Friday, August 15, 2008

यादों के सफ़र में स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी साथियों को मेरी तरफ़ से बधाइयाँ और शुभकामनाएँ।

एक छोटी-सी झोंपड़ी, लकड़ी की चौकी पर बैठे हुए मास्टर साहब, सामने बोरी पर बैठा हुआ मैं और मेरे साथ गांव के कई बच्चे। और क, ख, ग की आवाज़ से पूरा माहौल गूंज रहा था। क्लास ख़त्म करने से पहले मास्टर जी ने कहा कि अगले दिन बाँस की छोटी-छोटी तिल्लियाँ लेकर आना और तिल्लियों में तिरंगा बनाकर लाना। पूरी रात हम तिल्लियाँ काटते रहे, छीलते रहे और क़रीब पंद्रह-बीस तिरंगे तिल्लियों में डालकर अगले दिन स्कूल पहुंचे। एक मध्यम आकार के लकड़ी के पोल से तिरंगा लगा हुआ था। मास्टर जी ने उसे लहराया और पहली बार मास्टर जी के सुर-से-सुर मिलाकर मैंने जन-गण-मन गाया था। विश्वास करें आज तक नहीं भूला हूँ। वो चार किलोमीटर पैदल चलकर जाना, क़तार में सारे बच्चों के पीछे हाथ में तिरंगा लेकर पगडण्डियों पर चलते जाना रह रहकर याद आता है।

वापस घर जाकर माता-पिता को जन-गण-मन टूटी-फूटी आवाज़ में सुनाना भी याद है। उस समय का हिन्दुस्तान भी कुछ याद है और उस समय का बिहार भी याद है। क़रीब तीन साल पहले फिल्म '1971' की शूटिंग कर रहा था, तो रोहतांग पास की माइनस 14 डिग्री की ठंड में दस दिन तक शूटिंग करते हुए भी परेशानी का एहसास कभी नहीं हुआ। इसका कारण शायद बचपन में पड़ा देश के लिए जज़्बे का बीज था। शायद इसलिए सारी यूनिट के हतप्रभ होते भी दस दिन तक मौत से खेलते हुए '1971' के क्लाइमेक्स की शूटिंग की थी। क्योंकि मैं अंदर से सिर्फ़ फ़िल्म नहीं बना रहा था। मैं अपने काम से अपने देश के प्रति अपना सम्मान प्रगट कर रहा था। जब पुणे में '1971' के प्रदर्शन के बाद लेफ़्टिनेंट जनरल ने कहा कि ये फ़िल्म हली फ़िल्म है, जिसने इंडियन आर्मी के साथ न्याय किया है तो मेरी आँखें भर आईं थीं। '1971' की शूटिंग मेरे लिए मेरी बेहतरीन यादों में से एक है। '1971' ने मुझे बेहतरीन अभिनय का सुख दिया। '1971' मेरी अच्छी और बेहतरीन फ़िल्मों से एक है। '1971' मेरे देश की फ़िल्म है और वो मेरे लिए गर्व है।

