Wednesday, August 12, 2009

बाप रे बाप...स्वाइन फ्लू...

स्वाइन फ्लू। स्वाइन फ्लू । स्वाइन फ्लू। स्वाइन फ्लू। चारों तरफ यही हाहाकार मचा हुआ है। डरने के बावजूद भी मास्क नहीं मिल रहे हैं। कोई आयुर्वेदिक दवाइयों की लिस्ट भेज रहा है तो कोई होम्यौपेथी की लिस्ट भेज रहा है-अपने अपने चहेतों को। सब के सब एक दूसरे को लेकर फिक्रमंद हैं।

इतने सारे सामाचार, इतने सारे संदेश- अब हर पल लोगों को चिंता में डाले जा रहे हैं। कहीं हमें न हो जाए ये बीमारी- सभी यही सोच रहे हैं। माथा गर्म है तो स्वाइन फ्लू होगा। पैर में दर्द है तो शायद स्वाइन फ्लू हो सकता है। हर तरफ इसी तरह की बेचैनी नजर आ रही है। सरकार अगर निजी हॉस्पीटल को ये अधिकार दे दे कि वो स्वाइन प्लू का टेस्ट कर सकते हैं, उनका इलाज कर सकते हैं और उनकी कड़ी निगरानी रखना शुरु कर दे तो मेरा मानना है कि आधे से ज्यादा लोगों की मन की परेशानी दूर हो सकती है। हर न्यूज चैनल पर लोगों को लंबी लंबी लाइनों में खड़ा देखकर मैं ही नहीं, हर कोई घबरा रहा है। ऐसा लगता है कि अगर उनमें से किसी को ये बीमारी लग गई तो टेस्ट होते होते ही उसकी जान जा सकती है।

खैर, यह मेरे मन की बात। मैं तेलुगु फिल्म की शूटिंग कर रहा था, उसका शिड्यूल कैंसल हो गया है। और इन दस दिनों के लिए शायद घर पर ही रखना पड़े। बाकी अभिनेताओं की तारीख की समस्या आन पड़ी है। हमारे पेशे में ऐसा अक्सर होता रहता है। ‘राजनीति’ की शूटिंग की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। इसे लेकर प्रकाश झा जी से एक मुलाकात हो चुकी है। कल फिर मिलने जाऊंगा। अभी मैंने अपनी एनिमेशन फिल्म ‘रामायण’ की बची घुची डबिंग खत्म की है। लेकिन,घर लौटकर जैसे ही टीवी खोला, वही स्वाइन प्लू की खबर देखने को मिली।

मेरे मित्र विशाल भारद्वाज की फिल्म रीलिज हो रही है-कमीने । उसे देखने हॉल में जरुर जाऊंगा। लेकिन, साथ में इतने लोगों के संपर्क में आने का डर भी बना हुआ है। लोगों से डर नहीं है। स्वाइन फ्लू से है। फिर भी एक जागरुक व्यक्ति होने के नाते मैं अपने मन को समझा रहा हूं कि बस सावधानी बरतनी है। लेकिन, ‘कमीने’ तो देखने जरुर ही जाऊंगा क्योंकि विशाल की फिल्में मुझे अच्छी लगती हैं।

इसी के साथ
आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

25 comments:

Chhayajolly said...

sir aapke views hamesha se hi bade interesting lagte hai . i m reading ur blog first time on the net, but earlier i used to read it in amar ujala. so we all r waiting ur movie RAJNITI eagerly best of luck

अर्शिया अली said...

Bach ke rahnaa.
{ Treasurer-S, T }

Gajraj Rao said...

Hummmmm....

शिवम् मिश्रा said...

मनोज भइया ,
प्रणाम !
चलो कुछ दिन की ही सही आपको छुट्टी तो मिली |
वैसे छुट्टी का भी अपना एक अलग ही आनंद है खास कर तब जब परिवार साथ हो |
यह फुर्सत के चंद लम्हे आप को बहुत बहुत मुबारक हो |
विशाल भारद्वाज जी का मैं भी एक फेन हूँ , उनकी हर फ़िल्म बहुत अज़ीज़ है | 'कमीने' के लिए मेरी भी उनको व उनकी टीम को हार्दिक शुभकामनाये |
रामायण में आप ने कौन से किरदार की डबिंग की है ? यह कब तक देखने को मिलेगी ?
आशा है जवाब जल्दी मिलेगा |
शेष शुभ |
और हाँ 'स्वाइन फ्लू' से जरूर बचे |
शुभकामनायों सहित
आपका अनुज
शिवम् मिश्रा
मैनपुरी, उत्तर प्रदेश

शिवम् मिश्रा said...

