Wednesday, March 18, 2009

‘जेल’ में मैं नहीं गैंगस्टर

“राजनीति” की शूटिंग करके अभी भोपाल से लौटा हूं। ये शेड्यूल का अंतिम चरण था। अगल शेड्यूल सितंबर के पहले हफ्ते में शुरु होगा, जब सारे अभिनेताओं की तारीखें उपलब्ध होंगी। जब जब भोपाल जाना हुआ अच्छा लगा। एक अच्छा बदलाव था। मुंबई जैसे महानगर से बाहर निकलने के बाद ऐसा लगता है कि पहली बार सांस ले रहा है व्यक्ति।

मेरी दूसरी फिल्म “जेल” अप्रैल के दूसरे हफ्ते से शुरु होगी। मधुर भंडारकर इस फिल्म के निर्देशक हैं। खबर के विपरित मैं ये कहना चाहूंगा कि “जेल” में मेरा किरदार किसी गैंगस्टर का नहीं है। किसका है, क्या है, ये मैं अभी बताने में असमर्थ हूं। फिलहाल, उसकी तैयारियों में लगा हूं।

इस बीच दस दिन के लिए मेरे माता-पिता और भांजी का मेरे घर पर आना हुआ है। मैं और मेरी पत्नी शबाना उनके आने को लेकर खुश हैं। हमारी पूरी कोशिश है कि उनका दस दिन का मुंबई आगमन सुखद गुजरे।

इसी बीच चुनाव की गहमागहमी पर भी नजर रहती है। आज ये जानकर खुशी हुई की मेरे निर्देशक मित्र श्री प्रकाश झा लोकजनशक्ति पार्टी से बेतिया के लिए उम्मीदवार चुने गये हैं। मेरे पिता जी काफी खुश हैं। उनका ऐसा मानना है कि श्री प्रकाश झा जी बेतिया से लोकसभा के उम्मीदवार जरुर चुने जाएंगे। मेरे पिता जी का ऐसा मानना है कि श्री प्रकाश झा ने बेतिया में काफी काम किया है। काफी समय गुजारा है लोगों के बीच और लोग उनसे खुश हैं। सही बात है उन्होंने अगर काम किया है। लोगों के दुख दर्द को समझा है तो उनका चुना जाना उचित होगा। और मैं यही आशा करता हूं कि प्रकाश जी इस बार लोकसभा के न सिर्फ उम्मीदवार चुने जाएं बल्कि लोगों की इच्छाओं और आशाओं पर खरें उतरें। किसी ने मुझसे पूछा कि क्या फिल्मी दुनिया के लोगों का राजनीति में आना उचित है, तो मेरा जवाब यही था कि एक अपराधी की जगह पर अगर एक फिल्म कलाकार आता है तो वो लाख दर्जे अच्छा है। क्योंकि फिल्मवाला कहीं न कहीं सीधा लोगों से जुड़ा होता है। वो संजीदा होता है। और कहीं न कहीं लोगों को समझने की कोशिश होती है उसमें।

मेरी प्रार्थना है सारे वोटरों से कि कृपया पार्टी चुनाव चिन्ह पर न जाएं। सिर्फ होनहार और वास्तव में लोगों के बीच रहकर जिसमें काम करने की क्षमता हो, उसी को चुनें। मेरा अपना मानना है कि जब जब चुनाव आता है, तो उम्मीदवार के लिए परीक्षा की घड़ी नहीं होती। अगर परीक्षा की घड़ी किसी के लिए होती है तो वो हैं वोटर। मैं आशा करता हूं कि हम सब इस अवसर और इस अधिकार का समझदारी से उपयोग करेंगे। और एक सभ्य, समझदार, ईमानदार, निष्ठावान प्रतिनिधि को लोकसभा में भेजेंगे।

इसी आशा के साथ
आपका और आपका
मनोज बाजपेयी

20 comments:

अनिल कान्त : said...

आपने बिलकुल सही कहा ....और मेरा मन्ना भी यही है की जिसने काम किया है ...जनता के दुःख दर्द को समझा है ...उसे ही चुना जाना चाहिए ...पार्टी चिन्ह से ऊपर उठ कर देखना ही होगा ...तभी एक सभ्य समाज का निर्माण संभव है ......और रही बात कलाकारों का राजनीति में आने की तो ये भी सच है की वो इन नेताओं से तो लाख बेहतर होंगे ........

