

वैसे कौन लिख रहा है ये ब्लॉग? अब मनोज बाजपाई तो इतनी अच्छी हिन्दी लिखने से रहे उस पर से अक्षरशः अन्ग्रेजी अनुवाद!
क्या ब्लॉग पढ़ने वाले इस काबिल भी नही कि उनको कुछ सीधी साफ बात बतायी जाय इस बारे मे :)

दीपक भारतदीप said...

मनोज वाजपेयी जी
आपके हिंदी ब्लाग जगत में प्रवेश का स्वागत करता हूं। मेरी जानकारी में आप हिंदी फिल्म जगत के पहले ऐसे अभिनेता हैं जो हिंदी ब्लाग लिख रहे हैंं और इस बात से प्रसन्नता होती है। एक तरह से आप पहले हिंदी अभिनेता ब्लागर हैं। आपके हिंदी ज्ञान का मैं कायल हूं और मेरी शुभकामनायें हैं कि यहां बेहतर लिखकर आप उसे प्रमाणिक करें। आपके प्रशंसक इस हिंदी ब्लाग जगत पर बहुत हैं और आपको यह टिप्पणियां मिलीं हैं उसे औपचारिक बिल्कुल न समझें क्योंकि सभी के मन में आपके प्रति सम्मान और प्यार है और सभी आपको लिखते देख बहुत प्रसन्न हैं।

दीपक भारतदीप

Sunil Deepak said...

मैं नहीं मानता कि नाम कुछ भी हो, उससे कुछ नहीं होता. मेरे विचार में नाम का असर तो होता ही है, विषेशकर अगर नाम उल्लु या गधा हो तो. जिस नाम में गाली हो, जा नीचा दिखाने की बात हो तो उस नाम से पुकाराना मन में गलत प्रभाव तो डालेगा. हाँ बाजपेयी, वाजपेयी, जैसे अंतर से शायद कोई फर्क न पड़े, हालाँकि यह चाहना ठीक है कि अपना नाम ठीक तरह से लिखा और पुकारा जाये.

भुवनेश शर्मा said...

आज बड़ी प्रसन्‍नता हुई यह जानकर कि मेरे पसंदीदा कलाकार को सीधे संदेश भेज पा रहा हूं.

आपकी ज्‍यादा फिल्‍में तो मैंने नहीं देखी हैं...पर फिर भी आपकी अदाकारी का कायल हूं...वैसे बहुत सालों से आपकी कोई फिल्‍म नहीं देखी.
जब भी अच्‍छी अदाकारी की बात होती है तो पिंजर के आपके द्वारा अभिनीत दृश्‍य मन में उभरते हैं...आपकी फिल्‍मों में से वही सबसे पसंदीदा है. खासकर आपकी संवाद-अदायगी. अमिताभ बच्‍चन के बाद आप शायद अकेले ऐसे शख्‍स हैं जिनकी संवाद-अदायगी ने बहुत प्रभावित किया है...एक व्‍यक्तिगत बात आपसे शेयर करना चा‍हूंगा कि कमर्शियल फिल्‍मों, मसाला या कामेडी फिल्‍मों के एक कलाकार के रूप में आपको देखता हूं तो लगता है कि मनोज वायपेयी ये क्‍या कर रहा है....ये काम तो कोई भी कर सकता है...मनोज वाजपेयी मनोज वाजपेयी है. कहीं न कहीं आपकी एक संजीदा कलाकार होने की छवि पर प्रभाव पड़ता है. हालांकि ये मेरी व्‍यक्तिगत राय है. सोचा आपसे कह दूं तो लिख दिया. बाकी मनोरंजन उद्योग में इस तरह की बातें ना तो संभव हैं ना ही व्‍यवहारिक.
बाकी भी फिल्‍में बहुत अच्‍छी की हैं आपने....मसाला फिल्‍मों से सख्‍त चिढ़ होने के कारण उनमें आपके काम के बारे में पता नहीं चल पाता...संभवत: उनमें भी आपकी अदाकारी काबिले-तारीफ रही होगी.


