Sunday, September 14, 2008

कब रुकेगा ये सिलसिला

कब खत्म होगा मौत का ये वहशीपना। हर दिन कोई न कोई हादसे का शिकार हो रहा है। आतंकवाद के नाम पर उन मासूम लोगों की जान ली जा रही है, जो अपने छोटे से जीवन में बड़ी-बड़ी परेशानियों से जूझते हुए जिंदंगी जी रहे हैं। वैसे, आतंकवादी हमलों का सिलसिला इस हिन्दुस्तान में कई साल से चल रहा है। रोक लगती हुई दिख नहीं रही है। कौन रोके इसे? किसे रोकना चाहिए। क्योंकि, जो ज़िम्मेदार तंत्र है, उसके पास अपनी खुफिया तंत्रों के बारे में भी कोई राय नहीं है। न वो कोई जिम्मेदारी लेना चाहता है। लेकिन क्या सरकार इस रोग को रोक पाएगी। अगर नहीं तो फिर कौन?

आदमी बाढ़, बिजली, भूख, सांप्रदायिक दंगे, क्षेत्रवाद के नाम पर हिंसा आदि से तो मारा जा ही रहा है, साथ ही साथ वो ऐसे आतंकवादी हादसों का भी शिकार हो रहा है, जिससे उसका दूर दूर तक लेना देना नहीं है। आतंकवादी आम लोगों की जिंदगी लेकर साबित क्या करना चाह रहे हैं। ये कौन सा युद्ध है। या कौन सा जेहाद है। जिसमें बिना कारण गाजर-मूली की तरह लोगों को काट रहे हैं, मार रहे हैं। लोग मर रहे हैं और हम सब देख रहे हैं। सिर्फ टीवी पर। अब, ये समय आ चुका है कि आम जनता अपने अपने सरकारों पर दबाव डाले और उनको जिम्मेदारी लेने पर मजबूर करें। अब समय आ चुका है कि हम सबको जवाब मिले,उत्तर मिले। वैसे,समय ये भी है कि अब हम खुद अपनी जिम्मेदारी लें।

हालांकि,100 करोड़ की आबादी होने का मतलब ये नहीं कि हम लोग घास-फूस हैं। मैं हर हर मृत व्यक्ति के परिवार के शोक मे शामिल हूं। मेरा दिल भी रो रहा है। हर जख्मी हुए व्यक्ति के लिए प्रार्थना करता हूं। और ये भी प्रार्थना करता हूं कि अब कोई आतंकवाद क्षेत्रवाद,भूख, बाढ़ और सूखे से न मरे। लोग दुनिया छोड़ें तो अपना जीवन चक्र पूरा करके। मेरी संवेदनाएं आतंकवाद के शिकार हर परिवार के साथ हैं। आइए, हम सब उन सारे परिवारों के लिए दुआएं करें।

आपका और आपका
मनोज बाजपेयी

18 comments:

ajay kumar jha said...

aadarniya manoj jee,
saadar abhivadan. sach kahoon to shaayad kabhee nahin, insaan shaayad wo iklautaa janwar hai jo khud hee apnee nasl kaa shikaar kar raha hai. main janta hoon ki pulis sarkaar suraksha har jagah nahin ho saktee aur na hee ise rokaa jaa saktaaa hai.

magar jo iske liye jimmedaar hain unhein to jaroor hee faansee par chadhayaa jaa saktaa hai, afsos ki aisa bhee nahin ho pa raha.

PD said...

आपसे शत प्रतिशत सहमत..

Mukesh hissariya said...

Bhaiya,
jai mata di,
We have no words to express grief and sorrow at this time.

PREETI BARTHWAL said...

मनोज जी आपकी प्रार्थना में मैं ही नही पूरा हिन्दुस्तान आपके साथ है। हर कोई चाहता है इस आतंकित माहौल से निजात पाना।

Anil Pusadkar said...

manoj ji ye kya kiya hindustan likh diya, agar kathit budhijeeviyon ko,ya chadm dharmnirpeksha taqaton ko pata chalega to we aapko hindu-waadi ya sampradayik karar de denge, ye haal hai is desh ka aur aise me kanha kuchh rukne waala hai.aap kab puchh rahe hain?sawal ye nahi ye hona chahiye ki rukega bhi ya nahi.bura mat maniyega

solanki said...

yes ..........Mr.Bajpai ji..............We have to fight against all evils.....as It is the only way.........Its is already approved long ago.....IN Ramayan and Shri Gitaji era too.........so just fight, be perfect in all manners....particularly in unity of all people, caste , creed.........Thanks ........Msnoj ji........

