Thursday, July 9, 2009

सिर्फ लिखता नहीं, ब्लॉग पढ़ता भी हूं

मैंने माइकल जैक्सन से बड़ा सितारा इस उम्र में न तो देखा और न सुना। एक ऐसा सितारा, जो मेरे गांव से लेकर अमेरिका की गली गली में जाना पहचाना गया। विवादों से घिरी जिंदगी, परिवार से दूर जिंदगी, अकेलेपन से घिरी जिंदगी, प्यार की खोज में भटकती जिंदगी और बहुत सारी सफलताओं से भरी जिंदगी। वो अचानक अकेलेपन में ही खो गई। माइकल जैक्सन के जाने के बाद लोगों को अहसास हो रहा है कि उन्होंने कितनी बड़ी प्रतिभा को खोया है। ऐसा मशहूर सितारा शायद आने वाले कई सालों तक हमें देखने और सुनने को नहीं मिलेगा। मेरी तरफ से माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि। भगवान उनके बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित रखे।

पिछली पोस्ट में मैंने लिखा था कि पाठकों की प्रतिक्रियाओं का उत्तर देने की कोशिश करुंगा। मुझे अच्छा लगता है कि लोग ब्लॉग पढ़ते हैं, और अपनी राय रखते हैं।

मेरी पिछली पोस्ट “मुंबई में खुली जगह कहां” पर कई पाठकों ने सहमति जताई। इसका शुक्रिया। वैसे,मैं सिविल इंजीनियरिंग के मामले में बिलकुल नादान हूं, इसलिए इसका सटीक हल मेरे पास नहीं है,लेकिन इतना विश्वास है कि अगर एक्सपर्ट लोग इस गंभीर समस्या के हल के बारे में सोचें तो कुछ हल जरुर निकल सकता है।

किसी पोस्ट की प्रतिक्रिया में भाई इरशाद अली और विजय वडनेरे ने पूछा है कि आप दूसरों के ब्लॉग भी पढ़ते हैं या सिर्फ अपना ब्लॉग देखते हैं? मैं कहना चाहूंगा कि शायद सभी ब्लॉग नहीं पढ़ पाता हूं,लेकिन जब मौका मिलता है कि तो खास और आम सभी के ब्लॉग देखने की कोशिश करता हूं।

संध्या आर्य ने भी एक पोस्ट की प्रतिक्रिया में क्षेत्रवाद के बाबत बात की है। मुझे लगता है कि बढ़ता क्षेत्रवाद गंभीर विषय है। इसकी जितनी निंदा की जाए,उतनी कम है। राजनेता अपने बैंक को सुरक्षित रखने के लिए इस तरह की बातों को हवा दे रहे हैं। मेरे बहुत सारे मराठी दोस्त हूं। मैं आम लोगों में भी घूमता फिरता हूं। वो इस सारी घटना पर अफसोस जताते हैं। और हम सभी ने खुले शब्दों में इसकी निंदा भी की है। टेलीविजन के माध्यम से और समाचार पत्रों के जरिए भी। अगर कोई कानून हाथ में लेता है तो कानून उसे सजा दे। हम और आप एक दूसरे से झगड़ा करके, उसका निदान नहीं निकाल पाएंगे।

जिन दिनों मैं करजत में जेल की शूटिंग कर रहा था, कुछ पोस्ट मैंने वहीं से लिखीं। उन पोस्ट में करजत का लगातार जिक्र आया था। इस दौरान रानी पात्रिक ने एक कमेंट में लिखा कि करजत से आगे की बात कीजिए। तो लीजिए मैं उन्हें बता दूं कि अब मैं करजत में नहीं हैदराबाद में हूं। अपने एक तमिल मित्र की तेलुगु फिल्म के सिलसिले में। अनुभव बहुत अच्छा है। यहां के लोग बहुत मेहनती हैं। यहां का खाना बहुत अच्छा लग रहा है। ढाई साल पहले, जब से सिगरेट छोड़ी है, अलग-अलग तरीके के खाना खोजने और खाने में मजा आने लगा है। क्योंकि मेरा मानना है कि भोजन भी एक क्षेत्र की संस्कृति का हिस्सा होता है। वो संस्कृति की बात भी कहता है और खुद में इतिहास भी समेटे रहता है। रानी जी, कभी हैदराबाद आना हो, तो एक रेस्तरां है अंजपर। पंचगुटा में। वहां खाना जरुर खाइएगा। केले के पत्ते पर खाना खाने का जो मजा आपको आएगा,वो आप कई दिनों तक याद रखेंगी।

