Saturday, September 27, 2008

अब तो डर लगता है..

कई साल पहले की बात है। मैं पांचवी क्लास में पढ़ता था। अपनी गर्मियों की छुट्टियों में स्कूल के एक टूर पर निकला था - कश्मीर की तरफ़। रास्ते में हम दिल्ली में भी रुके थे। लाल क़िला, क़ुतुब मीनार वगैरह तमाम दिलचस्प जगह हमें दिखायी गईं। क़ुतुब मीनार के नीचे खड़े होकर अलग-अलग दिशा से, अलग-अलग एंगल से फ़ोटो खिंचवाए हमनें। शायद वो फ़ोटोग्राफ आज भी कहीं किसी कोने में रखे होंगे। उस समय ये अंदाज़ भी नहीं था कि इसी के पास कोई बहुत ही शैतानी दिमाग़ एक बम का धमाका करेगा और बिना किसी कारण एक बच्चे की जान ले लेगा। इसी धमाके में कुछ लोगों को जख़्मी कर देगा। अब तो डर लग रहा है। हर उस शख़्स के लिए डर लग रहा है, जो बाज़ार घूमने जाता है। जो स्कूल पढ़ने जाता है। जो सिनेमा देखने जाता है। जो मेला घूमने जाता है। जो भी व्यक्ति भीड़-भाड़ वाले इलाक़े में तफ़रीह करने या ज़रुरी सामान लेने जाता है।

आज हमें भी अपनी जान का ख़तरा लग रहा है। ऐसा लग रहा है कि शायद मौत अचानक किसी बीमारी से न आकर किसी बम के धमाके के बीच होगी। क्यों मर रहे हैं लोग? क्या कसूर है इनका? जो मार रहे हैं उनके पास कारण क्या है? बहुत समझने की कोशिश की मारने वाले के कारण के बारे में समझने की। लेकिन, मेरी समझ से तो यह परे है। किसी को क्या अधिकार है कि वो मासूमों पर बम फेंकना शुरु करे? आज ज़रुरत इस बात की है कि हम अपनी जान बचाने के लिए सजग रहें। ज़रुरत इस बात की है कि हम जहाँ भी रहें उसकी रखवाली खुद करें। आज आवश्यक हो गया है कि हम सब ही मिलकर इस जंग को लड़ें। क्योंकि लगता तो नहीं है कि कोई और हमारी लड़ाई लड़ने वाला है।

मेरी श्रद्धांजली उस मासूम के लिए और उन सभी के लिए, जिनकी जान महरौली के धमाके में गई। संवेदना उन सभी लोगों के साथ है, जो हताहत हुए हैं।

इस दुःखद हादसे के बाद अचानक लिखने का मन हो बैठा। हाँ, अंत में अपने दोस्त इमदाद को कहना चाहूंगा कि भई उम्र हो गई है, बच्चों की तरह रुठा न करें। और रुठ ही गए हो तो क्षमा चाहूंगा। बहुत साल पहले की बात है। बहुत सारी बातें अब जल्दी याद नहीं आती हैं। आप जहाँ हैं ख़ुश रहें। ऊपर वाले का आशीर्वाद आप पर और आपके परिवार पर बना रहे।

आपका और आपका
मनोज बाजपेयी

16 comments:

Vivek Satya Mitram said...

अच्छा लगा..गलत के खिलाफ बोलने में आपने बहुत देरी नहीं की...इसलिए भी ऐसा लग रहा है क्योंकि मुझे समझ में नहीं आता कि ग्लैमर की दुनिया वालों के पास आम आदमी के लिए वक्त कैसे निकल आता है..खैर, आपको ढ़ेर सारा साधुवाद...।

dr. ashok priyaranjan said...

manojji,
bahut achcha aur hirdaisparshi likha hai aapney. aatankvad sey nipatney aur apni suraksha key liye janta ko hi aage aana hoga.

http://www.ashokvichar.blogspot.com

Alag saa said...

पन्द्रह दिनों के अंदर देश की राजधानी में फिर एक धमाका, पुलिस और सरकार के मुंह पर तमाचा। फिर वही शिकंजा कसने की बातें, फिर किस की हरकत इस पर बहस। फिर वही कुछ नाम सामने आएंगे, जिन पर कभी भी कोई कार्यवाही नहीं की जा सकी।
मनोजजी, लगता नहीं कितने बेबस हो गये हैं हम

रौशन said...

