Sunday, September 14, 2008

फिर आई गांव की याद

विश्वास कीजिए श्री वर्मा के बारे में मैंने कोई भड़ास नहीं निकाली है। ये सिर्फ उनके ब्लॉग पर लिखी कुछ गलत जानकारियों का उत्तर था। ये जारी रहेगा, अगर कोई मेरे व्यक्तित्व के बारे में गलत बात लिखेगा या कहेगा। एक प्रजातांत्रिक देश में किसी को कुछ कहने का अधिकार है, तो दूसरे को उसका उत्तर देने का अधिकार भी होना चाहिए। खैर जो बीत गई सो बात गई।

मैं लोनावला में अपने निर्माता निर्देशक दोस्त संजय गुप्ता के घर आया हूं। यहां पर मेरी पत्नी शबाना रजा और आने वाली फिल्म के निर्देशक-दोस्त राजीव वीरानी भी मेरे साथ हैं। बाहर बारिश हो रही है। हम कुछ देर पहले ही यहां पहुंचे हैं। राजीव वीरानी की फिल्म की पटकथा के ऊपर भी यहां बहुत सारी बातचीत हुई।

मुंबई से 200 किलोमीटर दूर, समुद्र तल से 4000 फीट की ऊंचाई पर मुंबई कुछ अंजाना सा लगना शुरु हो जाता है। आचानक गांव की भी याद आ जाती है। और मनोज बाजपेयी के दो टुकड़े हो जाते हैं। एक टुकडा कहता है कि मुंबई में रहो तो दूसरा कहता है कि गांव चलो।
शांत, हरी-भरी वादियों और पहाड़ों का ये जादू ही अलग है। ये आपको इस हद तक सम्मोहित करता है कि आपके अंदर तक एक द्वंद छिड़ जाता है। आपका एक हिस्सा उन सारी चीजों को त्यागने के लिए मजबूर करता महसूस होता है, जिसके लिए आपने पूरा जीवन लगा दिया। मैं अभिनय की बात कर रहा हूं। और अभिनय करने के लिए बड़े शहर में रहने की बात कर रहा हूं।

वैसे,यहां आने से पहले शुक्रवार को एक कार्यक्रम में गया था। ये रामायण एनिमेशन फिल्म के लांच के मौके पर आयोजित था। मैंने इसमें श्रीराम जी के चरित्र को आवाज दी है। जूही चावला ने सीता और आशुतोष राणा ने रावण के चरित्र को अपनी-अपनी आवाजें दी हैं। मेरा मानना है कि यह रामायण एनिमेशन फिल्मों में एक नए दौर की शुरुआत करेगा। आजकल एनिमेशन फिल्मों में एक अलग तरह की क्रांति आ रही है। तकनीकी तौर पर हम पश्चिमी फिल्मों की दुनिया के बराबर में खड़े हैं। एनिमेशन फिल्म बनाने वालों की कमी जरुर है,लेकिन आने वाले साल में इस कमी का अहसास भी नहीं होगा।

गांव की याद और रामायण का कार्यक्रम की घटनाओं ने बचपन की याद भी दिला दी। मेरे गांव के घर के मंदिर में रोज सुबह दादा जी का रामायण का पाठ और उनसे रामायण की घटनाओं के बारे में सुनना याद आ गया। सच में अपने जगह की बात ही अलग है। सही कहा गया है कि तुम व्यक्ति को गांव से निकाल सकते हो पर गांव को व्यक्ति के अंदर से नहीं।

इसी के साथ

आपका और आपका
मनोज बाजपेयी

18 comments:

Suresh Chandra Gupta said...

अच्छा लगा कि गाँव अभी भी आपके अन्दर है. पर यह कभी-कभी जोर मारता है या अक्सर?

बैसे आपने कमेन्ट मोडरेशन क्यों लगा रखा रखा है? इस से कमेन्ट देने वालों को असुविधा होती है.

विवेक सिंह said...

आपने मुझे भी गांव की याद दिलादी . जान कर अच्छा लगा . आप जैसे लोगों को भी गांव की याद आती है .

