Monday, December 15, 2008

क्या इस बार सबक लेंगे!

लगता है कि इस बार भी हम सबक नहीं ले पाएंगे। लोग मरते जा रहे हैं, अपनों से बिछड़ते जा रहे हैं। फिर भी हम कुछ सीख नहीं पा रहे हैं। अब भी हम पाकिस्तान के साथ तू तू मैं मैं की राजनीति में लगे हुए हैं। चाहे वो सरकार हो, चाहे वो मीडिया हो या चाहे जो भी जिम्मेदार लोग हों, हर कोई युद्ध और युद्ध की राजनीति की बातें कर रहा है। सवाल ये है कि खुद को बचाने के लिए हम क्या कर रहे हैं? हम अपने आपको सुरक्षित रख पाएं, अपने लोगों पर आंच न आने पाए,इसका कोई उपाय करें, उससे ज्यादा जरुरी कई नेताओं को ये लग रहा है कि वो कैसे टीवी चैनलों पर जाकर बहस में हिस्सा लें। और ये बता पाएं कि कैसे उसकी पार्टी या उनकी सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है।

मेरा अपना मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितना दबाव बना सकते हैं,पाकिस्तान पर, वो बनाया जाए ताकि पाक में जो भी आतंकी ट्रैनिंग कैंप है,वो खत्म हो। बजाय इसके कि उनके साथ सारे सांस्कृतिक संबंध भी तोड़ लिए जाएं। दबाव बनाने में परहेज नहीं है, और न ही उसको ढीला करना चाहिए। और जहां तक आंतरिक सुरक्षा की बात है तो उस पर हमेशा से सवालिया निशान रहा है और उसे मजबूत करने की दिशा में हमें काम करना चाहिए। हर तरफ से कोशिश यही होनी चाहिए कि मुंबई की ये घटना आखिरी आतंकवादी घटना हो। पाकिस्तान से संबंध तोड़ने में कोई समझदारी नहीं है, क्योंकि जो लोग जिम्मेदार नागरिक हैं, उनका क्या लेना देना। हम उनके साथ अपने संबंध क्यों तोड़े, जो हमने अभी अभी बनाया है। प्यार दिया है,और प्यार लिया है।


मैं जानता हूं कि मेरी ये बात बहुत सारे लोगों को बुरी लगेगी। लेकिन,फिर भी जो सही है,जो मानवता के हक में है, उसी की जीत होनी चाहिए। गॉर्डन ब्राउन आए,इसके पहले बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेताओं के बयान आए। कोंडालिसा राइस आई। वापस जाते हुए पाकिस्तान में बयान भी दिए गए। लेकिन,हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि आखिरी सच यही है कि वो सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे । वो कभी हिन्दुस्तान के बारे में नहीं सोचेंगे। हिन्दुस्तान को खुद अपने बारे में सोचना होगा। हम सभी लोगों को एक दूसरे के लिए आगे बढ़कर आना होगा। तभी ये देश जहां है, वहां से आगे बढ़कर आ पाएगा। हम सब अपने अपने तौर पर ईमानदार रहने और बनने की कोशिश करें। तभी इसी देश का भला है,और इसी में हस सभी की भलाई है।

इसी के साथ
आपका और आपका
मनोज बाजपेयी

14 comments:

sareetha said...

मनोज जी आपकी बातें कुछ हद तक सही हो सकती हैं लेकिन अब तो हद हो चुकी है । रचनात्मक रवैया अपनाना बुरा नहीं , लेकिन सामने वाला उस तरीके को समझ सकने की कूव्वत भी तो रखता हो । आज तक इस देश के जितने सैनिक अघोषित युद्ध में मारे गये हैं , उतने आर पार की लडाई में भी शायद ना मारे जाते । ये सच है कि युद्ध कोई हल नहीं ,लेकिन सहिष्णुता का लबादा ओढकर अपनी ही तबाही का मंज़र देखते रहना क्या समझदारी होगी ? पाकिस्तान को हर मोर्चे पर घेर कर मारना बेहद ज़रुरी है ।

रंजन said...

सही कहा मनोज जी.. पता नहीं कब सुधरेगें हम

santosh said...

bilkul sahi kaha apne manoj ji,chahe america ho ya Britain...sab keval apne bare me soch rahe hai....hakikat yah hai ki Bharat ko apni ladai khud hi ladni hogi aur yeh sachchai ham aur hamare neta jitni jaldi samajh lenge utna achchha hoga....Bharat khud saksham hai apni ladai ladne ur jitne me...jarurat hai himmat aur ichchhashakti ki.....

Manish Ravi said...

Main aapke blog ka naya paathak hun. Par 1 baat kehna chahunga.....ki Manoj ji aapki lekhini kamaal ki hai.....vishwas nahi hota 1 actor 1 thinker bhi ho sakta hai..........
Maafi chahunga....par kya ye aapka official blog hai???
Main aapka fan to bahut pehle se hi tha....par aapke lekh padhne k baad aapka mureed ho gya hun.....

AApka
Manish Ravi

सुनील मंथन शर्मा said...

मेरा अपना मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितना दबाव बना सकते हैं,पाकिस्तान पर, वो बनाया जाए ताकि पाक में जो भी आतंकी ट्रैनिंग कैंप है,वो खत्म हो।
सही कहा आपने, आपके इस विचार से मैं सहमत हूँ.