बाकी आप और आपका परिवार आपके माता-पिता और भांजी के साथ अच्छे दिन बिताएं ...इसी शुभकामना के साथ ...

वर्षा said...

हां, ये अच्छी बात है कि इस बार प्रकाश झा चुनावी रण में हैं। हालांकि लालू के साले साहब को उन्होंने झटका दे दिया। वैसे आपकी फिल्मों का अंतराल भी बढ़ता जा रहा है।

neeshoo said...

मनोज जी आपको नयी फिल्म के लिए बधाई देता हूँ । आपका जो भी करदार होगा अच्छा ही होगा आप जैसे मंझे कलाकार फिल्म के किरदार को जीवंत कर देते हैं । और रही राजनीति की बात तो यहां तो ज्यादातर भ्रष्ट , चोर इत्यादि लोग ही मैदान में आते हैं अब इनमें ही देखना है कि कौन कम बुरा है । वरना राजनीति तो हम सब लोगों की सोच से कहीं ज्यादा घपर की बातें हैं। शुभकामनाएं

रंजना said...

आपको नयी फिल्म की शुभकामना....
राजनीति में सही लोग आयें,यह हर तरह से शुभ है.

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

मेरी प्रार्थना है सारे वोटरों से कि कृपया पार्टी चुनाव चिन्ह पर न जाएं। सिर्फ होनहार और वास्तव में लोगों के बीच रहकर जिसमें काम करने की क्षमता हो, उसी को चुनें..

बहुत ही सटीक सलाह देने के लिए आभार.

PD said...

पिछली बार तो राजन तिवारी(शायद, पक्का याद नहीं है) से प्रकाश झा जी हार गये थे.. बिहार के आपराधिक समीकरण में उनका टिकना बहुत मुश्किल ही होगा.. शायद 'किताब' के चुनाव चिन्ह पर लड़े था..

प्रकाश झा जी से एक बार मुलाकात हुई है उनके पटना आवास के बाहर.. बहुत सरल व्यक्ति लगे थे.. बरसात के मौसम में अपने घर के सामने सड़क पर जमे हुये कीचड़ को साफ करवा रहे थे.. मेरी शुभकामनायें उनके साथ है..

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

@हम सब इस अवसर और इस अधिकार का समझदारी से उपयोग करेंगे। और एक सभ्य, समझदार, ईमानदार, निष्ठावान प्रतिनिधि को लोकसभा में भेजेंगे। ::)
मनोजजी। आपने पत्ते कि बात कही। चुनावो मे जनता का सही रहनुमा विजय बने, आपका यह सन्देश जन उपयोगी बने शुभकामना।

bhootnath( भूतनाथ) said...

.............काश लोग सच में ऐसा कर पायें तो सच में भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों ही बदल सकती है..........और उसकी आज बेहद जरुरत है....सच भाई.....!!

--- ''अम्बरीष मिश्रा ''का छोटा सा ''प्रयास'' said...

राजनीति :
अछा देखो तो जिन्दगी की खुशी
बुरा देखो तो सब्से बुरी जिन्दगी

*KHUSHI* said...

Aapke Maa-Pitaji aur bhanji ka Mumabi mai sawaagat hai. wasie bhi mere khayal se Mumbai mai Bhopal se kam Garmi hoti hai, to shaayd unhe yaha accha hi lage.
Baaki rahi chunaav ki baat, ji haan, filmwaale Rajniti mai aaye to jyada aasan rahega unhe, kyu ki waise bhi Politicians acting karne mai maher hote hai to fimlwalo ke kiya kafi aasan rahega. ye to hui ek alag baat, lekin filmwalon ki apni ek alag pahechaan hoti hai jiska unhe raajniti mai phayda jaroor hota hai.log inte bure bhi nahi hote. sirf kisi ki burai ki parchaai puri indestry pe chaa jaati hai.. kintu uss parchai tale dabe hue suraj ko kabhi na kabhi bahar nikal na hota hai.bas, issi naye suraj ki paheli kiran ki umeed mai...
Prakash Jha ko Rajniti ke pravesh ke liye abhinandan...

Tejas Deoskar said...

Hello
Nice to see you working with top director from the industry.
I am a little disappointed that I will not get a chance to work with you. But I am sure that soon, I will.
Wish you all the best. I hope you will achieve what you deserve.

creativekona said...