लखनऊ पुस्तक मेले में जाकिर अली रजनीश जी ने आपके ब्लॉग की चर्चा की थी तो हमने सोचा था कि देखते हैं मनोज जी क्या लिखते हैं .
आपने डर कि बात की है एपी समाज के रोल मॉडल हैं आपको सामाजिक मंचों पर भी अपनी बात रखनी चाहिए.
समझदारी और विश्वास की बहाली में एपी योगदान दे सकते हैं कोशिश कीजियेगा

sachin said...

manoj ji,chakachaunndh dunia me rahne ke bavjood aapne samvedna prakat ki aapko dhanyavaad.boolywood ke kai kalakar apne hi banaye hue rangmahal me jeena pasand karte hai.desh me arajkta ki sthithi hai.ab aap apni kismat se jinda hai.yaksha ke ek prasna ko nahi bhulna chahiye mritu atal hai.lekin aap jaise logo se ummed karta hu aap lokpriya ho aapke pass prasansko ki jamat hai desh hit me kuch kare,sayad tinke jaisa prayas bhi pahad ka roop le lele.

राजीव तनेजा said...

उफ!...एक और धमाका...धमाके पे धमाका....
कायराना ढंग से अपनी बात कहने का ये?...ऐसा?...घिनौना और छिछोला अन्दाज़ निकाला है उन्होंने?
लेकिन आप नाहक परेशान ना हों।...
दिल्ली पुलिस बड़ी मुस्तैद है।उसने मिनटॉं में ही बैरिकेट्स लगा पूरी दिल्ली को सील कर देना है...
उसके बाद गरीब-गुरबा के झोले-बिस्तर खंगालने का उपक्रम.....
आने-जाने वालों की जेबतलाशी....

अब इसमें क्या दिक्कत है?...हमें.. आपको...सबको...

उनके घर में भी बाल-बच्चे हैँ...इस नात्ते थोड़ा-बहुत हक भी तो बनता है ना उनका?...

अब खैनी-तम्बाकू और बीड़ी का त्याग कर काम में जुटेंगे और इत्ती ढेर सारी मेहनत करेंगे तो कुछ ना कुछ तो कमाएंगे ही ना?
.......
खैर!..आज ज़रूरत है कि हम..आप...हर नागरिक सचेत रहे

Anil Pusadkar said...

सही कहा आपने अब तो बीमारियों से ज्यादा खतरा बम से हो गया है।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

यह सब हमले जो कर रहे हैं, वे मानवता के दुश्मन हैं लेकिन उन्हें मुगालता ये है कि वे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं... ‘जेहाद’ कर रहे हैं।

हैरत ये है कि इस्लाम धर्म के जानकार और मुस्लिम समाज के बड़े नेता इसपर मुखर आलोचना करने से कतरा रहे हैं। क्या हो गया है उन्हें, यह समझ नहीं आता। क्या वे भी भयाक्रांत हैं?

हमने इन कथित जेहादियों को लानत भेजने वाली कोई इस्लामी अपील नहीं देखी। कहीं हो तो मुझे जरूर बताऎं। मन को तसल्ली मिलेगी।

रंजन said...

सही कहा मनोज जी..

अब तो बाजार जाते हुये भी डर लगता है.. पता नहीं कब कंहा.. जब तक आपसी सोहाद्र बहाल नहीं हो जाता और हम समाज कंटको की पहचान नहीं करते तब तक एसे ही जीना होगा..

और ये काम हर एक को करना होगा..

AAWAAZ said...

मनोज जी आपने सही कहा कि अब तो डर लगता है...दरअसल अब लोगों की नियती ही बन गई है कि वे इस तरह की समस्याओं से जूझते रहें। हर आतंकवादी घटना के बाद जांच तेज करने और खुफिया तंत्र को मजबूत करने की ढ़ेरों बातें की जाती है लेकिन आखिर वही होता है जो हर आतंकवादी घटना के बाद होता रहा है। और हम और आप सिर्फ मुकदर्शक बने रहतें हैं। लेकिन अब समय आ गया है एक ऐसी पहल की जो इस पूरी समस्या को ही जड़ से उखाड़ दे। तभी किसी दूसरे संतोष को बचाया जा सकता है जरुरत इस बात की भी है हम खुद जागरुक हों। और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले विघटनकारी तत्वों के मनसूबें को नाकाम कर दें। मुझे आपकी सराहना इस बात के लिए भी करनी पड़ेगी कि आप जैसा कोई स्टार इस तरह की भावनाएं भी रखता है और वो लोगों से जुड़ा हुआ भी है। ....

भारतीय दर्पण said...

बाजपेई साहब संवेदना के तार को झनझनाने के लिए आप बधाई के पात्र है.

AAWAAZ said...