वैसे, प्रतिक्रियाओं को देखते हुए एक बात अच्छी लगी कि कई पाठक बहस को आगे बढ़ाते हैं,तो कई किसी समस्या का हल खोजने की कोशिश में आगे आते दिखते हैं। हेमंत कुमार, गिरजेश राव, राजीव रंजन, अनिल कांत, सतीश पंचम, अजय कुमार झा, सागर नाहर, पुखराज, यायावर जैसे कई पाठक लगातार कमेंट कर हौसला बढ़ा रहे हैं। सभी का नाम लेना संभव नहीं है,लेकिन आप सभी का शुक्रिया।

कई पाठकों ने मेरी आने वाली फिल्मों के बारे में पूछा है कि तो मैं कहना चाहूंगा कि मेरी आने वाली फिल्में हैं-एसिड़ फैक्ट्री, जेल और राजनीति। इन सभी पर काम चल रहा है। सितंबर से ये फिल्में रीलिज होना शुरु होंगी। अवश्य देखें। मुझे काम करने में मजा आया। उम्मीद है कि आपको देखने में भी मजा आएगा।

इसी के साथ
आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

42 comments:

PD said...

badhiya laga yah jaankar ki aap any blog bhi padhte hain.. :)

maine bhi abhi abhi ek post MJ par likhi hai, samay mile aur man kare to jaroor dekhen.. http://prashant7aug.blogspot.com/2009/07/blog-post_09.html

इरशाद अली said...

अरे मनोज जी, आप तो दिल पर ले गए। हमने तो ऐसे ही पूछ लिया था, वो क्या है ना आजकल एक प्रतियोगिता चल रही है, ब्लागिंग को लेकर। कि अगर किसी के ब्लाग पर मनोज वाजपेयी की टिप्पणी मिलती है तो उसे तीन दिन का फ्री सिंगापूर का टूर मिलेगा। आप भी शायद किसी का ब्लाग और लेखन शैली को पसन्द करते होगें, तो कभी टिप्पणी का उपहार भी दे दिजियेगा। लोगों को पता चल जाता है कि आप भी उपस्थित है, बारहाल आप सबका भला चाहते ये बड़ी अच्छी बात है। शेष फिर कभी।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

भई अच्छा लगा ये जानकार कि आप दूसरों के ब्लॉग भी पढ़ते हो.
शुभकामनाओं सहित.

Tarkeshwar Giri said...

मनोज जी बहुत बढ़िया लिखा है आपने, इतनी ब्यस्त जिंदगी में से समय निकाल पाना बहुत मुश्किल है. मैंने भी सुना है हैदराबाद के टेस्ट के बारे मैं, कभी उधर जाने का मौका मिला तो जरुर स्वाद का आन्नद लेंगे. बाकि आप जैसे सेलेब्रिटी लोग अगर ब्लॉग पर आते रहें तो ब्लॉग पढने और लिखने का मजा दोगुना हो जाता है. कभी मौका मिले तो इस नाचीज का ब्लॉग भी पढियेगा. www.taarkeshwargiri.blogspot.com

राजीव तनेजा said...

बढिया लगा जान कर कि आप दूसरों के ब्लॉग भी पढते हैँ

बी एस पाबला said...

सिर्फ हमारे?
आधी दुनिया नाराज़ हो जायेगी :-)

डॉ. मनोज मिश्र said...

अच्छा लगा .

शिवम् मिश्रा said...