आदरणीय मनोज जी ,
अपने बात तो बिलकुल सही लिखी है की चुनाव के समय सभी वोटर चुनाव चिह्न पर न जाकर
एक अच्छे ,सही और ईमानदार नेता को चुन कर लोकसभा तक पहुंचाएं ...लेकिन क्या वास्तव में ये संभव होगा ?ऐसे हालत में जब कि चुनाव मैदान में उतरने वाले महारथियों में से ऐसे उम्मीदवार हों जिनके ऊपर हत्या ,बलात्कार ,आगजनी ,स्मगलिंग जैसे संगीन अपराधों के मुक़दमे चल रहे हों .जिनका एक लम्बा आपराधिक इतिहास रहा हो ....कहीं कहीं तो शायद ऐसा भी हो जहाँ मतदाता के पास और कोई विकल्प ही ही न हो..
और यहाँ की जनता ...सिर्फ सामायिक लाभ देख कर ,पाकर वोट दे देती है ...उसे इस बात से कोई मतलब नहीं कि अभी तुंरत फायदा देने वाला यही उसका प्रतिनिधि अगले पॉँच सालों तक उसे पहचानेगा ही नहीं .....बहरहाल आप देश ,चुनाव ,यहाँ की जनता के बारे में इतना सोचते हैं ये आपका आम जनता के प्रति प्यार है .
शुभकामनाओं के साथ.
हेमंत कुमार

Mukul said...

Manoj Ji,
Jai Shri Krishna.
AApne apne blog mein likha hai ki--
किसी ने मुझसे पूछा कि क्या फिल्मी दुनिया के लोगों का राजनीति में आना उचित है, तो मेरा जवाब यही था कि एक अपराधी की जगह पर अगर एक फिल्म कलाकार आता है तो वो लाख दर्जे अच्छा है। क्योंकि फिल्मवाला कहीं न कहीं सीधा लोगों से जुड़ा होता है। वो संजीदा होता है। और कहीं न कहीं लोगों को समझने की कोशिश होती है उसमें।
Lekin mein to aapke vichaaron se bilkul bhi sahmat nahi hoon. Sach to yeh hai ki--- koi bhi vyakti jab tak ek sadharan vyakti rahata hai tab tak vah aam janta se juda rahata hai LEKIN jaisai hi vah film kalakar ban jata hai, vah aam janta se bilkul hi cut jata hai.
1947 se lekar aaj 2009 tak anek film kalakar rajniti mein aaye aur chunaav mein jeet bhi gaye, lekin un logon ne aam janta ke hit ke liye kuch bhi nahi kiya. Lagbhag har rajnitik party mein is prakar ke film kalakar bhare pade hain jo chunav jitkar keval mota vetan aur suvidhayen praapt karte hain aur iske alava kuch bhi nahi karte hain. Kuch naam is prakar hain----- Govinda, Jaya Bachchan, Jayaprada, Navjot singh sidhdhu aadi-aadi. Yeh log alag-alag party se jude hue hain AUR yeh sabhi SANSAD mein pahunche lekin inhone aam janta ke liye kuch bhi nahi kiya.
Lekin hamaare Bharat Desh ki aviveki janta film kalakaron ke glamour se pravabhit hokar unhe vote de deti hai. Lekin aam janta yeh nahi samjhati hai ki in film kalakaron ke paas mein samay hi nahi hai. Isliye in logon ko vote dekar jitane se koi fayda nahi hai. ISLIYE MERA TO PURE BHARAT DESH KI JANTA SE NIVEDAN HAI KI KISI BHI FILM KALAKAR KO CHUNAV MEIN BILKUL BHI VOTE NAA DEN. BALKI MERA TO KAHNA YEH HAI KI---- JO BHI RAJNITIK PARTY APNE CHUNAV PRACHAR ABHIYAAN MEIN KISI BHI FILM KALAKAR YA CRICKETER KO SAATH RAKHTI HAI, US PARTY KO HI VOTE NAA DEN KYONKI---- jo bhi party apne saath mein film kalakaro ya cricketer ko rakhti hai, vah keval glamour ko bhunana chahti hai aur us party ko na to aam janta ki samsayon ka gyan hai aur na hi desh ki samsayon ka gyan hai. Isliye aisi party ko vote dene se kya fayade hai ?
Vaisi bhi agar Film Kalakaro mein jara bhi sharam aur jara bhi deshbhakti baaki hai to unko swyam hi rajniti se door rahna chahiye kyonki Filmo se jude logon per samay hi nahi, isliye jhootha vayda karne se kya fayda?
Manoj ji, aapko yaad hoga ki 2002 mein Shekhar Suman ke ek program---- Simply Shekhar---- mein aapne kaha tha ki aap apne gaon ka swaym hi vikas karna chahte hain. Ab aap apne blog per yeh bataayen ki aapne apne gaon ke vikas ke liye kya-kya kaam kiye hain? Shayad kuch bhi nahi. Kyon? Kyonki aapke paas mein samay hi nahi hai. Thik yahi hall puri film industry ka hai. Ab aisi vyast log rajniti mein aa gaye to kya hoga? KUCH BHI NAHI.

