Monday, October 6, 2008

क्यों रोज़ सवालों के घेरे में आता है हमारा प्रजातंत्र?

वैसे तो मन बिलकुल नहीं कर रहा कुछ भी लिखने का। दरअसल, कभी-कभी लगता है कि अपने बारे में क्या लिखना। ऐसा कुछ भी तो नहीं है, जो दूसरों से अलग हो। दिनचर्या भी वही, दिनचर्या की नियति भी वही। सुबह काम पर जाना, वापस आना और सो जाना। वैसे, सपने देखना कभी नही छोड़ता - एक आदर्श देश, आदर्श परिवार और आदर्श व्यक्तिगत जीवन के। निजी जीवन और परिवार में कभी-कभी वो हासिल कर भी पाता है आदमी, लेकिन समाज और देश में तो करोड़ो लोग हैं और करोड़ों के मन का मिलना मुश्किल ही नहीं, कभी-कभी असंभव भी लगता है।

टीवी पर एक बहस देख कर उठा हूँ। थोड़ा झुंझलाया और थोड़ा निराश हूँ। एक तरफ़ जामिया नगर में एनकाउंटर का राजनीतिकरण और दूसरी तरफ़ कंधमाल में बलात्कार और हिंसा की घटनाओं के बाद उठती हुई राजनीति की बू। घिन आने लगी है उन चेहरों से भी, जो इस तरह की प्रकिया में लीन हैं। ग़ुस्सा आता है कभी-कभी अपने होने पर भी, और इन सबका परिणाम है आज की पोस्ट। लिखने का मन नहीं था तो सोचा कि भड़ास ही निकाल लूँ।

हिंसा, बलात्कार और शोषण को आप किसी भी तर्क से दबा नहीं सकते। न सही ठहरा सकते हैं। जो समुदाय या व्यक्ति हिंसा करता है, उसे उसी वक़्त सज़ा देने का प्रावधान भी होना चाहिए। लेकिन ऐसा न होने से लगातार प्रजातंत्र का मखौल उड़ाया जाता है। आज देश एक होते हुए भी बँट गया है। हिंसा के कारणों से, भाषा के कारणों से, जात-पात के कारणों से। लेकिन फिर भी हम हैं कि सिर्फ़ काम पर जाते हैं, आते हैं और सो जाते हैं। लेकिन कहीं-न-कहीं कुछ लोग हैं, जो आपको विश्वास दिलाते हैं कि सब सही होगा। उन लोगों के होने के कारण शायद एक आशा बंधी हुई है। प्रजातंत्र पहले कभी-कभी सवालों के घेरे में आता था, आज हर दिन सवालों के घेरे में खड़ा होता है। आवश्यकता इस बात की है कि हम सब पहले अपने आप को मानव समुदाय का मानकर और देश का नागरिक मानकर एक क़दम चलने की कोशिश करें। धर्म, क्षेत्र, भाषा - इन सबकों थोड़ा किनारे करें। मानव जाति और देश को सर्वप्रथम रखें। ख़ैर, भड़ास निकालनी थी सो निकाल दी। इसी के साथ -

आपका और सिर्फ़ आपका

मनोज बाजपेयी

12 comments:

Ankit said...

Because We live Democracy!!!!!

Mukesh hissariya said...

Bhaiya,
Happy Navratri,I Just Want to THANK GOD for Giving This Apportunity to Read Somthing Good.

मुन्ना पांडेय(कुणाल) said...

dhumil ko aapne padha hoga/usne likha tha--
"hamaare yahaan jantantra aisa tamaasha hai/jiski jaan madari ki bhasha hai"
-"hamaare desh ka samaajvaad /maalgodam mein latki hui/un baltiyon ki tarah hai/jin par bahar to aag likha hai/aur bheetar paani aur baalu bhara hai.."-
(ye kavitayein "sansad se sadak tak " mein sankalit hain kabhi padhiye aankhein khul jayengi)

narayana.com said...

hum loktantra ki laas dho rahe hai 4 kandho se aur ram naam satya hai kahne ka theka v remote se chnal badlne walo ke paas nahi hota. MANOJ bhai yeh des ap jaise creative logo ka muh dekh raha hai...agge to app jante hi honge.
pankaj narayan

Anil Pusadkar said...

आपका गुस्सा जायज है।क्योंकि प्रजातंत्र के मयने ही बदल गये हैं। buy the people,off the people and far the people ,है आज का अपना प्रजातन्त्र्।

Irshad said...

क्या बात है मनोज जी आप तो पत्रकारों की तरह से कलम चलाते है लेकिन मेरे अपने अनुमान से लोग ज्यादातर आपके आत्मकथ्य लेख पढ़ने में अधिक दिलचस्पी दिखा रहें है और आप निबन्ध लिखे जा रहे है। आप मनोज वाजपेयी है थोडी सी आपबीती भी होनी चाहिये। क्या ख्याल है।

Irshad said...

क्या बात है मनोज जी आप तो पत्रकारों की तरह से कलम चलाते है लेकिन मेरे अपने अनुमान से लोग ज्यादातर आपके आत्मकथ्य लेख पढ़ने में अधिक दिलचस्पी दिखा रहें है और आप निबन्ध लिखे जा रहे है। आप मनोज वाजपेयी है थोडी सी आपबीती भी होनी चाहिये। क्या ख्याल है।

anita said...

manoj ji aap ek samvedanshhel vyakti ke tarah sochte hai,chinta karte hai ...acchi baat hai ...log bollywood se jude logo se sirf gosip ya chatpati baaton ke umeed he rakte hai...ise jari rakhe...subhkamnaye.

anita said...

aaj hum shayad prajatantr ke jagah dehshattantr me jee rahe hai....ghar se niklte hai to dar pata nahi laute bhi ya nahi..abhi ek female jounlist ke death hui c m delhi sheela ji ka statement aaya k usko raat me ko adventure karne ke jarurat kya ...azeeb baat hai..phir sarkar elaan karva de k ladkiya bahar na nikle sakar bekar hai.....kuch din me possile hai kisi blast par sarkar kahe log aakhir ghar se bahar he kyoun nikalte hai...kya kahe....andher nagri chupat raja ....anjame gulista kya hoga har shakh pe ullu baitha hai...

ajay kumar jha said...

manoj jee,
saadar abhivaadan. sirf itnaa ki aaj jaroorat hai ki bahut kuchh badal diya jaaye, magar mushkil ye hai ki kaise aur kaun badlegaa. aap khoob likh rahe hain, khaaskar ek aam aadmee kee tarah bilkul apne kareeb lagte hain. likhte rahein.

katyayan said...

कभी कभी पीस टी वी पर ज़कीर नाइक का मोहब्बत का पैगाम भि देख लिया करें।

Indu said...

पता
नहीं
और
कितने
गोधरा
कितने
कंधामल
होंगे
तब
जागेगी
सोयी
इंसानियत
तब
ख़त्म
होगी
यह
हैवानियत/
पता
नहीं
कितने
बच्चों
की
माएं
कितनी
माँओं
के
बच्चे
गुम
होंगे
इस
आंधी
में/
तार-तार
होंगे
कितने
ही
आँचल
पथरा
जाएंगी
कितनी
खून
बहाती
आखें/

जाने
कितने
और
......

जाने
कब
बंद
होगा
यह
अंधा
सफर
कब
धर्म
की
ख़ूनी
ध्वजा
कुचली
जाएगी
इन
मासूमों
की
आहों
के
तले/