Manmohan Sharma said...

Manoj Bhiya ji,

Aise Bomb Kand ko dekh kar smjah mein nahin aa raha hai ki humara bharat ja kis disa mein raha hai......hum log to unke dard ko smjah bhi nahin payenge jinke sage sambhandhi isme chale gayein bus hum yahin kah sakte hia ki humari duaein unke sath hai lakin mujhe humesha ye khushi rahegi ki aap jaise celebrity jo itne busy hote huein bhi iske baarein mein soch rahien hain to shayd ab bharat kuch sahi raah pe chal de....

राजीव तनेजा said...

ना जाने कब खत्म होगा ये कायरता पूर्ण तरीके से अपनी बात कहने का सिलसिला....

Krishna Kumar Mishra said...

मनोज जी आप की चिन्ता उचित है पर आदमी बदल चुका है और नस्ल भी किससे क्या उम्मीद की जाय खैर हालात इससे भी बुरे देखे है इस मुल्क ने पर सवाल ये है कि हम क्या कर रहे है सिर्फ़ बातें!!!!

विनीत उत्पल said...

jab tak ham ek jut ho kar aatankvad ke mukabalr ke liye taiyar nahee honge, kuchh nahee hone vala hai. fedral agency ke liye kam karna hoga. 16 tarikh ke dainik bhaskar me Dr. kiran beïi ka aalekh padhne layak hai.

कुन्नू सिंह said...

मनोज जी,
आप सही लीखे हैं। आप देखीयेगा एक दीन ये भी समय आएगा जब भारत मे कहीं भी धमाका नही होगा।

Manoj Sinha said...

मनोज जी
मै भी आपका हमनाम और गज़ब का fan. आप मेरे प्रोफाइल को भी देखेंगे तो मैंने सत्या को शोले के बाद की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म माना है. यहाँ तक कि मेरे स्टूडियो में भी कुछ मुझे बाजपेयी ही कहते हैं. जहाँ तक रामू जी की बात है तो मेरे एक मित्र ने, जो कि मुंबई में ही फिल्मों के लिए संघर्षरत है , ने फ़िल्म सरकार के बाद फ़ोन कर रामू जी को कहा कि आपकी आपकी फ़िल्म अच्छी लगी, तो उनका जवाब था "तो मैं क्या करूं". तो ऐसे हैं रामू जी, खैर आप जिस भी जगह भी जाएँ रामू टाइप के लोग मिलेंगे ही. यह मेरा आपको पहला अभिवादन है. प्रतिक्रिया देता रहूँगा. समय मिले तो मेरे बनाये हुए कार्टून को मेरे इस ब्लॉग के जरिये देख लें.
धन्यवाद्

इन्दु said...

manoj ji
aapka blog dekh rahee hu, achha lag rahaa hai. Zyaada achhi baat ye hai ki itne busy shedule ke bavjood aap likh paa rahe hain aur ham log jo hain hi isee field main, blog tak nahin likh pate.
Aap logo ka sajha prayas jo barh peeriton ke liye kiya gayaa, sarahneey hai. Delhi blast ke baare mei yahee kahungee ki kuch muthhi bhar log hain, jo poori manavta ko mita dena chahte hain lekin ham-aap kam se kam apne dilon mai koi shubha na aane dein, ye behad zaroori hai.
Mai ek baat janana chahti hu ki kyaa aapne child labour ke liye bhi kuch prayas kiya hai? Yadi han to please bataiye. Main media se judee hu aur children's day par ek special cover story kar rahee hu. Aapke vichaar mahatvpoorn honge mere liye, agar aap kuch bataa saken. Aapko kya lagta hai kaise ye problem kam kee ja sakti hai, kya hamaree education policy main bhi kuch changes hone chahiye taki bachhe padhayee aur kaam ek sath kar sake, jaisa ki kuch deshon mein prayog kiya gayaa aur safal bhi rahaa. Agar aapko lagta hai ki aap kuch sujhav de sakte hain to please mujhe batayein. Please mind mat keejiyega kyunki mere paas font problem hai, jiske chalte mai hindi mai nahi likh paa rahi hu.

