Thursday, September 25, 2008

आराम का आनंद ले रहा हूं मैं

पिछली कुछ पोस्ट पर भेजी आप लोगों की प्रतिक्रियाएं पढ़ीं। आश्चर्य इस बात का है बहुत सारे लोग आज भी धर्म की वजह से एक दूसरे से घृणा भी करते हैं। कोफ्त इसलिए नहीं होती क्योंकि अपनी बात कहने का सभी को अधिकार है। हां,मैंने पिछली पोस्ट या अभी तक ब्लॉग में जो भी लिखा है,वो मेरे विचार हैं। दूसरो का इससे सहमत होना या न होना, आवश्यक नहीं है।

खैर, इन दिनों मैं कुछ खाली हूं क्योंकि बारिश की वजह से फिल्मों की शूटिंग कैंसिल हो गई हैं। एक शूटिंग के सिलसिले में हैदराबाद जाना था,लेकिन वहां भी यूनियन की हड़ताल के चलते शूटिंग रद्द हो गई। वैसे अच्छा है,घर भी जितना ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिल जाए, उतना अच्छा है।

वैसे भी मैं थोड़ा आलसी प्रवृत्ति का व्यक्ति हूं। काम कम करना मेरी फितरत रही है। इस बीच,कुछ मीटिंग्स कीं। बहुत स्क्रिप्ट भी पढ़ीं। लेकिन, मज़ा नहीं आया। एक साहब की स्क्रिप्ट अच्छी लगी तो उनके पास प्रोड्यूसर नहीं है। और अब वो एक निर्माता खोजने निकले हैं।

जिन निर्माताओं की फिल्म की शूटिंग रद्द हुई है, समझ नहीं आ रहा कि उनकी डेट से तालमेल कैसे बैठाऊं। इसी ऊहापोह में समय गुजर रहा है। दिल्ली जाने की इच्छा हो रही है,लेकिन लगता है कि यहां जो काम हैं, उन्हें निपटा लिया जाए। बस, उन्हीं कामों को पूरा करने में लगा हूं और सामान सूटकेस से वापस निकालकर अलमारी में ऱखता जा रहा हूं।

अभी, सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि दिल्ली में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में हुए शहीद हुए इंस्पेक्टर स्वर्गीय मोहन चंद शर्मा को मेरी तरफ से श्रद्धांजलि। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को इस कठिन समय में शक्ति दे।

इसी के साथ,
आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

11 comments:

संवेदनाऍं said...

मनोज जी,

यह एक अच्‍छा काम कि‍या आपने कि‍ अपना ब्‍लॉग बना डाला और उस पर लगातार लि‍खते आ रहे हैं, इससे यह बात हम आपके चाहने वालों के साथ अच्‍छी हुई कि‍ आपसे रूबरू होने का मौका मि‍ला। बारि‍श को भी धन्‍यवाद, जि‍सने आपको वक्‍त नि‍कालने का मौका दि‍या। आप आलसी हैं,लेकि‍न रजतपट के लि‍ए बहुत अच्‍छा काम कर रहे हैं। आपकी कला और कलाकार, आपकी अदायगी में अलग ही शास्‍त्रि‍यता झलकती है। साधुवाद स्‍वीकार करें। बहुत-बहुत धन्‍यवाद ........

Deepak Bhanre said...

मनोज जी अच्छा है .
आप बारिश का मजा आराम से लें .
आगे के लिए शुभकामनाएं .

डॉ .अनुराग said...

आराम फरमा रहे है ,किस्मत वाले है......चलिये अपनी एनर्जी को regain कीजिये

अमिताभ बुधौलिया 'फरोग' said...

fursat mili to fursat se aapka blog padha

prabodh said...

मनोज जी ,
आपके ब्लॉग से आपके बिचारो से अवगत होने का मौका मिला

Chandra said...

