Tuesday, August 12, 2008

अविश्वास के बावजूद पढ़िए, यह मेरा ब्लॉग है

मेरे ब्लॉग पर राजेश रोशन साहब का पहला कमेंट है और उनके बाद राजीव तनेजा, दिनेश राय, कविता, शैलेश भारतवासी, गिरीश, सुरेश चिपलूनकर, रजिया राज, अनूप शुक्ला और उन सभी बंधुओं को धन्यवाद जिन्होंने मेरे ब्लॉग पर आकर कमेंट किया और मेरी पहली पोस्ट की तारीफ की। वैसे, इन कमेंट में कुछ दोस्तों ने सवाल भी उठाए हैं । मसलन-

हिन्दी के बारे में आर सी मिश्रा साहब ने लिख डाला कि "कौन लिख रहा है ये ब्लॉग। अब मनोज बाजपेयी तो इतनी अच्छी हिन्दी लिखने से रहे।" दरअसल, ये दोष उनका नहीं है जो यह सवाल पूछ रहे है कि एक फिल्म अभिनेता हिन्दी में कैसे लिख सकता है? अमूमन जितने भी बड़े स्टार्स है, वो काम चलाऊ हिन्दी तो बोल लेते हैं लेकिन शायद हिन्दी में नहीं लिख पाएंगे। वो हिन्दी में इंटरव्यू भी बमुश्किल दे पाते हैं। इससे कहीं-न-कहीं दर्शकों-पाठकों के मन में ये आशंका होनी लाजिमी है कि एक अभिनेता हिन्दी में कैसे ब्लॉग लिख सकता है। आपकी जानकारी के लिए श्री अमिताभ बच्चन बहुत अच्छी हिन्दी जानते हैं। आशुतोष राणा बहुत अच्छी हिन्दी लिखते-बोलते हैं और जितने भी लोग रंगमंच से आए हैं, उनकी हिन्दी और अंग्रेजी अच्छी है। अगर आपको अभी भी अविश्वास है तो उसे रहने दीजिए, लेकिन पढ़ना जारी रखिए क्योंकि यह मेरा यानी मनोज बाजपेयी का ही ब्लॉग है और मनोज बाजपेयी की ही बात है।

पीआरशिप के बारे में संजय, आनंद और जी विश्वनाथ समेत कुछ लोगों ने कमेंट किया है कि ये ब्लॉग पीआरशिप तो नहीं? अब मैं आपको भी ये दोष न दूंगा कि आपने यह सवाल पूछा तो क्यों पूछा या फिर आपके मन में संशय हुआ क्यों? आजकल हर कदम एक फिल्म अभिनेता है और उसके पी आर शिप या प्रचार-प्रसार के पचास कारण होते हैं। टेलीविजन चैनल ने कोई कमी तो रखी नहीं है । अब तो न्यूज के बदले वो बड़े स्टार की पी आर एजेंसी बन चुके हैं। मेरा ये कदम भी शक के घेरे में आएगा, ये मुझे पता था। दरअसल, ये मेरे कुछ पत्रकार मित्रों द्वारा शुरु किया ब्लॉग है, जिसमें उन्होंने मुझे आमंत्रित किया है कि मैं भी अपने दिल की बात कह सकूं। तकनीकी सहयोग पूरा उनका है। जहां तक अंग्रेजी की बात है और मुमकिन है कि आने वाले दिनों में कुछ और भाषाओं में भी पोस्ट दिखे तो वो निश्चित तौर पर ट्रांसलेशन है। अब मैं एक भाषा में लिखकर खुद उसका ट्रांसलेशन कर सकूं, फिलहाल इतना वक्त मेरे पास तो नहीं है।

अपनी कथा यात्रा के बारे में- पंद्रह साल सिनेमा में अभिनय और 11 साल थिएटर करने के बाद भी मुझे ही अपनी कथा बतानी पड़े तो इसका मतलब है कि इतने सालों में आपने कभी इस अभिनेता की सुध नहीं ली। कृपया कुछ वक्त खर्च कर गूगल में मनोज बाजपेयी टाइप करें, सारी जानकारियां सामने आ जाएंगी।

फिलहाल, पोस्ट लंबी हो चली है। ब्लॉग पढ़ने वाले सभी बंधुओं को फिर धन्यवाद। मेरी फिल्म "हनी है तो मनी है" जरुर देखें और उस पर यहां प्रतिक्रिया दें। ब्लॉग संवाद कायम करने के लिए ही है, सो संवाद जारी रहेगा। अगली पोस्ट के साथ जल्द हाजिर होता हूं।

आपका और सिर्फ आपका

मनोज बाजपेयी

54 comments:

नयनसुख said...