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह मनोज जी आप तो कलाकार तो हो ही आज से एक लेखक की छवि भी आपमें स्‍पष्‍ट नजर आ रही है अच्‍छा लिखते हो god bless you

NITISH said...

bajpayeejee mai aapki abhinay kalaa ka deewan hu......shool file me aapki acting itni pyari lagee ki us file me interval le bad waale hisse me jo sapath aapne police wardi me lee hai us lines ko maine apne study room me lagaa rakhaa hai abhi tak........

mai ek samanya engineering student hu jo is samay agra ke ek college me hu.
kal dainik jagran par ek news dekhi to jo ek chhote se bachhe ke baare me thi jo ki bahut hi sankat se gujar rahaa hai. to mujhe lagaa ki is news ko jahaa tak mai faila saktaa hu mujhe failana chaahiye taaaki ek garib ka bhalaa ho sake aur wo bhi apne ek loute bachhe ki jaan bachaa sake...

agar aap in jaise logo ki madad karnge jo aapke hi desh diniya ke hai ...jo unhi gaonwo me baste hai jahaa se aapn jude hai jinki aapko yaadf aati hai....to yah ek bahut badi manvataa hogee aur apne gaon aur sahar ke liye sachhe dile se kiya gayaa pyar.....

link ye hai....
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4816788/

मिथिलेश श्रीवास्तव said...

सही कह रहे हैं मनोज भइया, अपना गांव तो अपना होता है..हम दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं याद तो आएगी ही !

Dr.Tripathi S M said...

bhaiya,pranam
hum log mitti se jude log hain is liye gauon ki yaad aani swabhavik hai.aur ye aur bhi accha hota ki hindi filmo main bhi gauon ko phir jinda kiya jata.jaise purani filme shole,tisri kasam,mera gaun mera desh etc.aap shool ki tarah hi gauon ke rajniti per koi film kare.jai brahman

GIRISH BILLORE MUKUL said...

manoj bhai
bihar kee ghatanaa ne dil hilaa diyaa
app ne varmaa jee ko sahee or sateek jabaav diya
thanks

दिनेशराय द्विवेदी said...

सही कहा, गांव और बचपन इन दोनों को व्यक्ति के अंदर से नहीं निकाला जा सकता। जिस दिन ये निकल जाते हैं। शरीर में से आत्मा निकल जाती है और शरीर शव हो जाता है।

संदीप पाण्डेय said...

मनोज जी आपकी पीडा समझ में आती है पता नही क्यों दिल हमेश कहता रहा है की आप औरों जैसे नही हैं बिहार बाढ़ और रामू पर आप की पोस्ट पढ़ कर उस धारणा की पुष्टि ही हुई. बॉलीवुड के रंग में रंगा कोई (शातिर ) इंसान ऐसा कर ही नही सकता. रामू पर पोस्ट की आलोचना कराने वालों को भी यह समझना चाहिए.
आपको एक शेर नज्र है - औरों जैसे होकर भी हम बाइज्जत हैं बस्ती में
कुछ लोगों का सीधापन है कुछ अपनी ऐय्यारी भी

vijendra sharma said...

आदाब,
मनोज जी.....
आपके ब्लॉग कि जानकारी मुझे delhi के इक कार्यक्रम में मिली ..बहुत ख़ुशी हुई कि आपने हिन्दी ..में इसे शुरू किया .....बाकी अभिनेताओं कि तरहा नहीं ....जो रोटी तो हिन्दी फिल्मों कि खा रहे है मगर जुबां फिरंगी इस्तेमाल करते है ...
मैं BSF में अधिकारी हूं ....आपकी शूल देखने के बाद अपने अधीनस्थ के साथ काम करने का मेरा नजरिया बिल्कुल बदल गया ..आपका इक संवाद था कि ...sir मैं आपके अंडर में नहीं आपके साथ काम करता हूं ....वाह ..क्या कहने .....आपने गाँव का ज़िक्र किया तो हुजुर ..गाँव तो गाँव ही है..

राहत इंदोरी साहेब का इक मतला है ......
शहरों में तो बारूदों का मोसम है
गाँव चले आओ अमरूदों का मोसम है
regards ..
विजेंद्र शर्मा

MAA said...