मनोज जी आपने सही कहा कि अब तो डर लगता है...दरअसल अब लोगों की नियती ही बन गई है कि वे इस तरह की समस्याओं से जूझते रहें। हर आतंकवादी घटना के बाद जांच तेज करने और खुफिया तंत्र को मजबूत करने की ढ़ेरों बातें की जाती है लेकिन आखिर वही होता है जो हर आतंकवादी घटना के बाद होता रहा है। और हम और आप सिर्फ मुकदर्शक बने रहतें हैं। लेकिन अब समय आ गया है एक ऐसी पहल की जो इस पूरी समस्या को ही जड़ से उखाड़ दे। तभी किसी दूसरे संतोष को बचाया जा सकता है जरुरत इस बात की भी है हम खुद जागरुक हों। और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले विघटनकारी तत्वों के मनसूबें को नाकाम कर दें। मुझे आपकी सराहना इस बात के लिए भी करनी पड़ेगी कि आप जैसा कोई स्टार इस तरह की भावनाएं भी रखता है और वो लोगों से जुड़ा हुआ भी है। ....

imdad said...

manoj bhai salam...abhi abhi ramzan k rozey ka iftar kiya aur is blog per na aney ki shart k bawajood bhi.....dil nahi mana fir bhi ap k blog per dekhney laga ap ki postings...sabsey pehley to shukriya ada karooga tahey dil se ap ka ki ap ne kam se kam response to diya...mai samaj sakta hoo ki itni saal purani batey kaha se yad rahegi....khair...fir bhi dil ko bahut masarrat hui...ap ka response dekh k....Bas Allah se dua karooga ki ap apne pariwar k sath humesha khush rahey aur tarakki karey...ap ki walida aur walid hayat aur sehatyab rahey ( amin)....dost apne jo likha hai atankwaad k barey me such bahut achi batey lagi..mai yahi kahna chahta hoo bas... hum sab bhartiya chahey wo musalman ho,hindu bhai ho,christian,ya sikh bhai ho..atankwaad ki koi bhi munsoobey nahi kamyab honey dege inshallah.....dost mai gulf country me kaam karta hoo kareeb 4 saal se aur yakeen mano yaha kitney pakistani,bangladeshi,aur alag mulko k log kam kartey hai..aur mujhko unki zahniyat aur bato se humesha apney upar fakr hota hai ki mai ek bhartiya musalman hoo...aur apney watan bharat k liye jan nisar kar sakta hoo ka jazba rakhta hoo...jo ki humarey kuran me bhi hai ki apne watan se mohabbat karo,aur bhalai karo...mai samajhta hoo ye bhi ek sawab ka kam hai ,jo mai apney watan bharat k liye karta rahooga inshallah jab tak jan salamat rahegi....( amin..)..
Lekin dost kabhi kabhi afsos hota hai ki ek atankwad ki wajah se porey ek samaj per kichad jab uchalta hai...aur yahi ho raha hai...mai bas ap k blog k zariye ye sandesh dooga ki atankwad ka na hi koi mazhab na hi koi iman,na hi koi din aur duniya hoti hai...unhey kisi se koi matlab nahi hota hai...aur wo kisi ek samaj se nahi hotey hai,isliye guzarish karta hoo ki porey samaj ko log badnam na karey...aur hum sab mil k iski nas ko katney ki sochey na ki apas me ek dosrey ki cheeta kashi karney me ( jaisa ki ajkal humarey neta kartey hai..)..Inshallah humara bharat aur humari ekta ko koi bhi baal banka nahi kar sakta hai ..( amin..)...
Dost,ek bat aur..darasal..bahut logo ka kahna hai ki meri shakal apse 95 percent tak milti hai,to ek bar agar ap humey meri i d diaentertainment@gmail.com per contact kar letey to mai apna ek photo ap ko bhej doo ...zaroor ap bhi us photo ko dekh kar soch me pad jayegey...actor ban ney ka sapna mera bhi tha per shayad allah ko ye manzoor nahi aur mujhko gulf bhej diya..khair jab bhi ap ko dekhta hoo to isi me sukoon le leta hoo ki jaisey mai hi samney pardey per acting kar reha hoo....ha ha ha ha (ap ko mere pagalpan per hasi to aa hi rahi hogi q?)....khair....shayad bahut zyada likh diya mainey aur ab ap bore hone lagey hogey...
to theek hai ab eid k bad mulakat hogi aur eid ap,aur bhabhi ko bhi bahut bahut mubarak ho...
(Dost mail kar do diye hue i d per to masarrat hogi aur apna photo bhej dooga,baki ap ki marzi dost badey admi ho chotey logo ki kya.....ap k samney fir bhi likh diya umeed k sath )....Allah hafiz Dost......Hidustan Zindabad...

paharedar said...