मनोज बाजपेई जी, यह तो सभी जानते हैं कि आप हिन्दी अच्छी ही नहीं बहुत अच्छी जानते हैं. लेकिन ये ब्लाग आम ब्लाग की तरह नहीं उतरे बल्कि हिन्दी और अंग्रेजी एक साथ एक ही कथन के साथ आये इसलिये शंका होना स्वाभाविक ही है.

आपके कुछ पुराने संगी साथी यहां ब्लाग जगत में पहले से ही धसक से मौजूद हैं, फिर भी आपने एक संस्था को चुना! ब्लाग व्यक्तिगत माध्यम होता है लेकिन आप व्यक्तिगत रूप से न आकर आप समूह द्वारा प्रायोजित संस्था के माध्यम से आये इसलिये हमारा एसा सोचना स्वाभाविक ही है.

बहरहाल हम आपको पढ़ रहे हैं. हम हनी है तो मनी है जरूर देखेंगे क्योंकि मैं तो आपकी हर (रिपीट) हर मूवी देखता रहा हूं.

आप इस ब्लाग के माध्यम से अपनी रंगमंच से फिल्म की दुनियां तक की कथा यात्रा को क्यों नहीं बताते? हमारे और आपके लिये यह एक भला अनुभव होगा.

हर्षवर्धन said...

मनोजजी
आपका स्वागत है। अच्छा है कि ब्लॉग अभिव्यक्ति का जरूरी माध्यम बन रहा है। लोग अविश्वास कर रहे हैं कि ये मनोज बाजपेयी का ब्लॉग नहीं है तो, उसकी पक्की वजहें हैं। आपकी हिंदी अच्छी नहीं होगी इससे मैं इत्तफाक नहीं रखता क्योंकि, आप हिंदी बेल्ट से ही हैं। वैसे बॉलीवुड में हिंदी की दुर्दशा पर मैंने काफी पहले ये लिखा था मौका लगे तो, पढ़िए और इस पर अगली पोस्ट में कुछ जानकारी भी बढ़ाइए। http://batangad.blogspot.com/2007/06/blog-post_16.html
आप इतने साल बॉलीवुड में रहने के बाद भी खांटी दिखते हैं इसलिए मुझे अच्छे भी लगते हैं।

लेकिन, अगर आपको उचित लगे तो, ये जानकारी देंगे कि आप क्या पेड ब्लॉग लेखन कर रहे हैं। क्योंकि, itzmyblog पर ही पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी और कुछ दूसरे लोगों के भी ब्लॉग दिख रहे हैं। इसमें कोई बुराई नहीं बल्कि, बढ़िया है कि ब्लॉग में पेड लेखन शुरू हो रहा है।

शैलेश भारतवासी said...

मूझे पूरा विश्वास है कि यह आपका ही ब्लॉग है। और यह तो बहुत आम बात है कि टाइपिंग, पोस्टिंग, प्रूफ रीडिंग के लिए कोई सहयोगी रखा जाये। महत्वपूर्ण यह है कि विचार मौलिक हैं और हमारी मौलिक प्रतिक्रियाएँ भी आप तक पहुँच रही हैं। मैंने तो आपके ब्लॉग का जिक्र एक अखबार के स्तम्भ में भी कर दिया है। अब यदि आप नकली मनोज हुई तो मेरी तो शामत आ जायेगी :)

Anil Pusadkar said...

Manoj jee aapki hindi waastav me achhi aur jaisa kaha aapne, Aashutoh jee ki bhi.weraviwaar ko humare club aaye the aur patrakaaron se unhone aur Rajpal yadav ne lagbhag 2 ghante char ha ki wo bhi hindi me,sab ne taarif ki unki,aur main samajhata hun aapki bhi hindi utni hi achhi hai,hindi blog ki diniya me swaagat hai aapka

Anil Pusadkar said...

Manoj jee aapki hindi waastav me achhi aur jaisa kaha aapne, Aashutoh jee ki bhi.weraviwaar ko humare club aaye the aur patrakaaron se unhone aur Rajpal yadav ne lagbhag 2 ghante char ha ki wo bhi hindi me,sab ne taarif ki unki,aur main samajhata hun aapki bhi hindi utni hi achhi hai,hindi blog ki diniya me swaagat hai aapka

seema gupta said...