MANOJ PARTAP SINGH said...

ji bilkul, ye to hai hum sudharne me time bahut lagate hain...isliye pichde huye hain abhi tak...soch badalne ki jaruurat hai

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

मनोजजी

आपका दर्द आम जनता के विचारो के अनुकुल है। हमारे घर कि तकलिफ को हमे निपटना ही होगा। कब तक अमेरिका पर निर्भर रहेगे। हमे बिना देर किये आतकवादियो के ठिकानो को नेस्तोनाबुद करने के लिये पाक पर>>>> ? आप समझ गये होगे।
सोनियॉजी के लिये अब अच्छा अवसर है झॉसी कि रानी बनने के लिये।

एस. बी. सिंह said...

जो बार बार की गलतियों से सबक नहीं लेते हैं, समय उन्हें माफ़ नहीं करता। आपने सही कहा मनोज जी कि युद्ध किसी समस्या का निदान नहीं है। हमें कूटनीतिक प्रयासों से पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाना चाहिए साथ ही आतंरिक सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए। मगर इस सम्बन्ध में राजनीति ज्यादा होती दिख रही है काम कम।

Mukesh hissariya said...

Jai mata di,
Hamen aub her jagah pakistan ko muhtorjawab dena hoga.

प्रकाश गोविन्द said...

युद्ध हर मसले का हल नहीं होता !
युद्ध तो आख़िरी विकल्प है ही !
लेकिन मेरा हमेशा से मानना है कि खतरा
हमें बाहर से ज्यादा अन्दर से है ! पहले हम अपना घर सही और मजबूत कर लें बाकी चीजें
ख़ुद-बा-ख़ुद सही हो जायेंगी ! मैं इतिहास में
नहीं जाना चाहता ,,,,,,, किंतु क्या हमने पिछली घटनाओं से कोई सबक लिया ? हमारा अपना घर सही होता तो बाहर वाले किसकी मजाल जो हमें आँखें दिखाये !
इन नारेबाजी से .... इंडिया गेट पर मोमबत्तियां जलाने से ...... दो-चार इस्तीफे से सब सही
हो जायेगा ? इतना भी हंगामा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि इस बार आतंकवादियों के खूनी खेल का "लाइव प्रोग्राम" देख लिया सबने ! वरना तो रोज ही कहीं न कहीं हमारे जवान शहीद होते रहते हैं ..... हमारी तो निगाह भी नहीं जाती अखबार में छपी उस घटना पर !
हमारी तो फितरत ही है - सौ सौ जूते खाएं .... तमाशा घुस के देखें !"
गन्दगी...मिलावट...व्याभिचार...भ्रष्टाचार..जातिवाद...क्षेत्रवाद इत्यादि के हम आदी हो चुके हैं ! देश को अन्दर ही अन्दर दीमक खाए जा रहा है ...... खोखला होता जा रहा है देश और समाज ! हर बार हम मदद के लिए उम्मीद भरी आंखों से रूस और अमेरिका की तरफ देखते हैं ? क्यूँ करें हमारी सहायता वो ? आज के समय में कमजोर की मदद कोई नहीं करता ! समर्थ के समर्थन में सब आते हैं ! ये याद रखना चाहिए !

देवकान्त पाण्डेय : said...

Beshak yuddh kisi samasya ka samadhan nahi hai par kahte hain ki "Shate shathyam samacharet" to kai baar kade kadam uthane bhi jaroori hote hain.

आलोक शंकर said...

Manoj ji, aaj sahitya shilpi par aapka saakshatkar padha, bahut achcha laga ki aap hindi sahitya ki seva karne vale manchon ka utsah badha rahe hain. Main bhi champaran (motihari) ka hoon. Is naate aapse vishesh prem hai.

Alok shankar
alok.shanker@gmail.com

creativekona said...

Respected Manoj ji,
Apke bat bilkul sahee hai.Hamare samne pakistan se ab do took bat karne ke alava koi chara naheen hai.Hamen pore vishva kee sahmati lekar pakistan par dabav banana hee chahiye .akhir ham kab tak ahinsa ke raste par chal kar agni pareekshaen dete rahenge.
Hemant Kumar

अमिताभ said...

मनोज जी ,
"क्या इस बार कोई सबक लेंगे ?" हर भारतीय के मन में ये पीड़ा प्रश्न बनके उभरी है .

ज़रा एक बार
ये भी सोचना
ज़रा एक बार
ये ख़ुद से भी पूछना
ख़ुद से आँख भी मिलाना
ज़रा ये बात ख़ुद को
भी बताना

क्या हम भी नही हैं दोषी
इन धमाकों के ?
क्या ये वो हम ही नही
जो बिना पड़ताल के
रख लेते हैं अपने घरों में
किरायदार

क्या ये वो हम ही नही हैं
जो दे देते है अपने माहौल में
दहशतगर्दो को पनाह

क्या ये वो हम ही नही हैं
जो हमेशा अपनी निगाहें
फेर कर रखते हैं
अपने आस पास के माहौल से
हमारे बीच में
दहशत गर्द आ जाते है ?
और हम समझ भी नही पाते है!

क्या हमारी निगाहों ने
कभी किसी पर शक किया है .
ज़रा एक बार
ये ख़ुद से भी पूछना
ज़रा एक बार
ये भी सोचना

क्या ये वो हम ही नही
जो चुन लेते हैं
भ्रष्ट और निक्कमे नुमाइंदे

आख़िर कब तक हम भी
अपनी ज़िम्मेदारी से मुहं मोडेंगे ?
हमें चौकन्ना बनना होगा
हमें सजग रहना होगा

अपने आस पास के माहौल
पर नज़र रखनी होगी
कोई दहशत गर्द हमारे
बीच में फ़िर न आए
कोई भ्रष्ट निकम्मा नुमाइंदा
हमारे वोट से संसद में न जाए

रहना होगा होशियार
हम सबको बनाना होगा जिम्मेदार
अपने देश का सजग पहरेदार

शुभकामनाये !!!
सादर सप्रेम
अमिताभ