Mukul Goyal Advocate
Mathura (U.P.)

Date : 20 March 2009

E-Mail : mukulgoyalmtr@gmail.com

prayas said...

kya aap prakash jha ke liye kshetra me jakar chunaw prachar karenge ?

ajitji said...

sahi hai ye ki apraadhi ko vote na den,, par chunaav ki ek vyatha kahta hun ki hamen 2-4 beimaan diye jaate hain
aur hamen ye channa hota hai ki inme se kam beimaan kaun hai,,
rahi baat filmi hastiyon ki to unke paas samay bhi nahi hota hai
to unhe bhi vote nahi diya ja sakta hai,,
to in sabme yahi achcha hai na ki jis party ka record achcha hai use hi jita den ham,,

salaah ke liye kotish dhanyaawaad

ashish said...

nice to c ur blog & comments.
I invite you to visit our blog newdelhifilmsociety.blogspot.com and be a contributor.
plz do visit.
regards,
ashish

anand said...

prakashjha ke chunaaw ladane ki charcha pahali baar kisi bollywood actor ke moonh sesunakar bahut achchha laga.ramvilas paasawaan ji ko dher saari badhaiyan ki unhone mere jaise logon ko ummidawar ke roop me ek sanjeedaa aur tikhi bauddhik dhaar wale prakash jha ji ko apani paarty kaa ticket diya ,manoj bhai.kabhi kabhi ichchha hoti haii ki ek aisaa organigation hamen banana chahiye jisake maadhyam se vibhinn chhetron me samaaj me galat ke khilaaf apane apane dayare me lad rahe hain .100 log jee haan sirf 100 log agar baudhik roop se sampann jo kalaakaar hon,ikatthe ho jaayen to bahut kuchh badal sakata hai manoj bhai.
aapake madhyam se prakash ji ko BEST OF LUCK.

anand said...

raajaniti to janata ki chij hai .janata ko taakat dikhane kaa manch,janata ki takat dikhane kaa manch,janata se taakat paane kaa hathiyaar .kya cinema bhi janata ki chij nahin hai?jaise janata kisi cinemaa ki takadeer ko banaati bigadati hai waise hi wo kisi neta ki bhi takadeer ko banaataa bigadati hai.
to kyon nahin cinemaa ke log vyapak bhagidari dikhate raajaniti me. shayad aaj ki taarikh me yahi ek chij desh ki sansad criminals ke haathon me jaane se bachaa paayegi.
manoj bhai aap hi kyon nahin rakhate ye vichar bollywood yaa desh ke saamane.aap ki aawaj ko lakhon sunenge.

anand said...

manoj bhai ,prakash jhaa chunaaw jeeten ye hamaari bhi dua hai

शिशिर उइके (वनमानुष) said...

प्रकाश झा जी तो निपट गए...भई,लालू पासवान की राजनीति का धुर विरोधी रहने वाला व्यक्ति जब उन्ही कि पार्टी के टिकेट से लडेगा तो जनता भी कन्फ्यूज़ हो जायेगी न...झा साहब ने अपनी विचारधारा चेंज की तो जनता ने भी अपनी चेंज कर ली.
प्रकाश झा जी ने अगर काम किये हैं, तो उन्हें लालू पासवान संग गलबहियां करने की बजाय निर्दलीय खड़े हो जाना था..हारते भी तो हम जैसों के मन में उनकी इज्जत तो बची रहती.