वैसे, अपनी यादों से इतर बात करूँ तो जब-जब यह दिन आता है, तब-तब इसको मनाने के तरीक़े आपकी आँखों के सामने दिखते हैं और कानों को सुनायी भी देते हैं। कहीं ढोल-नगाड़े बजते हैं तो कहीं टेलीविजन पर प्रधानमंत्री का भाषण चल रहा होता है। कहीं पर बच्चों की किलकारियाँ सुनायी देती हैं, तो किसी-किसी घर से कोई भी आवाज़ नहीं आ रही होती है - मतलब छुट्टी मन रही है। इस बार का स्वतंत्रता दिवस कुछ अलग है और बहुत ही मिला-जुला भी। मन में विभिन्न तरह के विचार आ रहे हैं। अभिनव बिंद्रा के गोल्ड मेडल जीतने की ख़ुशी भी है, तो नैना देवी में 100 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने, अहमदाबाद ब्लास्ट में कई लोगों के मारे जाने, जम्मू-कश्मीर में रोज़ होने वाली मौतें-प्रदर्शन और उनसे उठती हुई राजनीति तथा अनेक प्रकार की अच्छी और बुरी बातें इस बार मन को सुकून भी दे रही हैं तो परेशान भी कर रही हैं। हर बार के स्वतंत्रता दिवस पर एक सजग नागरिक होने के नाते सोचता हूँ कि कब वो दिन आएगा, जब हम बिना परेशानी के, बिना किसी द्वंद्व के गर्व के साथ झंडे के नीचे खड़े होकर जन-गण-मन गा सकेंगे। आशा है कि वो दिन क़रीब है। आशा है कि सारे लड़के और लड़कियाँ शिक्षा के रास्ते पर चलेंगे। आशा है कि सबको बराबर का अवसर मिलेगा। आशा है कि सबके पास रोटी, रोज़गार, कपड़ा और मकान होगा। आशा है तभी कुछ हो सकता है। आशा है तभी कुछ बदलेगा। क्योंकि पाश ने सही कहा है कि सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना। हम सब सपने देखते रहें। सपने देखना भी एक गतिविधि है या यूँ कहें कि सपना देखना ही आगे जाने का संकेत करता है। बाक़ी तो सही कहा है कि जो बीत गई सो बात गई। चलिए, हम मिलकर सपना देखें।

आज स्वतंत्रता दिवस का मौक़ा है, तो यादों में यही दिन था। पिछली पोस्ट पर कई कमेंट थे। आलोचना है - प्रशंसा भी। कई के जवाब ज़ेहन में हैं, लेकिन वो सब अगली पोस्ट में। एक बार फिर, स्वतंत्रता दिवस की बधाई।

आपका

मनोज बाजपेयी

34 comments:

देवेश वशिष्ठ ' खबरी ' said...

मनोज, तिरंगे और खासकर 15 अगस्त से बचपन की ऐसी यादें सभी से जुड़ी होती हैं, और वही यादें कभी कभी दिशा भी तय कर देती हैं. आज आप अच्छे अभिनेता हैं तो उसमें भी शायद 15 अगस्त को गांव से स्कूल में सजी किसी स्टेज और उस पर आजमाए गए किसी नाटक का ही योगदान रहा होगा... छोटी छोटी यादें संजोते रहें और अपनी जिंदगी का सफरनामा लिखते रहें- ब्लॉगिंग की दुनिया में स्वागत है...
देवेश वशिष्ठ 'खबरी'
(Tehelka)

Anil Pusadkar said...

sapne marna nahi chhahiye, swatantrata divas ki aap ko shubh kamnayne

Rajesh Roshan said...

स्वतंत्रता दिवस पर सभी देश वासियों को बधाई..... यह देश जितना बदला है उससे कही ज्यादा यहाँ के नेता बदल गए हैं जिससे देश की अच्छाई थोडी धूमिल हो गई है इसके बावजूद भारत महान है

पंगेबाज said...
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नयनसुख said...
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Shuaib said...

आपको स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

Rajeev Ranjan said...

मनोज जी..


ब्ळोग पर आपके इसी प्रकार के आलेखों की प्रतीक्षा है। अब तो उनका भ्रम भी टूट गया होगा जो यह मान रहे थे कि आपके स्थान पर किसी और नें ब्ळोगरी की है। स्वाधीनता दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनायें...


पता नहीं हम आज इस दिवस से स्वयं को उतना जुडा नहीं पाते जितना अपने बचपन या कि स्कूली दिनों में..शायद देश जिस दिशा में जा रहा है, यह पावन दिवस भी अपनी उपादेयता खो रहा है। आप से एसे विषयों पर फिल्मों की भी अपेक्षा है...एक और दमदार और सार्थक फिल्म का इंतजार लंबा होता जा रहा है।


यासीन मलिक जैसे राष्ट्रद्रोहियों के साथ ब्ळोगरी के जो प्रश्न उठे हैं उम्मीद है अगले पोस्ट में आप उत्तर के साथ भी प्रस्तुत होंगे।


स्वाधीनता दिवस की शुभकामनायें..