" very nice to see you here, most welcome to blog world, you have execellent grip on the language. but as lil doubt about being your identity that you are MR Manoj bajpayee or not, so wanna say that please take care of every ones emotion and feeling faith and trust in you as this is not a film this place is reality show where every one is sharing own thoughts feelings and many more with full trust on each other" well i trust about you and your blog. please keep sharing about your experiences....."

Regards

Rajesh Roshan said...

बिहार के मनोज, एमपी के आशुतोष और यूपी का अमिताभ को हिन्दी नही आएगी तो लानत है इनको हिन्दी पट्टी का कहने का..... मुझे पुरा यकीं है कि यह आपका ही ब्लॉग है लेकिन सब के सब नामचीन ITZMY में यह समझ से परे कि चीज है....

Suresh Chiplunkar said...

मनोज जी आप बेफ़िक्र होकर लिखें जैसा अभी तक लिखा है, असल में लोगों को आदत नहीं है कि वे फ़िल्म स्टारों से हिन्दी सुनें/पढ़ें, लेकिन मध्यप्रदेश में रहने वाले हम जैसे लोग जानते हैं कि यहाँ से निकले हुए लोग बेहतरीन और शुद्ध हिन्दी बोलते/लिखते हैं… आपने दो-चार नाम गिनाये हैं उनमें कुछ नाम मैं जोड़ता हूं, गोविन्द नामदेव, राजपाल यादव, रघुवीर यादव, मुकेश तिवारी आदि, जो साफ़ और शुद्ध हिन्दी बोलते हैं, "यू नो", "वैल दैट्स…" और "या'-"या'-"या" वाली नहीं… हालांकि मैं खुद शुद्ध हिन्दी लिखने का हिमायती हूँ, क्योंकि यह हमारी मातृभाषा है, अंग्रेजी में होने वाली गलती एक बार सहन की जा सकती है, क्योंकि वह हमारी भाषा नहीं है… अगले महीने "हिन्दी दिवस" आने वाला है, सरकारी कर्मकांड से दूर हटकर "हिन्दी" पर ही एक ब्लॉग लिखिये, स्वागत रहेगा… बहुत अच्छा लगा आपका लेख पढ़कर…

Mired Mirage said...

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। मुझे इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि आप कौन हैं। यदि ब्लॉग अच्छा लगेगा तो आती रहूँगी। यहाँ सब बराबर हैं, चाहे वे तोप हों या तमंचा। केवल आप क्या लिख रहे हैं यही महत्वपूर्ण है। आपकी या किसीकी भी फिल्म देखूँगी इसमें संदेह है। आप लिखते रहें, अच्छा से अच्छा लिखते रहें इस शुभकामना के साथ,
घुघूती बासूती

Raviratlami said...

आपके कहने पर, और इससे बढ़कर मनोज बाजपेयी के नाम पर मैंने यह फ़िल्म देखने की कोशिश की.

आपके कॉमिक रोल के कुछ हिस्सों को छोड़ कर बाकी पूरी की पूरी फ़िल्म हद दर्जे की फूहड़ और बकवास है.

आश्चर्य नहीं कि फ़िल्म पिट गई है. आपसे आग्रह है कि ऐसी फ़ूहड़ कहानी वाली फ़िल्में न किया करें.

Nitin Bagla said...

मनोज जी,"हनी है तो मनी है" या "मनी है तो हनी है"?
सच्ची सच्ची बताइयेगा।

sushant jha said...

मनोज जी..बड़ा इमानदार लेख है। आप उस दिन मेरे चैनल (इंडिया न्यूज) आए थे लेकिन मैं अापसे मिल नहीं सका। बड़ा गुस्सा आया- आप पर नहीं-अपने प्रोड्यूसर पर जिसने मुझे काम में बेतरह फंसा रखा था। खैर, सुकून हुआ कि आप अच्छी हिंदी लिख सकते हैं-आखिर चूड़ा-दही की भी चर्चा आपने एकबार कहीं की थी, हैं न।

मिहिरभोज said...

भैया सही सही लिखना नहीं तो बहुत खिंचाइ होने वाली है आपकी यहां सब एक ही धरातल पर हैं सब...पुण्य प्रसून जी हों या के अशोक चक्रधर या फिर मनोज वाजपेयी..आपका परिचय कृपया स्वयं अपनी भाषा मैं लिखा हो तो अच्छा रहेगा जो लिखा है बो किराये की सी भाषा लगती है

पंगेबाज said...