मनोज भैया प्रणाम |
आप का ब्लॉग पढ़ा, यह जान बहुत ख़ुशी हुयी कि आप अपने इतने व्यस्त जीवन में से भी कुछ समय ज़िन्दगी के तमाम पहेलुओ पर अपनी बेबाक राय देने के लिए निकाल ही लेते है | इस आदत को बनाये रखना येही इस छोटे भाई कि विनती है |
शेष सब कुशल होगा एसी आशा है | मेरी शुभकामनाये आपको और आपके परिवार को |
आपका
शिवम् मिश्रा
मैनपुरी , उत्तर प्रदेश

शरद कोकास said...

वाह मनोज भैया.. आज पहली बार आपका ब्लॉग देखा .वैसे तो हम फिल्मी सितारो के प्रभाव से वैसे ही आतंकित रहते है लेकिन आपका ब्लोग देखकर ऐसा लगा आप अपने ही बीच के हैं .अच्छी भाषा और अच्छे विचार . फिलहाल इतना ही आगे फिर कभी विस्तृत टिप्पणी करूंगा ; शरद कोकास http://kavikokas.blogspot.com

अनिल कान्त : said...

आपने बिल्कुल सही कहा माइकल जैक्सन जैसा सितारा इतनी आसानी से नहीं चमकता....और रही बात क्षेत्रवाद, जातिवाद या किसी अन्य वाद कि तो वास सरासर गलत ही है...हम सिर्फ और सिर्फ भारतीय हैं.

आपने जिस तरह से हैदराबाद के बारे में बताया वह अच्छा लगा. मैं एक बार इंटरव्यू के सिलसिले में हैदराबाद गया था. उस समय मैंने वहाँ कि बिरयानी का स्वाद चखा था...अबकी बार जब कभी भी जाना हुआ तो आपके बताये हुए स्थान पर अवश्य जाऊंगा.

आपकी फिल्मों की मुझे प्रतीक्षा रहती है...आपकी मैंने लगभग हर फिल्म देखी है और मैं जेल फिल्म भी अवश्य देखूंगा.

आपका प्रशंसक
अनिल कान्त
Blog: http://meraapnajahaan.blogspot.com/

विनीता यशस्वी said...

Yah jaan ker achha laga ki aap dusro ke blog bhi parne ki liye time nikal lete hai...

waise apne M.J. ke liye jo kaha hai use to mai bhi sahi manti hu...unse bara sitara to shayad ab hoga bhi nahi...

Gaurav Pandey said...

manoj ji if i am not mistaken, your first appearance on screen was SUNO RE KISSA with rituraj and some female artist, to be frank when I watched that I knew that you are a fantastic actor and I thought the same about Rituraj as well. It is good to see that you made it so big but somehow I always failed to figure out as why Rituraj disappeares without making any mark. And once I saw you at American embassy and I tried to speak to you as well but you did not want attention at that time.

Finally, you write really good, it is nice to read your thoughts.

Yayaver said...

कभी सोचा नही था की आप मेरे जेसे साधारण व्यक्ति के कॉमेंट को पड़ते भी होंगे, नाम पे गौर फरमाना तो दूर के बात है. हम तो अपनी दिल के बात बयान कर देते थे. आपके द्वारा अपना नाम अक्षरों में देख कर मन हर्षित हो गया
धन्यवाद. हम तो आपके मुरीद हैं और रहेंगे. तब तक के लिए स्लाम नमस्ते.

अंशुमाली रस्तोगी said...

आप महान काम करते हैं।

कंचन सिंह चौहान said...

aap jaise log jab seedhi baat karte haiN to achchha lagta hai....! aur apni pasand par garva..! :) Best of luck

anjule shyam said...

jindgi dhup aur chanh ke bich jhulti rahti hai.koi bhi mahan aadmi rahaho chahe wah ghandi ji ho,bhagat singh ho,ya koi filmi sitara ya maicail jachan,har kisi ki jindgi men prashnsko ki kabhi sarahna mili to kabhi aalochna.ye to us hasti ke marne ke badhi pata chalta hai ki log use dil se kitna chahte thi....

anjule shyam maurya
+919990747609
delhi

pukhraaj said...