Dr.Tripathi S M said...

manoj bhaiya
Pranam,mujhe to bas itna kahna hai ki jab bhi jis desh main atankbadi ghatna ho wahan ke home minister ko 24 ghante ke aander phanshi per chadha de.aisha ek bar hoga aur us desh se atankbad samapt ho jayega.
jai brahman.

गौरव सोलंकी said...

बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आना हुआ। कई पोस्ट एक साथ पढ़ीं। एक बात बहुत दिन से मन में थी कि 'मनी है तो हनी है' करना कहीं अन्दर से खलता नहीं क्या? मुझे तो लगता है कि आप जैसे अभिनेता को व्यक्तिगत तौर पर बहुत कष्ट होता होगा। मैंने फ़िल्म देखी नहीं है और देखना भी नहीं चाहता। हाँ, समझता हूं कि कमाती भी यही फ़िल्में हैं। अक़्स, 1971 और पिंजर से कहीं ज़्यादा लोग ये सब देखेंगे।
एक पोस्ट भी पढ़ी इस पर। passion for cinema पर किसी ने लिखी है। आप भी पढ़िएगा।
http://passionforcinema.com/fate-of-scene-stealers/
जवाब देना ज़रूरी नहीं है मगर फिर भी आपकी राय जानना चाहूंगा।
और एक बात... आपका ईमेल पता मिल सकता है? कुछ मार्गदर्शन चाहिए।

Brother said...

Hi Manoj ji... I proud I'm Indian. I'm proud you belong from special regional. You are Icon of Bihar. You are doing best for Bihar. I think one day you will achieve what you want. We with you. We are with you. I request you that please open a complete production house in Patna or Gaya. IT park is also needed in Bihar.

devesh said...

I agree with you Manoj ji. We live in difficult times. Some of us are shieled from the grim reality because we have a certian amount of money but the rest of our brothers and sisters live in constant fear of death... we can't even imagine their fate because we have become immune to calamities. I hope God provides them succour.

Indu said...

कल
फिर
एक
बार
सत्ता
के
किसी
गलियारे
में
दिन
के
उजाले
में
हुआ
एक
एन्काउन्टर
जाने
पहचाने
आतंकी
का
या
जाने
पहचाने
आतंकित
का?
एक
बार
फिर
ढेर
हुआ
कोई
मासूम
जीवन/
एक
बार
फिर
बहाए
सिर्फ़
सितारों
ने
खून
के
आँसू/
एक
बार
फिर
फटी
छाती
धरती
की
मौत
की
दर्दनाक
चीख
से
और
हर
बार
की
तरह
इस
बार
भी
कोई
तूफ़ान
नहीं
आया
कोई
इंसान
नहीं
जागा
इस
भयावह
नींद
से/
बस
आज
नम
है
सहर
भीगी
है
शबनम
सूरज
की
अंगड़ाई
भी
पड़
गई
हैं
मद्धम/
एक
बार
फिर
होगा
सत्ता
के
किसी
गलियारे
में
दिन
के
उजाले
में
एक
एन्काउन्टर/
आतंकी
का
नहीं
आतंकित
का
आतंक
से
शोषित
का
शोषण
से
शासित
का
शासन
से/
फिर
ढेर
होगी
प्रणाली/
एक
बार
फिर
झिलमिलाएंगे
सितारे
एक
बार
फिर
तृप्त
होगी
छाती
धरती
की/
और
पहली
बार
आएगा
एक
तूफ़ान
जागेगा
हर
इंसान/
सहर
होगी
नम
जीवन
की
शबनम
से
सूरज
की
अंगड़ाई
से
रात
भी
मूँद
लेगी
आँखें......
जब
होगा
फिर
एक
एन्काउन्टर.......