Friday, September 5, 2008

बप्पा मोरया...

कल घर वापस जल्दी आया। शाम के छः बजे तक। लैपटॉप को गोद में रखकर पिछली ब्लॉग पोस्ट पर आयी प्रतिक्रियाओं को पढ़ा तो समझ आ गया कि बाढ़ के दृश्य देखकर सारे दोस्त और प्रशंसक भाव विह्लल हुए हैं। सारी प्रतिक्रियाएँ पढ़ी ही थीं कि बाहर ढोल-नगाड़े की आवाज़ सुनायी दी। इससे अहसास हुआ कि गणपति किसी-किसी घर में एक दिन पधारने के बाद विसर्जन के लिए जा रहे हैं।

दरअसल, ये ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजे साल के इस महीने में बड़ा सुख देते हैं। एक अजीब तरीक़े का हर्षोल्लास हवा में होता है। मुंबईवासियों में गणपतिदर्शन की होड़ होती है। इस बीच, फ़ोन आया कि इस बार दिल्ली में मेरी माँ ने भी तीन दिन के गणपति बैठाने की ठानी है। मेरी माँ का कुछ ऐसा ही रहा है। वो मन्नत मांगती रहती हैं और उसी बहाने भक्तिभाव में डूबी रहती हैं। मुझे फ़ोन करके गणपति को लाने, रखने और उसकी बारीक पूजा-क्रिया की विधि बारे में भी पूछ रहीं थीं। गणपति को लाना और विसर्जन करना महाराष्ट्र की संस्कृति से जुड़ा हुआ है, जिससे वो पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं।

वैसे, पूजा का विधि-विधान ज़्यादा मुझे भी नहीं मालूम। मैं तो अगरबत्ती लगाकर सामान्य पूजा करने में यक़ीन करता हूँ। ख़ैर, कहीं-न-कहीं ये सारे पर्व आदमी को आदमी से जोड़ते हैं, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। कभी-कभी सोच कर हैरानी होती है कि इस महीने के बाद सिर्फ़ पर्व और उत्सव का ही वक़्त शुरु होता है, जो साल के अंत तक चलता है। फिर वो किसी भी धर्म का क्यों न हों। चाहे वो गणपति हो, रमज़ान, दीवाली, छठ, दशहरा हो या फिर क्रिसमस क्यों न हों।

ऐसा लगता है कि सारे धर्म एक साथ ईश्वर को याद करते हुए साल की विदाई करते हैं। सभी पर्व में भगवान से दुआ करते हैं। मैं भी दुआ करुंगा गणपति से कि बिहार में बाढ़ से उपजी समस्या से लोगों को जल्द छुटकारा मिले।
ईश्वर उन्हें संकट से उबरने की शक्ति दे। उन्हें सुख समृद्धि मिले। देश में शांति का वातावरण बने और धर्म के नाम पर लड़ाई न हो। हम सभी भाईचारे की डोर में बंधे रहें।

इसी के साथ बोलिए गणपति बप्पा मोरया...

आपका और सिर्फ़ आपका
मनोज बाजपेयी

18 comments:

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव said...

सही लिखा है आपने। सारे पर्व आदमी को आदमी से जोड़ते हैं

महामंत्री-तस्लीम said...

सही कहा आपने "कहीं न कहीं ये सारे पर्व आदमी को आदमी से जोड़ते हैं"।
आपको गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

संगीता पुरी said...

गणपति बप्पा मोरया...

जितेन्द़ भगत said...

चलि‍ए, नगाड़ा बजाकर वि‍सर्जन में शामि‍ल हो लेते हैं।

ravindra vyas said...

मनोजभाई, आपका ब्लॉग देखा, सारी पोस्ट पढ़ीं और उस पर कुछ लिखा है। जो लिखा, वह हिंदी के सबसे बड़े और सम्मानीय पोर्टल वेबदुनिया के मेरे द्वारा लिखे जा रहे साप्ताहिक कॉलम ब्लॉग चर्चा में है। जब भी फुरसत मिले इस पर एक नजर मारिएगा। मैं उसकी लिंक दे रहा हूं।
http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0809/04/1080904060_1.htm

अनेक शुभकामनाएं।

Tinku said...

aapne sahi kahan..per kya aapko aisa nahi lagta ki jo paisa mila bihar

Advocate Rashmi saurana said...

bhut badhiya. jari rhe.

Advocate Rashmi saurana said...

apke blog par aai to ek saval mere maan me aaya. isliye aapse puchh rhi hun. please bura mat maniyega. me ye kaise maan li ki aap hi manoj vajpayi hai. ye bhi to ho sakta hai ki aap koi or ho. mera matlab meri favourite actress madhuri hai to me unke naam se blog banakar kaam kar sakti hun. kisi ko kya pata chalega. please solve my problem.

राजीव तनेजा said...

आपने सही कहा कि ये त्योहार हमें आपस में जोड़ते हैँ।अच्छा लगा जान कर कि आपकी माता जी इस बार गणपति जी की पूजा कर रही हैँ।मैँने गणपति पूजा से लेकर उनके विसर्जन को अभी तक सिर्फ फिल्मों में ही देखा हैलेकिन इस रुबरू देखने की तमन्ना ज़रूर है।
देखें...कब मौका मिलता है?....
एक आखरी बात और कहना चाहूँगा कि आप अगर हो सके तो रश्मि सुराना जी की शंका का निवारण ज़रूर करें.. :-)

राजीव तनेजा said...

वकील होने के नाते तर्क और वितर्क से उनका गहरा नाता जो ठहरा

Udan Tashtari said...