हिंदी ब्‍लागिंग में आपका स्‍वागत है...आशा है आपके विचारों से रूबरू होने का सिलसिला यूंही चलता रहेगा.

अनूप शुक्ल said...

स्वागत है आपका इस ब्लाग जगत में।

Sanjay said...

बड़े मियां ने अच्‍छा शगलवा शुरू कराया है... बिलागिंग का....जिसको देखो ठेले पड़ा है..
लेकिन भइया मनोज बाजपेई जी ..yee वाले.. सब जगह भूतों का ही डेरा है क्‍या... कौन सा भूत लिख रहा है आपके नाम से... उसे कहें कि प्रोफाइल ऐसे लिखे कि आपका लिखा लगे. अभी तो एकदम साफ दिख रहा है कि कोई और भूतलेखक यह सब कर रहा है.
फिर भी चिाट्ठा जगत में आपका स्‍वागत है.

राजीव रंजन प्रसाद said...

मनोज जी,


हिन्दी ब्ळोग जगत में आपका हार्दिक अभिनंदन। आप जैसे कलाकारों का हिन्दी ब्लॉगिंग से जुडना न सिर्फ इस माध्यम के प्रति आकर्षण पदा करेगा वरन यह एक प्रकार की हिन्दी सेवा भी होगी...आपके इस ब्ळोग पर सक्रिय रहने की अपेक्षा है।


***राजीव रंजन प्रसाद

डा० अमर कुमार said...

.

दुनिया करीब आई और इंसान दूर होते गए। वाह ! क्या विज्ञान की खोज है। बहुत ही परिपक्व विचार है, ऎसे विचार प्रगट करने वाले का स्वागत भी होना चाहिये, सो..सुस्वागतम मित्र !

मेरी एक माँग है..रक्सौल से चल कर मुंम्बई तक पहुँचने की यात्रा, व खेत से स्टूडियो तक पहुँचने की कथा की एक श्रृंखला भी यहाँ चलाये ।

आनंद said...

मनोज जी,

आपके ब्‍लॉग की टिप्‍पणियों को देखा रहा था। और साथ ही आपके अंग्रेजी ब्‍लॉग को भी। एक दूसरे का अनुवाद है, ऐसा लग रहा है कोई एक ब्‍लॉग आपने नहीं लिखा है, या शायद दोनों नहीं।

यदि ऐसा है तो अनुरोध है कि आप स्‍वयं लिखें। भले ही पॉलिशदार न बन पाए, अपनी बातें स्‍वयं टाइप करें। सवाल ओरिजिनलिटी का है। आपसे बहुत सी बातें पूछनी है, आपके बारे में, आपके फिल्‍मों के बारे में। परंतु आपसे ही, किसी पी.आर. एजेंट से नहीं।

- आनंद

सागर नाहर said...

आपका हार्दिक स्वागत है, भूमिका अगर आपने ही लिखी है तो वाकई बहुत बढ़िया लिखी है। आज से हम आपके अभिनय के साथ लेखन के भी प्रशंसक हुए..
बधाई स्वीकार करें।
अगर आपने नहीं लिखी तो अनुरोध है कि आप खुद भी लिखें, हिन्दी टाइप करना ज्यादा मुश्किल नहीं और फिर सिखाने वालों की कोई कमी नहीं।

Vivek said...

Hi Manoj,

Gr8 to hear one more extraordinary voice at itzmeblog.

The subject you raised a simple way to explain the Theory of Gita regarding "Karma". That's there in name.

Welcome in World of blog.

Ajay singh said...

बहुत खुब। हिन्दी ब्लॉग्गिंग में आपका स्वागत है।

बालकिशन said...

हिन्दी ब्लागिंग में आपका स्वागत है।
आपकी कुछ फिल्में देखी हैं और आपका काम पसंद भी आया।
शुभकामनाएं।

अजय तोमर said...