अरे भैया मनोज कहा फ़स गये यहा ? सबको तुरंत बतादो बल्की याद दिला दो कि भीखू महात्रे से पंगा लेना महंगा पड सकता है :)वैसे आपको जरूरत तो नही लगती , फ़िर भी चाहो तो दो चार पंगेबाजी की क्लासे हम दे सकते है इन सब से निपटने के लिये, आखिर हम यू ही हिंदी ब्लोग जगत मे पंगेबाज के नाम से प्रसिद्ध नही है भीखू जी :)

राजीव रंजन प्रसाद said...

मनोज जी..

मुझे कोई संदेह नही कि यह आपका ही लेखन है/ ब्लॉग है। आपने हिन्दी में अपना ब्लॉग बना कर उन हिन्दी फिल्मी सितारों को यह संदेश अवश्य दिया है जिन्होने अंग्रेजी ब्लॉग को माध्यम बनाया है कि...हिन्दी अपनी बात कहने का अधिक बेहतर माध्यम है। जब फिल्मे हिन्दी में तो भाई अपनी अभिव्यक्ति लंदन मीडिया के लिये क्यों :)

आपके विषय में और आपकी सोच को पूरी मौलिकता से जानने का अवसर मिलेगा यह अपेक्षा है।

***राजीव रंजन प्रसाद
www.rajeevnhpc.blogspot.com
www.kuhukakona.blogspot.com

रंजना [रंजू भाटिया] said...

मनोज जी आपका स्वागत है इस ब्लागिंग की दुनिया में ..आपकी फ़िल्म पिंजर मुझे बेहद पसंद है |

Shiv Kumar Mishra said...

भाई मनोज जी, आपका स्वागत है. हमें अविश्वास बिल्कुल नहीं है. आपकी हिन्दी अच्छी है, इस बात पर कोई शक नहीं है. आप लिखें और अच्छा लिखें. टिप्पणियों का जवाब देना कोई बहुत ज़रूरी नहीं है.

हाँ, ब्लॉग पर ऊपर वाले हिस्से में आपकी 'फ़िल्मफेयरी' फोटो कुछ मौंजू नहीं दिख रही. देखकर लगता है जैसे आप अपने स्टार होने का सुबूत पेश कर रहे हैं....:-)

प्रभात रंजन said...

एकदम झकास बा भाई जी ब््लाग.... बात होत रही

Sanjeet Tripathi said...

न मुझे आपकी हिंदी के बारे में कोई शंका है न ही आशुतोष राणा जी के।
अभी इस इतवार को आशुतोष राणा और राजपाल यादव जी रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से से दो घंटे चर्चा कर गए हैं।

मैनें अपने ब्लॉग में लिखा भी है कि मैं उनकी हिंदी का कायल रहा हूं।
http://sanjeettripathi.blogspot.com/2008/08/ashutosh-rana-in-raipur.html

इस बात के लिए तो मुआफ करें कि मैं मनी है तो हनी है देखूंगा, क्योंकि गिनती की चुनी हुई फिल्में देखना ही पसंद है।
ऐसा नही है कि कोई अभिनेता पसंद ही है इसलिए उसकी हर फिल्म देखूं।
फिल्म में दम होगा तो खुद ब खुद देगी जाएगी बंधु, आपको किसी से कहने की जरुरत नही पड़ेगी शायद।

शुभकामनाएं।

liky said...

नमस्कार मनोज जी,
मै आपका एक आम प्रशंसक हूँ! मैंने आपको पहले भी संदेश भेजा था उसको पढने के लिए धन्यवाद! मै आपको हमेशा आपको संदेश करूँगा, आप ध्यान दीजियेगा!
मनोज जी मैंने आपके नए चिठ्ठे में नोटिस किया कि इसमे आपके स्वर थोड़े थोड़े रूठे से थे, क्या मै इसका कारण जान सकता हूँ? और मै यह भी जानना चाहूँगा कि आप इनदिनों किस कार्य में व्यस्त है?
आपके जवाब का इन्तेजार रहेगा.........................
धन्यवाद!
(मेरा हमेशा इन्तेजार रहेगा कि आप मुझे एक पर्सनल संदेश मेरे ईमेल या मेरे ब्लॉग पर भेजे!)

shashisinghal said...