***राजीव रंजन प्रसाद

www.rajeevnhpc.blogspot.com
www.kuhukakona.blogspot.com

दिनेशराय द्विवेदी said...

सोचते हैं आप भी वैसा ही कुछ जैसा कि मैं ...

आजाद है भारत,
आजादी के पर्व की शुभकामनाएँ।
पर आजाद नहीं
जन भारत के,
फिर से छेड़ें, संग्राम एक
जन-जन की आजादी लाएँ।

सुनीता शानू said...

मनोज भाई, आपको व आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.
जय-हिन्द!

Sarvesh said...

अरे मनोज भाई,
आपको इधर देखकर बहुत अच्छा लगा.सच पुछिये तो सुबह से जो सोच रहे थे वो आपने यहां लिख दिया.
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आपको ढेर सारी बधाई.

राजीव तनेजा said...

मनोज जी...आपको भी स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभ कामनाएँ....
ये जानकर अच्छा लगा कि आपको देश की...दुनिया की खबर है....वर्ना आम जन के दिमाग में यही बात होती है कि आप जैसे फिल्मी सितारे किसी और ही दुनिया में रहते हैँ।....

आपने वाकई 1971 में बहुत ही बढिया काम किया है।मैँने ये फिल्म दो बार देखी है लेकिन टिकट या डी.वी.डी खरीद कर नहीं बल्कि उसके पाईरेटिड वर्ज़न को नैट से डाउनलोड कर के

Sanjeet Tripathi said...

स्वतंत्रता सेनानी पिता की संतान होने के कारण, स्वतंत्रता दिवस को लेकर मेरी यादें थोड़ी सी अलग हैं।

रहा सवाल "1971" तो वाकई चुनिंदा फिल्मों से एक है जो मुझे पसंद आई।
इस फिल्म को देखने के बाद मैने कितने लोगों से इसे देखने की सिफारिश की है मुझे खुद याद नही।

Udan Tashtari said...

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

Alag saa said...

हम सब का सपना, सपना ना रह कर हकीकत मे जल्द बदले, जिससे आने वाली पीढ़ी भी सुख से खुली हवा में सांस ले सके।
आमीन।

siddharth said...

आज़ादी का मंत्र जप रहे ब्लॉगर भाई।
मेरी भी रख लें श्रीमन् उपहार बधाई॥

Radhika Budhkar said...

मनोज जी,आप की फिल्म देखी हैं,आप बहुत अच्छे अभिनेता हैं यह पता था,पर आप बहुत अच्छे अच्छे लेखक भी हैं नही पता था,
आपका ब्लॉग देखकर बहुत अच्छा लगा,आप सब भारतीयों के लिए मंगल कामना कर रहे हैं,मुझे विश्वास हैं की एक न एक दिन ऐसा जरुर आएगा,जब सुम्पूर्ण भारत एकता के सूत्र में बंधकर,झंडे के निचे खडे होकर राष्ट्रगान गायेगा,तब न कही आतंक होगा,न भुखमरी,हर जुबा पर बस यही लफ्ज़ होंगे "सरे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिता हमारा .

शहरोज़ said...

bhai idhar aana bahut sukhad hua.
achchi soch ko naman.
aap jaise vidvaanon ke sahyog ki aankaansha liye ik naya blig b hai hamara.zaroor aayen.
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/

apne yahan aapka link de raha hoon.

GIRISH BILLORE MUKUL said...

प्रिय मनोज भाई
असीम स्नेह ही कहूंगा इस बात से बेखबर होकर कि मेरी आपकी उम्र में कोई अन्तर है कि नहीं
ऐसा मैं क्यों कर रहा हूँ मुझे ख़ुद समझ नई आता बहरहाल
सच उन दिनों हमारे स्कूल में एक दिन पहले हर कमरों को सजा लेते थे हम कवि तलाशता था जो की मुझे एक देश भक्ति भरा गीत दे दे सफल भी होता गांधी टोपी लगा कर कविता पड़ना
गाँव के स्कूल रंग बिरंगी पन्नियों की भासण देना और दरों इनाम लेकर घर लौटना माँ के कलेजे से लगना सब याद आ गया आभार बीते दिन याद दिलाने के लिए मनोज भाई शुक्रिया
पूरे ब्लॉग का ये हिस्सा दिल को छू गया
हर बार के स्वतंत्रता दिवस पर एक सजग नागरिक होने के नाते सोचता हूँ कि कब वो दिन आएगा, जब हम बिना परेशानी के, बिना किसी द्वंद्व के गर्व के साथ झंडे के नीचे खड़े होकर जन-गण-मन गा सकेंगे।

डा० अमर कुमार said...