Bhaiji Namaskar,
Aaapke Vicharon ko padhkar Achcha laga.Its good to see that people like you a finding solace in Blog. This is the perfect way of interactioin directly with the people. Thats the reason the Big wigs are to blogging now.
Where BigB's blog is a sort of a daily diary, RamGopal is busy giving the details of his Chori. Yours is more of social message, what I see, though all of them condemned the Bomb Blast.. You seem to be more assertive in your view ..
Looking forward for more of your views on social development and brotherhood.
Regards
Chandra

PD said...

लगे रहो मनोज भाई..
आराम किजिये, फिर तो काम लगा ही रहेगा.. अगर समय है तो दिल्ली के अपने दोस्तों से भी मिल ही आईये..

Anil Pusadkar said...

तक़दीर वाले हो भैय्या जो आराम करने मिल रहा है। आणंद लिजिये आराम का।किस-किस को याद किजिये,किस-किस को रोइये,आराम बडी चीज़ है मुह ढांक कर सोइये।

राजीव तनेजा said...

बारिश को धन्यवाद करें क्योंकि जीवन की भागमभाग में आराम भी ज़रूरी है।अब चाहे ये इच्छा से मिले ...चाहे अनिच्छा से मिले।

Yayavar said...

मनोज जी नमस्कार,
कभी खाले रहने का मौका बहुत अच्छा होता है आत्म चिंतन का समय मिलता है,जो हम अपने काम के वजह से निकल नहीं पाते.
उम्मीद है आप अपने रचनाताक्मता बेह्तरीन कर के हमारे सामने होंगे.

Bharat said...

प्रिय , मनोज भाई सादर प्रणाम


मैं आपके लाखों प्रसंस्कों मैं से एक छोटा सा प्रसंसक हूँ . मेरी काफ़ी समय से इच्छा थी की आपसे अपने जीवन की एक घटना को साँझा कर सकूं । इस ब्लॉग के माद्ध्यम से मुझे आपसे संपर्क करने का सोभाग्य प्राप्त हो रहा है आज .आशा है आप इस पर गौर करेंगे ।
घटना यह है की लगभग १९९६ के आसपास मुझे मेरी एक महिला मित्र ने मुझे कहा की आपकी सूरत "स्वाभिमान" के सुनील से मिलती हैं मैंने कभी वह नाटक नहीं देखा था इसलिए मुझे लगा की शायद मेरा मजाक उड़ा रही है होगा कोई मकरंद देसपांडे जैसा सो मैंने नहीं देखा फ़िर मेरी नौकरी लग गई और जब मैंने अपनी छोटी दाड़ी रखी तो मुझे दोस्त कहने लगे "वीकू मात्रे " और मुंबई का किंग कौन ? वीकू मात्रे . और भाई आज किसकी गेम बजानी है ,गोली मार भेजे मैं ।

सच बताऊँ भाई मैंने बहुत दुखी हो गया था, इस किरदार से ।एक बार तो रोने भी लग गया था । अबतक मैंने देखा जो नहीं था इस अभिनेता को फ़िर एक दिन मैं एक म्यूजिक स्टोर पर गया तो हैरान रह गया की मेरी शक्ल ? पोस्टर मैं? फ़िर दूकानदार से पूछा की ये कौन सा अभिनेता है तो वो बोला सत्य नहीं देखि क्या ? ये मनोज वाजपेयी हैं उस फ़िल्म मैं वीकू मात्रे का रोल था मैंने पूछा की नाटक मैं भी काम किया क्या ? तो वो बोला हाँ स्वाभिमान मैं बा स फ़िर मैंने सबसे पहले आपकी "सत्या" देखि और जानते हो मनोज भाई फ़िर क्या हुआ फ़िर वो लोग रोने लग गए जो मुझे आपके डायलोग बोलते थे क्योंकि मुझे पता चल गया की आपकी तो बहुत डिमांड है और आजतक मुझे ये सुनने मैं मजा आता है की मेरी शक्ल आपसे मिलती है
बस यही बताने की इच्छा थी आपको और शायद आज आपके पढने के साथ
आपके लिए लम्बी उम्र की दुआ के साथ समाप्ति की आज्ञा चाहता हूँ धन्यवाद भाई
आपका छोटा भाई भरत राम ममगाईं