मनोज जी, आपका लेख पढा अच्छा लगा.

Divya Prakash said...

स्वागत है मनोज ,
कुछ ऐसा कीजिये की "जुगाड़" के टिकेट का जुगाड़ हम सभी कमेन्ट करने वालो के लिए हो जाए !!
दिव्य प्रकाश
SIBM,Pune

kaul said...

मनोज जी, आप का ब्लॉगिंग की दुनिया में स्वागत है। आप के अभिनय कौशल के अतिरिक्त आप के हिन्दी प्रेम का पुराना प्रशंसक हूँ। मुझे सब से ज़्यादा कोफ़्त तब होती है, जब हिन्दी की रोटी खाने वाले, हिन्दी फ़िल्मों के सितारे, हिन्दी बोलने से शर्माते हैं। आप ने हिन्दी चिट्ठाजगत में भी हाज़िरी दी, इस के लिए साधुवाद। बाकी, नाम में कुछ नहीं रखा, यह मैं नहीं मानता। हाँ, नाम को सही लिखा-लिया जाना चाहिए, यह मानता हूँ। इस में भी दोष अंग्रेज़ी का ही है - हम लोग बाध्य हैं अपना नाम अंग्रेज़ी में लिखने के लिए, इस कारण उलटफेर हो जाना स्वाभाविक है। मेरा नाम कभी koul लिखा गया है तो कभी kaul, मेरे अपने काग़ज़ों में भी। एक तर्कवादी होने के नाते, मुझे यह भी बुरा लगता है कि हिन्दी फ़िल्मवाले अंक "विद्या" (??) के अन्धविश्वास में हिन्दी शब्दों की वर्तनी का सत्यानाश कर देते हैं।

G Vishwanath said...

आजकल लोग विश्वास नहीं करते कि फ़िल्म सितारे अपना ब्लॉग स्वयं लिखते हैं।
उनका मानना है कि अवश्य किसी से लिखवाते होंगे। सितारों के पास इतना समय कहाँ?

हम आम आदमी को यह साबित करना नहीं पढ़ता!
कौन लिखेगा हमारे लिए? और किस लिए? हम जैसों को यदि कोई पढने वाला और टिप्पणी करने वाला मिल जाए तो हम अपने आप को धन्य समझते हैं।

हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है।
आशा करता हूँ कि नियमित रूप से आप लिखते रहेंगे और हमें विश्वास हो जाएगा कि मनोज बाजपेयी का ब्लॉग, स्वयं अभिनेता मनोज बाजपेयी ही लिखते हैं।
आपकी फ़िल्में अभी देखी नहीं । (फ़िल्में बहुत कम देखता हूँ) अब अवश्य देखना पसन्द करूंगा।
शुभकामनाएं

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

स्‍वागत हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में बंधुवर ....

liky said...

सबसे पहले तो मै आपको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप जैसे शख्सियत हम जैसे आम लोगो से जुड़ने जा रहे है! आप जान नही सकते कि मनोजजी आपके द्बारा हिन्दी में ब्लॉग शुरू करने से मुझे कितनी खुशी हुई है! जब आपकी फ़िल्म 'मनी है तो हनी है' रिलीज हुई तो उसकी कही पर मैंने समीक्षा पढ़ी थी,उसमे आपके अभिनय को लेकर काफ़ी कुछ ग़लत लिखा था, लेकिन जब मैंने वो फ़िल्म देखी तो मुझे आपके द्बारा किए गए हास्य अभिनय को देख कर बहुत खुशी हुई,लेकिन मनोजजी आपसे निवेदन है कि आप सिर्फ़ उन्ही चुनिन्दा फिल्मो में अभिनय करे जिसमे फ़िल्म की केन्द्रीय भूमिका आपकी ही हो, जिससे हमें आपका पूर्ण अभिनय देखने को मिले!
मनोजजी आपसे एक निवेदन और है कि जब आप मेरी इस बात को पढ़े तो कृपया कर आप मुझे आपकी तरफ़ से दो शब्द लिखना न भूले,मेरा जीवन सफल हो जाएगा! आप मुझे मेरे ब्लॉग पर लिख सकते है,जो इस प्रकार है - yogeshsoni.mywebdunia.com या फ़िर आप मुझे ईमेल कर सकते है - jeetusoni_aashu@yahoo.co.in पर!
आपके द्बारा लिखा एक एक शब्द मै हमेशा संजो के रखूँगा! धन्यवाद !

