Sunday, August 24, 2008

बाज़ार में करता हूँ अभिनय का होमवर्क

शनिवार का दिन परिवार के साथ रहा। अमूमन मैं और मेरी पत्नी बाजार के तरफ निकलते हैं, कुछ खरीदारी करते हैं। हमारी गिनीचुनी दुकाने हैं। मेरी पत्नी की जिद होती है कि मैं साथ जाऊं। नहीं तो, मुझे घर में घुसे रहना ही अच्छा लगता है। वैसे, जाने से अच्छी बात ये भी होती है कि दुकान में विभिन्न तरह के लोगों से मिलता हूं, उनकी बातचीत ,जीवन यापन और स्थिति को देखकर अभिनेता का बहुत सा होमवर्क कर लेता हूं। अभिनेता के लिए तो यह अच्छा ही होता है। लेकिन पत्नी ने कौन सा सामान लिया, ये याद नहीं रहता। भूलने की बीमारी मुझे बहुत ज्यादा है। अपने लिखे गए डायलॉग को अगर दोबारा मुझसे कहा जाए कि मैं फिर से बोलू तो कभी नहीं कर पाता। और इस बीमारी के कारण घर में अक्सर तकरार भी होती रहती ङै। तकरार से अच्छा ये होता है कि कोशिश करता रहता हूं हर चीज को याद रखने की। तो खैर, शनिवार का दिन परिवार के साथ बाजार का दिन था। कपड़े की दुकान वाले फोन किया कि बहुत सारा कपड़ा आया है। तो हम चले गए कपड़ा देखने ,खरीदारी की और उसके कर्मचारियों के साथ हंसी मजाक किएय। कुछ एक ऑटोग्राफ दिए और अभिनेता का बहुत सारा होमवर्क करके आ गया। अच्छा लगा, सुकून मिला।

मैंने कई मित्रों के कमेंट देखे। अच्छा लगा। वैसे, ब्लॉग शुरु करने के बाद बहुत अच्छी चीजें हुई मेरे साथ । एक तो लोगों के साथ जुड़ाव, सीधा संवाद शुरु हुआ। और दूसरा इसी बहाने कुछ लोगों ने मेरी फिल्मों और मुझे पसंद करना शुरु किया। जैसे,बंगलोर के भाई जी विश्वनाथ ने मेरी फिल्म सत्या देखी और उन्हें पसंद आई।

इन्हीं कमेंट में एक था-राजीव तनेजा का। ये याद इसलिए भी रह गया क्योंकि इसमें राजीव ने लिखा कि उन्होंने 1971 का पाइरेटेड वर्जन देखा। मेरी राजीव से और सभी चाहने वालों से निवेदन है कि वो फिल्मों को यथा संभव थिएटर में जाकर देखा करें। मेरी फिल्मों को भी। क्योंकि, आपके देखने से बॉक्स ऑफिस पर पैसा आता है। और मेरे जैसे कई फिल्मकर्मियों को, उनके काम को प्रोत्साहन मिलता है। और निर्माता हमारी तरह की फिल्में बनाने को मजबूर होता है। जब तक वो नहीं होगा, तब तक ये बुद्धिजीवियों के ड्राइंग रुम की बातचीत होती रह जाएगी। आप मुझे पसंद करते ही रह जाएंगे और निर्माता उस अभिनेता को लेगा, जो अभिनेता उसे ज्यादा पैसे देगा बॉक्स ऑफिस पर। हमारी इंड्स्ट्री का चलन है कि जो ज्यादा पैसा लाए, वो ही ज्यादा बडा एक्टर और बड़ा स्टार कहलाएगा। दुनिया भी फिर उसी को देखती है । फिर आपका मुझे और मेरी पसंद की फिल्मों पसंद करना,उसके कोई मायने नहीं रह जाते।