मनोज जी हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। आपने अपना ब्लोग हिन्दी में लाकर बहुत अच्छा किया है मुझे उम्मीद है कि आपका ब्लॉग हिन्दी में होने के कारण इससे आम लोग जुड़ सकेंगे । कोई कुछ भी कहे लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि यह आपका ही ब्लॉग है । फिर मुझे इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि आप किससे काम करा रहे हैं । मुझे खुशी है कि मैं आपसे ब्लॉग के माध्यम से सीधे बात कर सकती हूं ।
वैसे तो मैं आपकी एक्टिंग की फेन हूं मगर आपकी सत्या व पिंजर काफी अच्छी लगीं ।
आप अपने रंगमंच से जुड़े़ अनुभवों को बताएं तो हमें आपके भावों व अभिव्यक्ति के बारे में जानकारी मिलेगी तो अच्छा रहेगा । आप लिखते रहें, अच्छा से अच्छा लिखते रहें इस शुभकामना के साथ,
शशि सिंघल
अवसर मिले तो मेरा ब्लॉग भी देखें और अपनी प्रतिक्रिया दें ----
www.meraashiyana.blogspot.com

नीरज गोस्वामी said...

मनोज जी
आप अच्छे कलाकार हैं और अच्छे व्यक्ति से हम अच्छा सुनने और पढने की अपेक्षा करते हैं...आप की अभिनय क्षमता का मैं कायल हूँ और इसी लिए प्रशंशक भी....लेकिन जब आप दोयम या तीसरे दर्जे की "हनी है ...टाइप फिल्में करते हैं तो बहुत कोफ्त होती है...क्या पैसा कमाना इतना जरूरी होता है, की अच्छे बुरे का भान ही न रहे? आप किस फ़िल्म में काम करते हैं ये आप का व्यक्तिगत मामला है लेकिन आप की पुरानी फिल्मों से जो आप के काम की छवि बनी है उसे धूमिल ना करें.
ब्लॉग जगत में स्वागत है.
नीरज

नीरज गोस्वामी said...

मनोज जी
आप अच्छे कलाकार हैं और अच्छे व्यक्ति से हम अच्छा सुनने और पढने की अपेक्षा करते हैं...आप की अभिनय क्षमता का मैं कायल हूँ और इसी लिए प्रशंशक भी....लेकिन जब आप दोयम या तीसरे दर्जे की "हनी है ...टाइप फिल्में करते हैं तो बहुत कोफ्त होती है...क्या पैसा कमाना इतना जरूरी होता है, की अच्छे बुरे का भान ही न रहे? आप किस फ़िल्म में काम करते हैं ये आप का व्यक्तिगत मामला है लेकिन आप की पुरानी फिल्मों से जो आप के काम की छवि बनी है उसे धूमिल ना करें.
ब्लॉग जगत में स्वागत है.
नीरज

Poonam said...

मनोजजी , हिन्दी चिट्ठाजगत में स्वागत है. जैसा की हर नए चिट्ठाकार के आने से होता है वैसे ही आपके आने से भी हिन्दी चिट्ठाकारिता को एक नया आयाम मिलेगा.आपके अनुभव , आपके विचार इसे और समृद्ध बनायेंगे .शुभकामनायें

Geet Chaturvedi said...

स्‍वागत है भाई.
पर ये क्‍या यार, मनोज बाजपेयी को मनोज बाजपेयी बने रहना चाहिए. ये मनी हनी टाइप की फिल्‍में न करें, तो बेहतर. अभिनय का कोई देवता होता हो, तो वह हमेशा मेहरबान ही रहा आप पर. आगे भी रहे. बाक़ी जोकरई तो भाई लोगों के पास ही रहने दें.

singhsdm said...

Manoj ji,
"Kuch to log kahenge... logon ka kaam hai kahna." Are bhai ham jaante hain ki UP-BIHAR ka aadmi kahin chala jaaye, apni bhasha-apni aadat-apni parampara-apna atit kabhi nahi bhoolata. Apne favourite actor ke baare main ye DABANGAI ke saath kah sakta hoon...Manoj na kewal Hindi kejaankaar hain balki Hindustaniyon ki nabz ke bhi.

भुवनेश शर्मा said...

लिखते जाईये जी...हम पढ़ रहे हैं

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

avishwas to abhi bhi kayam hai.. par jab hame blogs padhne ka itna shauk hai ki sabke blogs padhte hai to fir aapka bhi padhenge ji..

ho sake to zubaida aur shool ke anubhav share kare..

Udan Tashtari said...

मुझे तो यह बात ही नहीं समझ आ रही है कि क्यूँ किसी को संदेह हो रहा है कि यह ब्लाग आपका नहीं?

आप निश्चिंत होकर लिखें.

आपने हिन्दी ब्लाग जगत में कदम रखा है. अपने साथ द्विपक्षीय संवाद के रास्ते खोले हैं, आपका हृदय से स्वागत है. नियमित लिखें, शुभकामनाऐं.

-समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'

poemsnpuja said...