जय माता दी,
ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया देखकर बहुत अच्छा लगा .भगवान आपकी और ऊँचा मुकाम दें.

Ankit said...

Manoj ji,
I am Also from Bettiah, West Champaran Bihar. Now I live in Indore. I run a blog named as Pratham at http://hi.pratham.net...
it was all about me.
But talk about your post.
Really I also feel like that. It has two year passed and I never Seen my lovely Home.
I remember it Daily. It is very hard to Forget it.
But carrear is also important.So Let live Like That.

राजीव तनेजा said...

आपने साबित कर दिया कि आप एक उम्दा अभिनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे लेखक भी हैँ।ये आपकी पिछली पोस्टों से भी लगा था और आज की पोस्ट से भी।....
"तालियाँ".....

santoshsahi said...

please give my blog link on your blog my blog name Khalihansahisantosh.blogspot.com

I Think said...

Hi Manoj Jee,

I was wondering if you are open to doing Maithilli Films. I am from Bihar, currently living in Toronto. I would like to come back to India to do a Maithilli Film. I am in the process of completing the script. It is going to be a comedy, but not like any bhojpuri films that you probably are thinking of. It is a pure maithilli film, based in a village in Bihar with the treatment being completely pure, like Teesri Kasam for lack of a better expression. Real people, real situations, extremely funny Outcomes( Not Slap Stick at all). The Characters decide how the film moves forward by reacting to different situations in their own way. The characteriztion is complete, with every minute detail attended to, like how they walk, their mannerisms & most importantly accomplished actors like yourself will convey their thought process with your acting skills. Like even when someone is just sitting down in front of a Ghoor( I hope you know what that means) doing nothing in particular, thinking of nothing in particular, the audience should be able to tell whats going through his/her mind, just by looking at his face, like you are able to when you sit with your wife or close friends & family. I am not sure if it is challenging enough for you, but it will definitely be an elation for me, if you are able to contribute to this film by way of your creative inputs & especially through your presence in the film. Atleast please say yes/no to me. My contact info is 001-647-287-8716 or ajiteshpathak@yahoo.com or even by way of your blog. I will check it regularly.

Thanks Manoj jee,

Please keep up your brilliant work by doing more films like Pinjar. I especially liked your role in Veer Zara, where you were the only manly presence in the film. The 10 minutes that you were on screen lighted the whole screen & Left me longing for more of you in the film.

Ajitesh Pathak

Rohit Tripathi said...

bahut achi baa kahi manoj ji.. sach kabhi kabhi gaon bahut yaad aata hai

New Post :
I don’t want to love you… but I do....

SATYENDRASHALABH said...

manoj jee aapke blog ko dekhkar mujhe apnee ek kavita yad aa gayi. "pakki sadak achanak kachchi hokar boli, gaon a gaya. pyaara pyaara gaon aa gaya, pranon pyaara gaon aa gaya. chuye hue mahue ko choome purwa doli, gaon aa gaya.pyaara pyaara gaon aa gaya, pranon pyaara gaon aa gaya.
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bail nahin hain, bas khoonte hain,
rabba, larhia sab toote hain,
galgal, ghanta aur musikka,
kharia bedi sab foote hain.
bachee rahi aakhiree nishaani
gayab ho ligaon aa gaya.pyaara pyaara gaon aa gaya, pranon pyaara gaon aa gaya.

Rahul Priyadarshi 'MISHRA' said...

मैं शायद बहुत देर से पहुंचा आपके ब्लॉग पर
पर वाकई,ऐसा नही लगता की कोई बड़ा नाम है इसके पीछे (बिना किसी तामझाम के,या प्रभावित करने के लिए कठिन शब्दों का प्रयोग न होने से)
आपकी बातो से मुझे यकीन है की आपके अन्दर का इंसान न तो मर चुका है,और न kabhi मर सकता है.
बहुत ख़ुशी हुयी.
जिसना नाम उससे बड़ा हो जाए वो तो अपनी पहचान ही खो देता है.
वो इंसान सबसे बड़ा होता है जिसका व्यक्तित्व किसी नाम में नही खोता.
मैं आपको सलाह नही दे सकता,पर सीख ले सकता हूँ .
धन्यवाद.