शुभकामनायें...और हम कूश्श नेंईं बोलेगा ।
जैसे अब तक काम चलाते आये हैं,
वैसे ही सिरि शुभकामनाओं से अपना काम चलाते रहिये !
ऒईच्च..हम बोलेगा तो बोलोगे की बोलता है,
हम कूश्श नेंईं बोलेगा ...

Neeraj Rohilla said...

मनोजजी,
आपको एवं आपके परिवार को भी स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें । हमारी यूनिवर्सिटी (Rice University, Houston) में भी सारे भारतीय विद्यार्थी मिलकर आज स्वतंत्रता दिवस मनायेंगे । उसकी रिपोर्ट मैं अपने चिट्ठे पर कल लिखूँगा ।

आपके अगले लेख का इन्तजार रहेगा ।

सतीश पंचम said...

अपनी यादों को इसी तरह बिखेरो बंधु,बचपन हो या जवानी...ठेठ लहजे को बनाये रखें, आप पर फबता भी है....वरना सफलता की खौंखियाहट में इंग्लिशिय़ा जाना आश्चर्य की बात नहीं है।
ब्लॉग अच्छा ।

jitu said...

नमस्कार मनोज जी,
आपको बहुत बहुत मुबारक हो स्वतंत्रता दिवस और राखी पर्व! सबसे पहले तो यह जानकर खुशी हुई कि आपके द्वारा देश की स्वतंत्रता को लेकर कितने अच्छे विचार और जुडाव है! और आपके द्बारा देश भक्ति के संदेश पहुचने वाली फ़िल्म '1971' में आपका हिस्सा होना भी गर्व की बात है!
मै भी ज्यादा कुछ नही कहते हुए आपको आपके द्बारा भेजे गए संदेश के लिए बहुत बहुत बधाई देना चाहता हूँ!
(नोट - मेरा अरमान है कि आप कभी न कभी मुझे फुरसत निकाल के निजी संदेश भेजे! धन्यवाद!)

G Vishwanath said...

लगे रहिए।
स्वतंत्रता दिवस पर आपका लेख पढ़कर बहुत अच्छा लगा।

अब तक आपकी किसी भी फ़िल्म नहीं देखी थी।
हिन्दी फ़िल्में बहुत कम देखता हूँ।
आज शनिवार विडियो वाले से "सत्या" मँगाकर पूरी फ़िल्म देखी।
उच्च्तम।
Tremendous performance from all of you.
**** rating.
अब इन मुम्बई के "भाई लोग" के मन के अन्दर झाँकने का अवसर मिला इस फ़िल्म के जरिए।

एक एक करके "अक्स", "शूल" "पिंजर" और "1971" भी देखूँगा।
आशा है इन्हें उतना ही पसन्द करूँगा जितना "सत्या" को पसन्द किया।
शुभकामनाएं।

dibyanshu said...

मनोज जी, सबसे पहले तो आपको बधाई, इस बात के साथ कि ब्लॉग का रोग आपको भी लग ही गया...दरअसल यह पूरा मामला दृष्टि का है...जिसकी जैसी रहेगी वह उसी तरह से सोचेगा...आपसे दो बार मेरी मुलाकात भी हो चुकी है...आपको यकीन नहीं होगा लेकिम देश में एक ऐसा क्लास भी है जिसे बीड़ी जलाने के लिए पड़ोसी के चूल्हे पर जाने की बात अटपटी लगती है...कजरारे नयनों का जादू अधिक देर तक बरकरार नहीं रहता है...लेकिन जनगनमण की धुन कान में जाते ही देह में सनसनी फैल जाती है...आप ऐसे ही लोगों में हैं...एक बेहतरीन इंसान...यही वजह है कि आप आज के भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना पाए हैं...वरना किस माई के लाल में दम है जो वह कह दे कि राम गोपाल वर्मा के साथ अब कोई फिल्म नहीं करेंगे...खुद्दारी के साथ आप अपना काम जारी रखिए...स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आपके इस जज्बे को हम सेल्यूट करते हैं...