प्रिय मनोज जी,
आज आपके विचार व सोच से मेरे बच्चो ने मुझे वाकिफ कराया है,
आपके ब्लॉग में लिखे हर शब्द की वेदना, पीड़ा व देश के मौजूदा हालातों पर जागरूकता के बारे में जानकर मुझे ऐसा लगा कि प्रकृति ने किसी महान कार्य के लिए सहयोगी के रूप में ब्लॉग के माध्यम से आपसे रूबरू करना चाहा है चूँकि इन्सान तो कुदरत का एक खिलौना मात्र ही होता है. इसीलिए वह जब भी, जिससे भी, जो भी कराना चाहती है उसकी सोच को उसी अनुरूप बदलकर करा लेती है कुदरत ने मुझे भी एक ऐसा कार्य पूरा कराने का हुक्म दिया है. परमात्मा की कृपा से जो मेरे लिए इस संसार भर की सबसे बड़ी दौलत और सबसे बड़ा तोहफा है.
आपको जरुर बताना चाहूँगा, कुदरत की इस नियामत के बारे में. अपने प्यारे देश के पीड़ित, शोषित, असहाय, बेहद गरीब, भूखे-प्यासे, जो नाइंसाफी और अत्याचारियों से त्रस्त जो वर्त्तमान में पुरी तरह नाकारा हो चुकी देश की राजनीती व राजनीतिज्ञों की घिनौनी कार्य प्रणाली के शिकार बने हुए हैं, को पूरी तरह मुक्त कराने व देश में संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए एक नई क्रन्तिकारी पहल का आरम्भ करके अगुआई करना है. यानी सभी देशद्रोही व विनाश के लिए जिम्मेदार शैतानी जालिम राजनैतिक शक्तियों के खिलाफ सीधे खुली जंग लड़ना. जिसके लिए प्रभु कृपा से मैंने ख़ुद को हर प्रकार की कुर्बानी देने के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया है. आख़िर कहीं से किसी को शुरुआत तो करनी ही पड़ेगी - किसी को तो जिम्मेदारी उठानी ही पड़ेगी.
मेरा मानना है कि जो सच्चाई का साथ लेकर खतरों से टकराने का माद्दा रखता है परमात्मा कि सारी शक्तियां उसकी सहायता के लिए ख़ुद ब ख़ुद हाजिर हो जाती हैं, जिससे हर जंग जीत ली जाती है.
मनोज जी ब्लॉग पर तो थोड़े से सार का ही परिचय दिया जा सकता है, अंतरात्मा की प्रेरणा पर मैं आपको एक पुस्तक (जो विशिष्ट विचार व कर्मों का नायाब खजाना है) पढ़वाना चाहता हूँ अगर आप असहज महसूस न कर रहे हों तो. मेरा यकीन ही नहीं दावा भी है इसे पड़ने के पश्चात आपको मानवीय कर्तव्य और कर्म की एक ऐसी यथार्थ अनुभूति होगी जिसकी लोग भय, स्वार्थ, लालच व गन्दी सोच के कारण कल्पना भी नहीं कर सकते. यहाँ पुस्तक किसी बुद्धजीवी की रचना या किसी साहित्यकार की कल्पना का पिटारा नहीं है. यह आपको एक ऐसे विचित्र संसार की अनुभूति से भर देगी, जो अधिकतर इंसानों के लिए दुर्लभ ही ही नहीं असंभव भी है. आप जिस पते पर भी चाहें, आपको कोरियर से भेज दूंगा. लेकिन आपको यह विश्वास दिलाना होगा की यह पुस्तक आपकी जैसी सोच रखने वाले ही पढ़े. हर कोई इसे पढ़ने का अधिकारी नहीं है.
आपके शीघ्र उत्तर की प्रतीक्षा करूँगा. क्योंकि वक्त बहुत कम है बल्कि है ही नहीं. अगर दिल्ली में मिल सकते हो तो जरुर मिलने की कोशिश करना. फ़िर जैसा भी आप ठीक समझो. लेकिन तुम्हे परमात्मा का वास्ता है कि- तुंरत जबाब जरुर देना.
बाकी प्रभु कि जैसी इच्छा.
धन्यवाद
email id- ajadhind.11@gmail.com

हिन्दुस्तानी एकेडेमी said...

आप हिन्दी की सेवा कर रहे हैं, इसके लिए साधुवाद। हिन्दुस्तानी एकेडेमी से जुड़कर हिन्दी के उन्नयन में अपना सक्रिय सहयोग करें।

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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणी नमोस्तुते॥


शारदीय नवरात्र में माँ दुर्गा की कृपा से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों। हार्दिक शुभकामना!
(हिन्दुस्तानी एकेडेमी)
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Mukesh hissariya said...

JAI MATA DI
Wishing all of u HAPPY NAVRATRAS. First Navratra is of MATA SHAILPUTRI.