कुछ लोगों ने मनी हनी की आलोचना भी की है। दरअसल, ये फिल्म एक आउट एंड आउट कॉमेडी फिल्म है। बहुत सारे लोगों को पसंद आयी, बहुत से लोगों को बिलकुल पसंद नहीं आई। लेकिन हमारी मेहनत में कभी कमी नहीं रही। इससे मुझे फायदा हुआ कि मेरे दर्शकों ने पहली बार जाना और माना कि मैं गंभीर किस्म की फिल्में और रोल ही नहीं करता हूं। मैं कॉमेडी फिल्मों और कॉमेडी रोल को भी सहजता पूर्वक निभा सकता हूं। वैसे,ये फिल्म करने का यह कारण नहीं था। कारण था निर्देशक गणेश आचार्य के साथ काम करना। उनकी अगली फिल्म फिर एक कॉमेडी होगी,जिसमें संभवत फिर मैं कॉमेडी करता दिखूं। कोशिश फिर करेंगे- आपका भरपूर मनोरंजन करने की और आपको न निराश न करने की। कोशिश एक ऐसी चीज है, जो हर मनुष्य को अपने अपने व्यवसाय में जुनून के साथ करते रहने होती है क्योंकि इसके अलावा हमें और कुछ तो आता भी नहीं है।

28 comments:

राजीव रंजन प्रसाद said...

यह तो वाकई अच्छी खबर्क़ दी आपनें..आपकी अगली (कॉमेडी) मूवी की प्रतीक्षा रहेगी।


***राजीव रंजन प्रसाद

सजीव सारथी said...

मनोज ये बताईये की अगर आप से पुछा जाए की पिंजर, सत्य, शूल और १९७१ में से आपकी ख़ुद की सबसे पसंदीदा फ़िल्म, एक फ़िल्म के नज़रिए से कौन सी है तो क्या कहेंगे ?

pravin said...

bajar sarjana ke raste bhi kholta hai...

दीपक भारतदीप said...

आपको जन्माष्टमी की बधाई
दीपक भारतदीप

जितेन्द़ भगत said...

आपके इस पोस्‍ट का first half काफी रूचि‍कर लगा, पर second half में कहानी थोड़ी दूसरी दि‍शा में चली गई। आप मुझे बहुत अच्‍छे और साफदि‍ल इंसान लगते हैं (वर्ना ब्‍लॉग पर आप आते ही क्‍यूँ) खुशी होगी यदि‍ अपने अनुभवों का ही हम भाइयों से साझा करें।

राजीव तनेजा said...

खुशी हुई जानकर कि आप एक बार फिर से कामेडी करने वाले हैँ...आपकी फिल्म का इंतज़ार रहेगा... और हाँ इस बार अवश्य ही सिनेमा हाल में जा कर....टिकट खरीद कर देखूँगा :-)

G Vishwanath said...

मनोजजी,

यह मैं क्या देख रहा हूँ?
इतने सारे पाठकों और प्रशंसकों की भीड़ भाड़ में से, आपने मुझे "नोटिस" किया?
चुनकर मेरा नाम अपनी ही उँगलियों से टाइप करके मुझे इतना "लिफ़्ट" दे दिया!
अपने आप को धन्य समझने के सिवा मेरी और क्या प्रतिक्रिया हो सकती है?

मेरे लिए यह "ऑटोग्राफ़" से भी ज्यादा मूल्य रखता है।
ऑटोग्राफ़ में तो आपका नाम लिखा होता है, यहाँ आपने इस नाचीज़ का नाम चुनकर अपने ही हाथों से लिख दिया और सारे संसार के सामने पेश कर दिया।
अब गर्व के साथ अपने परिवार वालों और दोस्तों के सामने डींग मार सकता हूँ।
भले ही वे किसी सेलेब्रिटि से परिचित हों, लेकिन यहाँ तो एक सेलेब्रिटी मेरे नाम से परिचित हैं।

हार्दिक धन्यवाद।

लिखते रहिए और हम पढ़ते रहेंगे।
और हाँ आपके फ़िल्म देखते रहेंगे।
"सत्या" को "ओरिजिनल डीवीडी" मंगवाकर देखी थी।
पुरानी फ़िल्म है और इसे थेयेटर में कैसे देखेंगे?
लेकिन आपका आग्रह मानते हुए, नयी फ़िल्मों को थियेटर में देखने की कोशिश करेंगे।
शुभकामनाएं।
गोपालकृष्ण विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु

महेंद्र मिश्रा said...