कुमार आलोक said...

फिल्मों में एंट्री पाने के लिये स्टारपुत्र का होना , रामबिलास पासवान जी का चिराग होना पहली प्राथमिकताओं में से एक शायद एक है । मैं नही जानता था कि एनएसडी में आपको दाखिला नही मिला ..लेकिन गांव की पगडंडियों पर तिरंगा लेकर चलने वाला , चटइया स्कूल में बोरे पर बैछकर राष्ट्र गान याद करने वाला मनोज बाजपेयी ने अपना मुकाम खुद बनाया है ...बहुत बढिया लगा आपको व्लाग पर देखकर ....

appaliwal said...

achhaa hai

Nikhil said...

Manoj Sir Namaste, I remember u talked about 1981 on the sets of Jugaad ...After i saw this film i was completly awestuck and could not understand as to why it wasn't promoted in a big way or why it wasn't released in theatres. I thought it would have done great business probably better than Khosla ka Ghosla.
Sir aaj bhi uss film ka theatre release agar ho to mazza aa jai

rahul said...

jankar khushi hui ki aapne apna blog hindi me likha. kyonki ab aur bhi jyada log arth ke alawa bhavnayein bhi samajh payenge.

Neelima said...

मनोज जी ,

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्लैमर जगत से राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र हित की बातें सुनकर अच्छा लगा !

sushant jha said...

बहुत खूब...आपकी लेखनी से अपने माटी की गंध आती है...और कई लोग तो यूं ही खुश हैं कि आप हिंदी भी लिख लेते हैं। दूसरे हीरो तो बोल ही लेते हैं जो एहसान है।

आशीष said...

Samay nikal kar bus aap aise hi likhate rahe hain SIr

amitmeelan said...

manoj ji aapko bhi badhai is blog k liye aur swatantrta diwas ki bhi. par ab kaam ki baten karne ka samy a gaya hai jab shabana ji jesi abhinetri jise desh ne itana samman diya aur sansad tak puchaya unka ye kahana ki muslim hone k kaaran unhain mumbai main flet nahi mil raha is par ap kya sochate hain.jroor bataiyega .ek baar fir bhadi.

soniya said...

MANOJJEE AAP AUR AAP JAISE HI AANYA ABHINETA JAISE-ASHUTOSH RANA,MUKESH TIWARI,RAGHUVEER YADAV,PANKAJ KAPOOR AADI LOGO KE KARAN HI MUJHE YE VISHWAS HAI KI EK ROJ MAI BHI FILM INDUSTRY ME AS A WRITER APANI JAGAH BANANE ME JAROOR KAMYAAB HO JAUNGA .
MAI M.P. KE EK CHOTE SE GAOWN "TONKI" KA RAHNEWALA HOO .ABHI INDORE ME STRUGLE KAR RAHA HOO.JALD HI MUMBAI AANEWALA HOO.
MAI HINDIPREMI AUR HINDIBHASHI HI HOO PAR COMPUTER PAR HINDI TYPEING NAHI AANE KE KARAN ENGLISH ME LIKHANA PAD RAHA HAI.
PLEASE GIVE ME BEST WISHESH AND PROPER GUIDENCE FOR STRUGLE IN MUMBAI.

pia said...

ram gopal verma ke bare mai aap ne jo blog likha wo padhke dukh hua. jsroori nahi ki agla jo galti kare hum uska jawab de.log apko jante hai.or unko bhi.dosto ko baaton ki pushti dena jaroori nahi hota.or dushman kitna bhi pushti de do nahi manege.
shipraa srivastava
new delhi