आपके interview पहले भी देखे हैं, ये बात तो जानती थी की आप बहुत अच्छी हिन्दी बोलते हैं, आपका ब्लॉग पढ़कर एक सुखद अनुभूति हुयी. फ़िल्म जगह से जुड़े अधिकतर लोगो के ब्लॉग अंग्रेजी में हैं, मुझे यहाँ ये समझ नहीं आता की जब हिन्दी में बनी उनकी फिल्में इतने सारे लोग देखते हैं तो ब्लॉग क्यों नहीं पढेंगे. उम्मीद है आप अपने अनुभव शेयर करेंगे...और हिन्दी में आगे भी लिखते रहेंगे.

सुजाता said...

लीजिये ,
घुघुती जी ने पहले से ही मेरा कमेंट यहाँ चेप रखा है अपने नाम से । फिर भी दुबारा लिख देती हूँ ---

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। मुझे इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि आप कौन हैं। यदि ब्लॉग अच्छा लगेगा तो आती रहूँगी। यहाँ सब बराबर हैं, चाहे वे तोप हों या तमंचा। केवल आप क्या लिख रहे हैं यही महत्वपूर्ण है। आपकी या किसीकी भी फिल्म देखूँगी इसमें संदेह है। आप लिखते रहें, अच्छा से अच्छा लिखते रहें इस शुभकामना के साथ,

सुजाता

डा. मेराज अहमद said...

हिन्दी को देश व्यापी बनाने में यक़ीनी तौर पर हिन्दी सिनेमा का सबसे अहम योगदान है, आप जैसे कुछ और नामी-गिरामी लोग इस मीडियम में अगर आते हैं तो कुछ हो न हो, अन्तर्जाल,जहां कि संसार की दूसरी भाषाओं के समानान्तर हिन्दी का कोई मक़ाम ही नही हिन्दी को ऊपर आने में मदद मिलेगी।

oshowin said...

प्रिय मनोज ,
फिल्मी दुनिया के इन मूढो की दुनिया में जहाँ हिन्दी की खा के हगते अंग्रेजी में हैं चलो कुछ तो माई के लाल हैं जो हिन्दी में बोलने की हिम्मत रखते हैं .
सस्नेह
अश्वनी
www.bestoutofyou.com

Tarun said...

आपने ही अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था नाम में क्या रखा है, अब मैं उसी बात पर कह रहा हूँ क्या फर्क पड़ता है कि ये किस मनोज का ब्लोग है। आप अच्छा लिखेंगे तो हम क्या सब पढ़ने आयेंगे, अच्छा नही लिखेंगे तो कोई नही। रही फिल्म के प्रचार के लिये लिखने की तो इसमें कोई बुराई नही, आजकल वैसे भी प्रचार के इतने ज्यादा माध्यम हैं जिसे देखकर किसी को भी पहले ही समझ आ जाता है कि कोई फिल्म कैसी होगी।

मनी है तो हनी है मैने अभी नही देखी लेकिन इस फिल्म के प्रचार से जुड़े लेख, क्लिप आदि देखकर अभी इतना ही कस सकता हूँ इसमें "ना मनी है ना हनी"। आपकी फिल्म स्वामी जरूर पसंद आयी, आपकी एक्टिंग भी कमाल की थी और फिल्म भी।

Neeraj Rohilla said...

मनोज बाजपेईजी,
शुरू में थोडा अविश्वास हुआ लेकिन फ़िर मन में यकीन भी आया कि अगर हिन्दी में लिखेंगे तो आप, अथवा अपने आशुतोष राणा सरीखे कलाकार ही लिखेंगे ।

ठुमरी ब्लाग चर्चा चलाने वाने विमल वर्मा जी से आपके बारे में कुछ जानकारी उनके ब्लाग पर पढी थी । अब सीधे आपसे मुखातिब होने के इन्तजार में हैं ।

आपसे रिश्ता तब से है जब बचपन में स्वाभिमान घर वालों की मर्जी के खिलाफ़ छुपकर देखा करते थे (कक्षा ८-९ में) । इसमें भी पूरा स्वाभिमान एक तरह और आपकी अदाकारी का एक द्र्श्य एक तरफ़ । आपको शायद याद ही होगा, लिखने के बहाने हम उसे एक बार फ़िर याद कर लेते हैं ।

सुनील वर्मा एक कुर्सी पर बैठा हुआ है। उसकी मित्र/मंगेतर पास में खडी है । और इस द्र्श्य में सुनील वर्मा अपने आप को अपने मां बाप की नजरों में खुद ही अपराधी बना रहा है । उफ़्फ़, आज भी ताजा है वो द्र्श्य, नहीं भूल सकता...