मनोज जी , जनवरी मे मुझे एक कॉन्फ्रेंस मे हैद्रबाद आना है , वहाँ के बारे मे और कुछ बताइए ...जिससे की हम इस खूबसूरत शहर को अच्छी तरह से देख सकें , जान सकें....

Pankaj Mishra said...

bahut badiya manoj bhai
aapki aane wali dono filmo ka besabri se intzar hai.

प्रवीण जाखड़ said...

मनोज जी,
न कोई छोटा होता है न कोई बड़ा। विचार, सोच, प्रतिक्रियाएं, भावनाएं और एहसास जोड़ते हैं। इसीलिए लोग, हम, सब जो आपके चाहने वाले भी हैं आपसे जुड़ रहे हैं।
स्वाभाविक प्रक्रिया है आपके पाठकों की कि आप हमारे, उनके ब्लॉग भी पढ़ते हैं या नहीं। आखिर कोई आप तक आ रहा है, तो आप उन तक पहुंचें। जरा सा समय निकाल कर ही।
मेरा कई फिल्मी सितारों से मिलना हुआ। लेकिन जमीन से जुड़े लोग ही जुड़ पाए। वैसे भी आजकल किसे फर्क पड़ता है। न आपको, न मुझे। इसीलिए जहां मन लग जाए, वहीं जुडऩे का मन करने लगता है। आपके विचारों में जमीन का जुड़ाव नजर आता है, यही वजह है हम भी आपके ब्लॉग तक आ जाते हैं। वैसे जिन भाईयों ने शिकायत की मुझे लगता है बिलकुल वाजिब थी। आपकी टिप्पणी जब हम ब्लॉगर्स के टिप्पणी बॉक्स में देखेंगे, तो मान जाएंगे कि आप जो कह रहे हो, कर भी रहे हो। देखते हैं।

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

श्री मनोजजी
अच्छी बातो का जनता हमेसा स्वगत करती है, जी!
आभार/मगलभावनाओ के सहीत
हे प्रभू यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगर

विक्षुब्ध सागर said...

आसमान छूना बड़ी बात है ..लेकिन उससे भी बड़ी बात है आसमान छूते हुए अपने क़दमों को ज़मीन पर टिकाये रखना ....आपकी बात पड़कर सुखद अनुभूतियाँ होतीं हैं ....! इसी तरह ज़मीन से जुड़े रहिएगा !

शुभकामनायें !

आदर्श राठौर said...

मनोज भाई
इससे अच्छी बात क्या हो सकती है कि आप हिन्दी में लिखते हैं। मुझे बहुत खुशी हुई थी आपका ब्लॉग देखकर। मेरा आदर्श अभिनेता हिन्दी में ही लिखता है।

राकेश सिंह said...

मनोज जी आपको हिन्दी ब्लॉग पे देखकर एक सुखद अनुभूती हुई | बढ़िया लिख रहे हैं आप, अपनी लेखनी की यात्रा को जारी रखियेगा |

आपका ब्लॉग हिंदी ओर अंगरेजी दोनों मैं देख कर, एक सवाल पुछू? आपकी हिन्दी ओर अंगरेजी दोनों ब्लॉग मैं कौन सी मौलिक है ओर कौन रूपांतरित (translated) ?

indian12345 said...

manaj bhaiya parnam

'अदा' said...

मनोज जी,
आप शायद अपनी तारीफ सुन-सुन कर थक चुके होंगे, इसलिए तारीफ नहीं करेंगे, यह
भी पढ़े की आप दूसरों का ब्लॉग भी पढ़ते हैं, तो हमारा ब्लॉग पढ़ कर दिखाइए, पर खोजना पड़ेगा आपको, हम लिंक-विंक नहीं देंगे, वैसे अगर नहीं पढेंगे तो आपका कुछ नहीं जाएगा, बस हम वंचित रह जायेंगे आपके इलेक्ट्रोनिक दर्शन से...
आपके जैसे जिद्दी हैं हम भी, बिहारे का पानी है....
एक पंखा.... बहुते बड़ा.....
'अदा'

Chandan said...

namaskaar manoj ji... me aap ka fan hu.. shool se baad se..

creativekona said...