liky said...

सबसे पहले तो मै आपको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप जैसे शख्सियत हम जैसे आम लोगो से जुड़ने जा रहे है! आप जान नही सकते कि मनोजजी आपके द्बारा हिन्दी में ब्लॉग शुरू करने से मुझे कितनी खुशी हुई है! जब आपकी फ़िल्म 'मनी है तो हनी है' रिलीज हुई तो उसकी कही पर मैंने समीक्षा पढ़ी थी,उसमे आपके अभिनय को लेकर काफ़ी कुछ ग़लत लिखा था, लेकिन जब मैंने वो फ़िल्म देखी तो मुझे आपके द्बारा किए गए हास्य अभिनय को देख कर बहुत खुशी हुई,लेकिन मनोजजी आपसे निवेदन है कि आप सिर्फ़ उन्ही चुनिन्दा फिल्मो में अभिनय करे जिसमे फ़िल्म की केन्द्रीय भूमिका आपकी ही हो, जिससे हमें आपका पूर्ण अभिनय देखने को मिले!
मनोजजी आपसे एक निवेदन और है कि जब आप मेरी इस बात को पढ़े तो कृपया कर आप मुझे आपकी तरफ़ से दो शब्द लिखना न भूले,मेरा जीवन सफल हो जाएगा! आप मुझे मेरे ब्लॉग पर लिख सकते है,जो इस प्रकार है - yogeshsoni.mywebdunia.com या फ़िर आप मुझे ईमेल कर सकते है - jeetusoni_aashu@yahoo.co.in पर!
आपके द्बारा लिखा एक एक शब्द मै हमेशा संजो के रखूँगा! धन्यवाद !

अमित कुमार said...

मनोज जी,
मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ. आपकी लगभग सभी फ़िल्म देख चुका हूँ. आपके अभिनय में बहुत ही ज्यादा रेंज है. आशा करता हूँ आप फ़िल्म इंडस्ट्री और बिहार की मिटटी को आगे भी गुलज़ार करते रहेंगे. कभी समय मिले तो क्योंबिरादर.ब्लागस्पाट.कॉम पर भी आइये. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है.

masaurhi said...

manoj bhai mai bhi bihar ke chapra ka rahne wala hu,aur abhi presently dd news mai posted hu,mai philmo ka saaukin aadmi hu,aur aap bishwas nahi karenge mera favorite actor manoj bajpayee hai,shool picture dekhne ke baad aap ke acting ka kayal hu.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

फिल्म नहीं ये ब्लॉग है, इतना रखें ध्यान।
कलम घिसाई कर सकें, तो फिर बनें महान।
तो फिर बनें महान, लगायें चौके-छक्के।
फिल्मों की ही तरह होएं सब हक्के-बक्के।

आलोक said...

मनोज जी, खुशी हुई आपको यहाँ देख के।

rajkumar said...

BHAI MANOJ JI
BAHUT BADHIYA LAGA KI AAP RANGKARM KE SATH SHABD AUR COMPUTOR KE JARYE HAM LONGO SE JUD GAYE HAIN. ASHA HAI AGE BHI BATEN HOTI RAHEGI

रज़िया "राज़" said...