गणपति बप्पा मोरया...

MAA said...

गणपति बप्पा मोरया...
Bhaiya
Bihar kab aa rhe hain aplog.

G Vishwanath said...

रश्मि सुराना का सन्देह हमें भी हुआ था।
लेकिन आज सोचता हूँ अगर यह सचमुच मनोज बाजपेयी का ब्लॉग नहीं है तो भी कम से कम मुझे कोई फ़र्क नहीं पढ़ता।
हम औरों के ब्लॉग भी पढ़ते हैं जो फ़िल्म सेलेब्रिटी नहीं हैं।

वैसे इस सन्देह को मिटाने के लिए आपको किसी टीवी चैनल पर आकर यह ऐलान करना होगा की manojbajpayee.itzmyblog.com आप ही का ब्लॉग है।

लेकिन इससे क्या रश्मिजीकी का सन्देह मिट सकता है?
आखिर अड्वोकेट हैं। इतनी जलदी नहीं मानेंगी।
आपको यकीन दिलाना होगा कि टीवी पर आप ही हैं और आपका कोई डूप्लिकेट नहीं! ऐसा किजिए । आप रश्मिजी को अपने घर आमंत्रित करके उनकी आँखो के सामने एक छोटा सा पोस्ट रचकर upload कर दीजिए।
इससे रश्मिजी का सन्देह तो मिट जाएगा और इस बहाने आपके एक प्रशंसक को आपसे भेंट करने का सौभाग्य भी प्राप्त हो जाएगा। अगर रश्मिजी को कोर्ट कचहरी से फ़ुर्सत नहीं मिलती तो हमें याद कीजिए। हमारे पास आजकल फ़ुरसत ही फ़ुरसत है।

लिखते रहिए।
शुभकामनाएं
गोपालकृष्ण विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंग्ळूरु

ढिंढोरा said...

मनोज जी ,

नमस्कार

रवा त भोजपुरिये इलाका के बानी आ पूरा इलाका ही बाढ़ के कहर झेल रहल बा .छोटी मुंह बड़ी बात,पर बड़ा ही साफ -साफ । हमनी के बाढ़ पीड़ित खातिर भिखारी ठाकुर के नाटक "बिदेसिया' करत बानी जा .हमनी के यवनिका ,संस्था जे जुडल बानी जा । हमनी के अधिकतम सदस्य दिल्ली मीडिया से जाल बानी जा । अगर राऊर उपस्थिति होखे त ईशारा करीं या फ़िर अनुमति दीहीं। हमनी के आरा ,बिहार के रहे वाला हईं जा .ओइसे हमार मामा बेतिया के बानी जे रांची हाई कोर्ट के जस्टिस हईं ।

विनती बा ई पुण्य कार्य में अगर शिरकत करब त हमनी के आपण लक्ष्य के काफी करीब रहब जा.रवा आपन समय दीहीं ,ओही अनुसार हमनी के तारीख रखब जा। हमनियो के छुट्टी लेवे के पड़ी

बड़ा ही उम्मीद के साथ----।

ग़ुस्ताख़ said...

मनोज जी, कुछ लोगों को यह संदेह है कि ये ब्लॉग आपका नहीं है। लेकिन एक पत्रकार होने की वजह से मुझे यकीन है कि फिल्मी सितारे भी इंसान ही होते हैं। सारे न भी होते हों लेकिन कम से कम आशुतोष राणा, राजपाल यादव, ऱगुवीर और मनोज जैसे लोग तो इंसान ही हैं अभी भी। क्योंकि इनकी जड़े माटी में गहरी धंसी हैं। वैसे तो बिहारी होने के नाते और एक ब्लॉगर होने के नाते मैं आपसे नज़दीकी महसूस करती हूं लेकिन सिर्फ इसी वजह से आपकी तारीफ नहीं कर रहा हूं। आपका ब्लॉग पढ़ना मुझे अच्छा लगता है बस इसी लिए इतनी बातें कह रहा हूं।

मंजीत

aprampara said...

मनोज जी,
कल स्टार न्यूज़ पर बाढ़ पीडितों के सहायतार्थ मदद के लिए मुंबई में चंदा करते देखा .आप ,शेखर जी ,अली khan जी आदि लोग आपके साथ थे .......काफी खुशी हुई ...मन आह्लादित हो गया की आप मुंबई में रहते हुए भी उनके लिए दर्द है और कुछ कर रहे वहां रहकर............मेरी कंपनी(shree सीमेंट ) ने भी 21 लाख का मदद बिहार के बाढ़ पीडितों के लिए किया है हम कर्मचारी भी आपस में चंदा करके पैसा ,कपड़ा भेज रहे है ....................इसी उम्मीद के साथ की उनलोगों तक कुछ भला हो .....

राकेश पाठक
बेआवर,अजमेर

त्रिभुवन said...

एक आम आदमी को पह्चानने और उसका सम्मान करने वाले बेहतरीन अभिनेता और इंसान को मेरा सलाम.....
आप इतने व्यस्त कार्यक्रम के बाद भी अपने विचारों
को प्रस्तुत करतें हैं ये कैसे आप संभव कर पातें हैं।

मै त्रिभुवन मिश्रा…………एक विद्यार्थी इलाहाबाद से जो
कि दिल से भारतीय है और बिहार के दुख मे अपनी
संवेदना प्रकट करता हूं

विजय प्रभाकर कांबले said...

मनोज जी
आपका ब्लॉग हिंदी पढकर बहुत अच्छा लगा। हिंदी दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ। लिखते रहिए।