आदरणीय मनोज जी ,
यह पढ़ कर अच्छा लगा की आप समय निकालकर ब्लोग्स पढ़ते हैं .फिल्मं की व्यस्तताओं के बीच इतना समय निकल पाना कितना मुश्किल होता होगा ....ये तो हर पाठक को समझना चाहिए....आपकी नयी पोस्ट के इंतजार और शुभकामनाओं के साथ .
हेमंत कुमार

mahashakti said...

टिप्‍पणीकरों के नाम लेने से काफी टिप्‍पणी आ गई, आज कल पढ़ नही पा रहा हूँ, कभी टिवी पर आपकी कोई फिल्म आई तो जरूर देखूँगा।

अविनाश वाचस्पति said...

ब्‍लॉग पढ़ना तो अच्‍छी बात है
पर सिर्फ लिखते नहीं
यह क्‍यों स्‍वीकार लिया
यह तो पहले से ही चर्चा में है
कि फिल्‍म वाले अपने ब्‍लॉग
लिखवाते हैं

वैसे आप यहां भी मौजूद हैं
http://avinashvachaspati.blogspot.com/

संध्या आर्य said...

मनोज जी
बहुत बहुत शुक्रिया इसलिये की आप आपने विचारो को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से रखते है जिसमे कही एक विचार भी होता है, तो कही एक बह्स का मुद्दा भी और समस्या का समाधान भी बातो या विचारो के गहराई मे छुपी होती है .जो थोडा व्यक्तिगत्त है तो कही समष्टिगत भी .
आप ऐसे ही लिखते रहे और समस्याओ को हमसे जोड्ते रहे, चर्चाये जारी रहे ....

Harsh said...

yah jaankar bahut achcha laga aap doosro ke blog bhee padte rahte hai......

Aparna said...

नमस्कार मनोज जी,आपका ब्लाग देख कर अच्छा लगा...कम से कम आप लिख रहे है और बड़ी बात ये कि मुद्दे उठा रहे हैं...पोस्ट अच्छी है...पर थोड़ी बिखरी हुई है...हालाकि सौ प्रतिशत मौलिक है...क्योकिं ज़हन में विचार बिखरे हुऐ ही आते हैं...तो आपकी मौलिकता को सलाम...लेकिन इनको समेटना भी जरूरी है...ताकि सवाल एक फ्रेम में खड़े किए जा सके है

rgds
अपर्णा

RAMANUJ DUBEY said...

achhi bat bhai manoj bhaiya aap dusro ka bhi blog padte ho..........mera kab padoge.........

Dr. said...

भाई मनोज जी मान गये आपकी लेखन प्रतिभा को | क्या लिखते हो यार ? एक दम बेबाकी से और दिल को छू जाने वाला |

अभिनेता तो खैर गजब के हो ही वो तो सब जानते भी है और मानते भी | पर इतना अच्छा लिखते हो यह तो मुझे भी नही पता था | ये तो चान्स की बात है की आज यकायक ही तुम्हारा ब्लॉग सामने आ गया |

फिर क्या था सब पढ़ लिया आद्योपांत | और तो और बी बी सी पर भी तुम्हारे कुछ पुराने पोस्ट थे वो भी पढ़ डाले | पर मेरे भाई एक निवेदन है कि ज़रा जल्दी जल्दी लिखा करो | पंद्रह बीस दिनों में एक बार लिखते हो तो प्यास और बढ़ जाती है |
मुझे पूरा विश्वास है कि तुम्हारी आने वाली फिल्में बहुत कामयाब होंगी |

तुम्हारी सफलता की कामना और प्रार्थना तो खैर हमेशा से ही हम सब मित्र करते ही रहे है | तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी की तुमने रामू की सही उतार दी | इस आदमी की खुशकिस्मती थी कि इसे अनुराग और उस जैसे बहुत प्रतिभावान लोग मिल गये पर इसका मतलब ये तो कतई नही कि तुम स्साले दुनिया को डंडा ही कर दो |