आपसे सहमत हूँ किसी भी व्यवसाय / कार्य को जूनून के साथ करना चाहिए . मेरी समझ से किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए मूड जूनून का होना भी नितांत आवश्यक है .पोस्ट सटीक लगी . अगली(कॉमेडी) मूवी की प्रतीक्षा रहेगी.बढ़िया पोस्ट . पढ़कर अच्छा लगा. धन्यवाद.

महेंद्र मिश्रा said...

आपको जन्माष्टमी की बधाई.

Sanjeet Tripathi said...

ह्म्म, बात सही है पर अफसोस यह कि "1971" को मैने भी पायरेटेड सीडी पर ही देखा था। यह फिल्म थिएटर में आई भी थी?
कम से कम छत्तीसगढ़ में तो कहीं नही।
फिर क्या करे दर्शक, अच्छी फिल्मों को देखे बिना ही रहे और अलानी फलानी फिल्म को जाकर देख आए थिएटर में।

anil yadav said...

मनोज जी आपकी फिल्म पिंजर सिनेमा हाल में ही देखी थी ....और यकीन मानिये उस किरदार में आप वास्तव में एक पाकिस्तानी मुस्लिम लग रहे थे ....और पूरी फिल्म के दौरान मुझे आपसे नफरत हो गयी थी ....और कई दिनों तक मैं आपसे नफरत करता रहा ....जब तक कि आपकी अगली फिल्म नही देखी....

Vijay Wadnere said...

"मनी है तो हनी है" - इसके बारे में तो कुछ कहना नहीं चाहुँगा सिवाय इसके कि यह भी बाकी बहुत सी फ़िल्मों की श्रेणी की एक साधारण सी टाईम-पास फ़िल्म थी। हाँ, एक बात (डायलाग) जो मेरी जबान पर चढ गई (गया) वह है -"टेन्शन नहीं है, माईंड एकदम क्लियर है"। :)

इसके अलावा तो कुछ खास नहीं लगा। लाला भाई आपको किस बाजार में मिल गये? ;)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

एक आम इन्सान का सेलिब्रिटी बन जाना तो देखा-पढ़ा था लेकिन एक सेलिब्रिटी को आम इन्सानों से आत्मीय संबंध बनाते यहीं देख रहा हूँ। यह बहुत अच्छा लग रहा है।...मनोज जी, यह प्रीत बनाये रखिएगा।

Tarun said...

Bara achha karte hain, tabhi achhi acting kar paate hain ab samajh aaya. Aacha laga ye prasang aapka.

waise agar aap hume abhi tak nahi jaane hain to hum aapko bata den मैं हूँ असली मनोज बाजपेयी

Devkant Pandey : said...

Manoj ji pranaam,
EE bataval ja ki agar kouno director se aapke dosti hokhe aa oo aap ke leke film banaval chahat ba t khali dosti ke khatir hi aap film k leb ki aur baatin par bhi dhyan deb? agar o director ke script theek na bhi hoi to bhi aap oo film dosti ke khatir kar leb ?
jabab jaroor dehal jaiee.

मीत said...

Manoj ji..
blog jagat mein akar apne bahut hi acha kiya..
hum se sidhe jud gaye..
apka manoj naam mujhe bahut bad mein jakar pata chala, nahin to hum aapko BHIKHU MHATRE ke hi nam se jante the...
bahut umda abhinay karte hain..
or blog pr likh bhi acha rahe hain...
der se tippani karne ke liye apse mafi ki umeed karta hoon..
blog pr likhte rahiye or humse jude rahiye..

sidheshwer said...