मनोज जी। आपका हिन्दीब्लोग में स्वागत है। रही बात अपने नाम की तो मैं कहना चाहुंगी कि हमारी पहचान हमारा नाम ही तो है? फिर अपनी पहचान आइना बनकर सामने लाना ही अच्छी बात है।वैसे भी आप से कौन अनजान है? लाखों में निन्यानवे हज़ार मनोज क्यों न हो ? मनोज बाजपेयी की एक अलग ही पहचान है। जारी रहे ये ब्लोग।अभिनंदन।

Sanjay Sharma said...

बढ़िया चुटकी लिया है अपने पुण्य प्रसून बाजपाई से .वैसे आप पत्रकार होते हुए भी ज्यादा जम रहे हैं मनोज बाजपेयी के रोल में . नाम में क्या रखा है कहते हुए भी आप बाजपाई लिखने से परेशान दिखे .अच्छा लगता है कोई जब वह ज़मीनी परम्परा का निर्वाह बखूबी करता है .

सतपाल said...

सुस्वागतम !!
http"//aajkeeghazal.blogspot.com

Tarun said...

Manoj, humari teraf se bhi swagat hai ji, waise naam pe kya rakha hai is per so example aap ne diye parke maja aa gaya.

Waise Ulloo ko agar koi naam hua hota to shayad log Ulloo naam bhi rakhne lagte.

परेश टोकेकर said...

मनोज जी को कबीरा का प्रणाम।
अब आपने इतना आग्रह किया ही है तो फिल्म जरूर देखने जायेगे। वैसे इसमें हमारा भी स्वार्थ है, एक तो बीबी खुश की चलो इस नाटक वाले पति ने शादि के बाद एकाध फिल्म तो दिखाई उधर आप भी खुश।
ब्लागिंग की दुनिया में शिरकत करने के लिये बहुत बहुत बधाई।

अंगूठा छाप said...

aapka
swagat
hai
manoj!

Sanjeet Tripathi said...

बंधुवर,
आपको हिंदी ब्लॉग लिखता देखकर जो खुशी हो रही उसे बता नही सकता।
दर-असल मुझे यह हमेशा शिकायत रही है कि हमारे फिल्मी सितारे जो हिंदी फिल्मों की ही खाते है पर बात करते हैं अंग्रेज़ी में। अमिताभ जी के ब्लॉग पर भी मैने यही शिकायत की।
सो आप का शुक्रिया कि आप हिंदी में भी लिख(वा) रहे हैं।

आपका अभिनय मुझे पसंद है, मुझे याद है जब मोहल्ला ब्लॉग में आपका इंटरव्यू पढ़ा था तब मैने वहां अपनी टिप्पणी में क्या लिखा था।
वही बात फिर से दुहराना चाहूंगा कि

Sanjeet Tripathi said...

मनोज बाजपेयी, सिर्फ़ एक सितारे के रुप में नहीं हैं वह हमारे बीच के, एक मध्यमवर्गीय प्रतिनिधी के रुप मे मौजूद हैं। उन्हे जब भी किसी फ़िल्म में देखता हूं तो यही लगता है कि हमारे ही बीच का कोई है वह।
बधाई और शुभकामनाएं दोनों इंटरव्यूकारों को।
शुक्रिया अविनाश भाई
May 10, 2007 10:33 PM

और हां "1971" ने मेरा दिल जीत लिया। बधाई उस बेहतरीन फिल्म के लिए भी।

सजीव सारथी said...

एक और बड़ा नाम जुडा हिन्दी ब्लॉग्गिंग से, मनोज आप मेरे तो हमेशा ही पसंदीदा रहे हैं, आपकी शूल मैंने जाने कितनी बार देखि है, बेहतर फिल्में चुनिए, क्योंकि आप मात्र स्टार नही एक उत्कृष्ट कलकार भी हैं जो अभिनय के मूल जनून को समझता है, और हाँ ब्लॉग्गिंग करते रहिएगा ...शुभकामनायें

sourabh said...