Neeraj Rohilla said...

अत्यधिक उत्साह में लिखते समय टिप्पणी में वर्तनी की कुछ अशुद्धियाँ हो गयी हैं । क्षमाप्रार्थी हूँ ।

Ghost Buster said...

बहुत पहले किसी टीवी इंटरव्यू में आपको बच्चन जी की "जो बीत गयी सो बात गयी" कविता का पूर्णतः शुद्ध पाठ करते सुना देखा था. साथ में आपका कोई पुराना संस्मरण भी था. तबसे कोई शक नहीं है कि न सिर्फ़ आपकी हिन्दी पर पकड़ मजबूत है बल्कि उसके प्रयोग में आपको कोई झिझक भी नहीं है जैसा कि दुर्भाग्यवश फिल्मी दुनिया में अक्सर देखा जाता है. इसके लिए बधाई स्वीकार करें.

बेहतर लेखन के लिए शुभकामनायें.

दिनेशराय द्विवेदी said...

आज बहुत टिप्पणियाँ हैं। लगता है लोगों ने मान लिया है यह मनोज बाजपेयी का ही ब्लाग है। हम आप की फिल्मों की बात नहीं आप की बात जानना चाहते हैं। आप की कोशिशें, आप की असफलताएँ, आप की मुहब्बतें, आप की आकांक्षाएँ, आप के दुख, आप की खुशियाँ और वह सब कुछ जो आप से कोई नहीं पूछता और आप बताना चाहते हैं।

vinay k joshi said...

समाचार माध्यमों से जो जानकारियां मिलाती है अगर उसी का विस्तार मात्र है यह चिट्ठा, तो व्यर्थ है | मन में अंकुरित मौलिक विचारो, कविताओ, अनुभूतियों, संस्मरणों की बात होगी तो अच्छा लगेगा | रजत पटल की बातें कम से कम हो तो अच्छा |
शुभकामनाओ सहित
विनय के जोशी
www.vinayvishesh.blogspot.com

Nitish Raj said...

यदि ये सही है तो बहुत बढ़िया है।

anitakumar said...

मनोज जी आप का स्वागत है यहां बाकी तो जो घुघुति जी ने कहा वही हम भी कहेगे।

अजित वडनेरकर said...

आपके लिए कोई और नहीं लिख रहा है यह जानकर तसल्ली हुई।
वैसे बैरीजॉन जब हिन्दी बोल सकते हैं तो फिर उनका चेला क्यों नहीं लिख-बोल सकता ?

जितेन्द़ भगत said...

अरे आप यहॉं हैं , मँ तो आपको 'मनी है तो हनी है' में ढ़ूँढ रहा था। पिंजर वाले मनोज तो न जाने कहॉं चले गए!

अभय तिवारी said...

स्वागत है मनोज आप का! इतने बरसों बाद आप से यहाँ मिलना होगा, ये नहीं सोचा था!
फ़िल्मी सितारे आम लोगों से इतने दूर होते हैं कि लोगों को कभी लगता ही नहीं कि वे उन्ही की तरह हँसते-बोलते होंगे। आप की पहचान के ऊपर शक़ इसी बुनियाद से हुआ होगा।
आप कॉम्प्यूटर सीख रहे हैं अच्छी बात है, और ब्लॉग खोल लिया ये तो और भी बेहतर। अभिनेता को उसकी आकांक्षाओं के मुताबिक़ किरदार मिल जायं, ज़रूरी नहीं। और व्यक्ति की सारी अभिव्यक्ति अभिनेता के चोले से हो जाय ये तो और भी मुश्किल.. ऐसी तमाम छूटी हुई बातों, घातों, और संवेदनाओं का माध्यम बनाईये इस ब्लॉग को.. मज़ा आएगा.. !
शुभकामनाओं के साथ.. एक पुराना दोस्त!

vineeta said...

मनोज जी आपका इस्तकबाल है ब्लॉग की दुनिया में. लेकिन ये ....मैं ही मनोज बाजपेयी हू.... का नारा लगाना बंद कर दीजिये. आप कौन है, ब्लोगियों को फर्क नही पड़ता. अच्छा लिखेंगे तो पढ़ा और सराहा जाएगा और बेकार लिखेंगे तो लतियाया भी जायेगा. एक बार फिर स्वागत है....

G Vishwanath said...