बहुत बढिया भाई!

अरूणा राय said...

मनोज जी, खुशी हुई आपको यहाँ देख के।

Vivek Kumar "विवेक" said...

manoj ji ..shool me us officer ke kirdar ko wakai aapne jivant kar diya tha .film dekhane ke bad hamare allahabad university ke dost waisa hi ofiicer banana chahte the kuch bane bhi...
achaa laga aapka blog padhkar..

Vivek Kumar "विवेक" said...

manoj ji ..shool me us officer ke kirdar ko wakai aapne jivant kar diya tha .film dekhane ke bad hamare allahabad university ke dost waisa hi ofiicer banana chahte the kuch bane bhi...
achaa laga aapka blog padhkar..

Yasir said...

Manoj ji
AAp itni kum filmein kyun karten hain?Kya wajah hai?Jaise kay kay manon aur Irfaan jaise acche kalakar filmon mai chote-chote roll hi karten hain lekin unke abhinay ki sarahna film ke hero se bhi jyada hoti hai.Aap to inse kahi behtar kalakar hain,aap aisa kyun nahi karte?Pinjar aur Shool jaise roll dobara kab dekhne ko milenge?

ashish said...

aap ek abhineta ke taur pe amar ho chuke hain, lekin aapke paschimi champaran main log mar rahe hain, kosi ka kahar jari hai bihar main , aap blog mein likhte hain ki aap bahut bhulne lagen hain , aapne bihar ko mat bhuliyega , tabhi log aapko yaad rakhenge

Pragati Mehta said...

bauht khub manoj bhai, are goli-bam bahute chalale biye ab tani hansiyo-majak hobe ke chahi.....thik ba.....hamniyon sab ke intezar ba..

dheeraj with impatience said...
This comment has been removed by the author.
अरुण कुमार वर्मा said...

Bahut khusi hui aap ko blog per paa kar. apne sahi kaha ki apne kaam ke liye junoon jaruree hai.

Rohit Tripathi said...

Vajpeyi ji fan hum bhi sach bahut bade hai aap ke, satya shool, aur ek jisme aap inspector bane the, aur aap ke sath raveena aur sanjay kapoor bhi the movie mein naam yaad nahi aa raha, lekin usme bhi aapne jabarjast abhinay kiya......

Dekhiye paise kamane wale bahut hai bollywood mein, kuch log to acting karte rahiye ;-)

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मेरी पहली कविता...... अधूरा प्रयास

I said...

Namaste,
Manoj ji,

"Koshish ek aisi cheez hai, jo har manushya ko apne-apne bewashay me junoon ke satth-saath karne rahne hoti hai,kyun ki eske alawa hume Aur kuch to aata bhi nahi"wah!!kya khub kahi aapne.AApki filme me mera favourite hai..Shool.Saya hi koi aur Actor ush kirdar ko etni achi tarah se nibha pata.

Manoj ji,Aap meri ek gujarish sweekar karenge....Main ek mimimc hun,anchoring ka Sauk rakhta hun,Sayari bhi likhta hun,Main kisi film ke liye gano ki lyrics likhana chahata hun,bhale uske liye mujhe paise na mileni madad karenge.

Sach kahun to Amitahb ji aur Aamir khan ji ke blog me maine ye baat likhi thi ..Unho ne abhi tak jawab nahi diya...sayad wo naraz hau humse..ya wo nazar andaz karna chahte hoon...Akhir hum hote kaun hain...

Aapka
Krish Kant,NEW DELHI

Mohan Thapa said...

yah sahi hai ki ek achchhe ACTOR ko har tarah ka ROL karna chaahiye par yah bhi jaroori nahi hai ki kisi bhi film me koi bhi rol, mein baat kar raha hoon aapki film "MONEY HAI TO HONEY HAI" ki, kya yah jaroori tha ki aap usme rol kare, mere khyal se usme aapke liye karne ko kuchh bhi nahi tha..... please BURA LAGE TO MAAF KARNA