फिल्म इंडस्ट्री में आज तक किसी की हिम्मत नही हुई उसके सामने खड़े होकर बोलने की | सब बस तलूए ही चाटते है सुना है | तुम इंडस्ट्री में हो तो खालिस अपने बूते पर | सब जानते है कि न तो तुम्हारा कोई गॉड फादर है और ना ही कोई मेंटर | बस ऐसे ही बने रहो | बहुत नाम मिलने वाला है | अभी तो कुछ भी नही हुआ , वो कि जिसके लायक तुम हो | जिन लोगों ने तुम्हारी लगन, प्रतिभा, मेहनत और जुनून दिल्ली के थियेटर के दिनों में देखा है, वो समझते है मेरा मन्तव्य क्या है |

ड़ा दिनेश शर्मा

रश्मि प्रभा... said...

बहुत अच्छा लगा आपको पढना, मैं भी लिखती हूँ, ख़ुशी होगी यदि आप पढें और कुछ कह जाएँ....

उसका सच said...

मनोज जी,
राजनीति तो जरूर देखेंगे...दरअसल बिहार राजनीति के लिए ही फेमस है. यहाँ महिला के चीरहरण पर भी राजनीति शुरू हो जाती है. वैसे हमारा ब्लॉग 'उसका सच' ऐसे ही सच की तलाश में लगा है..आशा है राजनीति, गंगाजल के माफिक होगा...

आपका ही
सौरभ के.स्वतंत्र

रश्मि प्रभा... said...

filmen apni jagah hain,aapke likhne ka andaaj apni jagah........

Aryaan rai said...

मनोज भैया , गोड लागतानी । राउर हिंदी ब्लाग पढ के मन खुश हो गईल । भइया हमरा आज भी उ दिन याद बा जब Z TV बालन "जीना इसी का नाम है" कार्यक्रम के खातिर K.R.H.S BETTIAH मे आइल रहे लोग । तब से हमहु गर्व से कहे नी कि जवना स्कुल से मनोज भैया पढेले बानी . हमहु उहे स्कुल के student रह चुकल बानी । 2007 के matric परीक्षा मे हम K.R के तरफ से पुरा जिला मे TOP कईले रहनी ।

भइया रउरा बेतिया नइखे आवे का । रउरा से मिले के हमार बहुत पुरान तमन्ना बा ।
रउरा हमरा या K.R COMMUNITY के ORKUT पे देख सकतानी . SEARCH on orkut - Rupesh rai bettiah,kota

रउरा जबाब के इँतजार मे ,
रुपेश राय , बेतिया
कोटा (राजस्थान)

नदीम अख़्तर said...

मनोज जी मैं चाहता हूं कि आप विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र यानी सेज़ (एसईजेड) पर अपनी राय दें। आप सेज़ की अवधारणा और भूमि अधिग्रहण के मसले से भरे गरीब राज्यों पर क्या नज़रिया रखते हैं। अगर आप अपनी राय सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं, तो भी कोई दिक्कत नहीं, केवल मेरे मेल nadeemjagran@gmail.com पर ही फुर्सत निकाल कर एक चिट्ठी भेजिये। शेष अवशेष।
रांचीहल्ला

Manoj Bharti said...

मनोज बाजपेयी जी !

प्रणाम !!!

माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि से लेकर एसिड फैक्ट्री, जेल और राजनीति आपकी आने वाली फिल्मों तक सब कुछ पढ़ गया ।

अच्छा लगा कि अब भी आप आम आदमी की तरह जीवन जीते हैं और संस्कृति की चिंता करते हैं । आम लोगों की फिक्र करते हैं ।

हैदराबाद के खाने का स्वाद लेकर उसे हमारे साथ बांटने के लिए धन्यवाद ।

मनोज भारती

Mithilesh dubey said...

ji accha laga janke ki aap blog padhte bhi hai

Pramod Tambat said...

हाँ तो बाजपेई जी लीजिए हमारा भी ब्लॉग पढ़ डालिए। यह शुद्ध व्यंग्य का ब्लॉग है। कोई कमेन्ट देंगे तो बड़ी खुशी होगी।

प्रमोद ताम्बट
भोपाल
www.vyangya.blog.co.in