मनोज जी, आपको अभी एक रीयलिटी शो में देखा था दिया मिर्जा भी थी। आपने एक प्रतियोगी पर टिप्पणी की। उसे समझाया कि हमारी गरीबी ही हमारी शक्ति बनती है, हमारे भीतर जज्बा पैदा करती हैं कुछ करने का। आपके शूल के संवाद से ही यह बात खत्म करता हूँ कि आप लोग अभिनेता हैं आपकी की बात का वजन पड़ता है जनता पर, कुछ कीजिए। जैसा आप कर रहे हैं हम सब को मोटिवेट करते रहिए। अब ब्लाग से बना यह संबंध आपको कायम रखना है आपसे जुड़ी हुई कुछ बातें जो हमें दर्शक के रूप में टिप्पणी के माध्यम से प्राप्त हैं हमारे दिलों में जज्ब है। आशा है आप सुनना पसंद करेंगे।

ashish said...

I had interviewed you in 2003 or 2004 while I was working at the Etv.I still remember When I was asked to get your phone in , I was so much thrilled and elated, You were and still are among my most favourite actors. I remember you had won some national award for supporting role, I had asked you how do you feel after winning it for the first time and you had replied this is not the first time. wish you all the best

ashish said...
This comment has been removed by the author.
jitendra srivastava said...

achchha laga.hindicinema ka abhineta hindi men likhe,yh to hona hee chahiye.ap ke abhinaya ka prashansak hoon,isliye aur achchha laga.shubhkamnayen.
jitendra srivastava

अशोक पाण्डेय said...

अभिनय के क्षेत्र में आपकी उपलब्‍िध पर हम बिहारवासियों को गर्व रहा है। मातृभाषा हिन्‍दी में ब्‍लॉगलेखन कर आपने चिट्ठाजगत में भी हमें गौरवान्वित होने का अवसर दिया है। धन्‍यवाद।
हिन्‍दी चिट्ठों के संसार में आपका हार्दिक स्‍वागत।

Shashi Bhushan said...

मनोज जी मुझे आपकी फिल्म शूल बहुत अच्छी लगी

iceman said...

It is indeed good to read a think Hindi , speak hindi and live hindi personality after Ashutosh Rana . I don't know whether Ashutosh Rana is available on Blog or not but I m sure , I will read to Manoj Bajpayee ji for his deep humanitarian thoughts and not cheap cut throat blogs.

aprampara said...

मनोज जी ,
पहले बधाई स्वीकारे की आप अपना ब्लॉग ख़ुद लिख रहे है ...काफी अच्छा लगा की व्यस्तत्ताओं के बीच समय निकालकर कुछ लिख पा रहे है ........ताज़ा ब्लॉग में बिहार के बाढ़ पर आपका सवेदनशीलता काबिले तारीफ है ,,मै भी बिहार के गया जिले के एक छोटे से कस्सबे से हूँ वर्तमान में मै अजमेर राजस्थान में जॉब करता हूँ अक्सर दोस्त प्रतिदिन वहा का हाल पूछते है की आपके परिवार कैसे है ,सुरक्षित तो है ............. आब पुरा बिहार ही परिवार लगता है .......लगता है कुछ करू ......................परन्तु छाह्कर भी बहुत ज्यादा नही कर पाता ............ आप जैसे लोग कुछ करे ताकि सरकार तक वहा की बात पहुचाई जा सके .


Rakesh Pathak,

दीपक said...

नाम मे क्या रख्खा है सही है पर नाम पर ही सारा बवाल है !!नाम ही बिकता है और जो बिकता है वही दिखता है !!


आपका हार्दिक स्वागत है हिन्दी मे ही इखे क्योकि हमे मोटी अंग्रेजी समझ मे नही आती इन्ही शुभकामानाऒ के साथ !!

आपकी मनी है तो हनी है देख लिया और करोडो का तजुर्बा भी हो गया "क्या है भैय्या कि हौसला नही टुटना चाहिये !!