विनीताजी लिखती हैं
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आप कौन है, ब्लोगियों को फर्क नही पड़ता. अच्छा लिखेंगे तो पढ़ा और सराहा जाएगा और बेकार लिखेंगे तो लतियाया भी जायेगा.
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काश यह सच होता!
अच्छे लिखने वाले तो बहुत हैं पर उनका लिखा हुआ कितने लोग पढ़ते हैं? नहीं विनीताजी। फ़िल्म सेलेब्रिटी तो हमारे समाज में विशेष व्यक्ति होते हैं। जनता का प्यार उनको आसानी से मिल जाता है। वैसे मनोज तो हिन्दी में अच्छे लिख लेते हैं (पर उनका अंग्रेज़ी अनुवाद से मैं सन्तुष्ट नहीं हूँ) पर यदि नहीं भी लिखते तो भी उनको पाठक बहुत मिल जाएंगे।

देखते रहिए। आजकल पचास के करीब टिप्पणियाँ पाते हैं एक ही दिन में। हिन्दी के जाने माने चिट्टाकार श्री समीर लाल ("उडन तश्तरी") को जब एक विशेष पोस्ट पर १०० टिप्पणियाँ मिलीं थी तो वह उनके लिए नया कीर्तिमान बन गया था और हम सब उनको बधाई देने चले थे।

मेरा मानना है कि मनोज जल्द ही हिन्दी ब्लॉग जगत में टिप्पणियों का नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

एक और बात नोट की है मैंने।
हिन्दी में आपको कई सारी टिप्पणियाँ मिल रही हैं।
अंग्रेज़ी में बहुत कम। सोच रहा हूँ "ऐसा क्यों"?

मनी है तो हनी है देखना चाहता था लेकिन रवि रतलामीजी ने हमें सचेत कर दिया है। कोई बात नहीं । फ़ुरसत मिलने पर सत्या, शूल, पिंजर और अक्स देखेंगे। हम ने मनोज की कोई भी फ़िल्म नहीं देखी अब तक पर अब अवश्य देखेंगे।

मनोजजी, लिखते रहिए। अब विश्वास हो गया है कि लिखने वाले आप ही हैं! यदि नहीं हैं तो भी कोई बात नहीं। इतने सारे लोग मेरे साथ अगर ठगे जाते हैं तो मुझे उतना बुरा नहें लगेगा।
शुभकामनाएं
गोपालकृष्ण विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु

Amit K. Sagar said...

बहुत खूब. आपको यहाँ पाके खुशी हुई. लिखते रहिये...हम पढ़ते रहेंगे. शुक्रिया.
---
कृपया यहाँ भी आयें;
उल्टा तीर
उल्टा तीर (निष्कर्ष)
---
अमित के. सागर

appaliwal said...

manoj ji
well it is a good effort please keep it up and please donot make it a space to take ou presonal issues or 'khunnas as we say in hindi. i've stopped reading big b's blog b'cause he uses it as a medium to settle personal scores

Alag saa said...

ई का; जानत हऊआ "सत्य जब डरे लागी तो पिंजरवा का अक्स शूल बन तंगयीबे करी।" बोलने वालों को तो बोलने का बहाना चाहिए। आप तो मस्त संतरण करिए ब्लागों के सागर में।

madgao said...

कुछ लोग होते, हैं लगते नहीं /और कुछ लोग लगते हैं,होते नहीं; अन्ततः समय प्रमाणित करेगा?

Satya said...

manoj ji,
mera naam chetan hai. aapki acting bahut lajwaab hai. lekin kabhi apne purane doston ko bhi yaad kar liya kijiiye. main janta hoon, aapke ek purane dost shri sanjay ojha ko, jo bettiah aur phir BHU, Varanasi se padhne ke baad philhal delhi mein senior bureaucrat hain.unka mobile number blog par dena theek nahin rahega. Agar dil mein aaye, to sanjay ojha ji se baat karne ya unka mobile no. lene ke liye mujhe e-mail karen: mechetan@hotmail.com

Satya said...

manoj ji,
mera naam chetan hai. aapki acting bahut lajwaab hai. lekin kabhi apne purane doston ko bhi yaad kar liya kijiiye. main janta hoon, aapke ek purane dost shri sanjay ojha ko, jo bettiah aur phir BHU, Varanasi se padhne ke baad philhal delhi mein senior bureaucrat hain.unka mobile number blog par dena theek nahin rahega. Agar dil mein aaye, to sanjay ojha ji se baat karne ya unka mobile no. lene ke liye mujhe e-mail karen: mechetan@hotmail.com

swati said...

बहुत बढ़ियां अभिव्यक्ति. असीम संभावनाएं ....शुभकामनाएं !

Shefali Pande said...

मैं भी आपकी प्रशंसक हूँ ....बराबर लिखते रहिये ...