ऑरकुट पे आप को add करने की हिम्मत की है आशा है आप का साथ वहाँ भी मिलेगा |

Ram-Krishna said...

Dear Manoj ji,
Hi!
Bahut dino ke baad aap ne blog ko update kiya hai.....! Aap ke lekh ko padha....Swine flu ke bahane bhagambhag ki jindagi me thoda aaram karne ke liye samay mila....!! Waise bhi is flu se darne ki jarurat nahi hai, agar jarurat hai toh apne sharir(body) ko chust, durust aur tandarust rakhne ki.Jiska body n mind fit hai unpe in bimariyon ka koi effect nahi hota. So, its time to take complete rest and write something very creative article!!
Bahut sari subhekshao ke saath, Aap ka anuj,

Dr rer nat Ram-Krishna Thakur
Sr Scientist (Nano-Tech/Physics)
HK Univ of Sc & Tech,Hong Kong
ramkrish@ust.hk

RAMANUJ DUBEY said...

kya manoj bhaiya..........aap bhi swine flu............oh god.........ye swine flu to har jagah aapna atank banate ja raha hai.........

ओम आर्य said...

aap apana khyal rakhe ..........aapaka post padhkar achchha laga..........

Aryaan rai said...

manoj bhaiya hamke raur "RAJNITI" KE AAJ SE HI INTJAAR BA. OKRA BARE ME EK EK KHABAR KE JANKARI RAKHENI. RAURA SAFLTA KE KAMNA KE SATH......, AGAR KABHI SAMAY HOKHE T HAMAR PURE BHOJPURIYA BLOG PE BHI AAYI " BHOJPURIAAEHSAS.BLOGSPOT.COM". RAURA KE K.R ME DEKHE KE DIL CHAH RAHAL BA.

Aryaan rai said...

bhiya aap orkut pe hai then aap mere orkut " rupesh rai bettiah/kota" pe search karke K.R ki community choin kar sakte hai.

गिरिजेश राव said...

देखिए ये जो सुअरा रोग है, वह आराम करने से ठीक हो जाता है। इसका उल्टा भी सच है। मतलब आराम करते रहने से सुअरा नहीं होता है।

राजनीति और आराम में 36 का सम्बन्ध है। इसलिए थोड़े दिन गोली दागने, मेरा मतलब शूटिंग करने से दूर ही रहें तो बेहतर है।

सूअर बहुत कमीना जीव होता है। इसकी चर्चा ब्लॉग जगत में शायद कल ही शुरू हुई है। लिहाजा सुअरा की सम्भावना 'कमीने' में भी होगी। इसलिए फिल्म देखना भी मुल्तवी रखें। कमीने इस संसार में हमेशा मिलेंगे। फिल्म तो बहुत छोटी चीज है उसकी फिकर न करें।

अब अगर मेरी सलाह मान कर आराम करना सोच ही लिए हैं तो आराम को और 'आरामप्रद' कैसे बनाया जाय, इसके लिए मेरे ब्लॉग पर आएँ। मध्यम वर्गी हिट फॉर्मूला मिलेगा। थोड़ा अदल बदल कर आप भी आराम की मात्रा बढ़ा लीजिएगा। मेरे यहाँ कमेंट करना कोई जरूरी नहीं है सो आने से न घबराएँ।

गिरिजेश राव said...

'बाप से बाप' है कि 'बाप रे बाप'?
बाप से बाप शायद आप की अगली फिल्म का नाम है। अग्रिम प्रचार का बड़ा ओरज्नल आयडिया लगाए हैं। मान गए वस्ताद।

सतीश पंचम said...

एतना नहीं न सोचिये महराज। हम तो देखे कि लईका लोग रूमाल का खिलौना बनाकर मजाक कर रहे थे और एक दूसरे को स्वाईन कुमार कहकर चिढा रहे थे।
इसी से सीख लेने की जरूरत है। वैसे Precaution तो लेना ही चाहिये।

dr. ashok priyaranjan said...

nice post.

http://www.ashokvichar.blogspot.com

भूतनाथ said...

मनोज भाई......दरअसल यह भी एक विदेशी माल है....और विदेशी मीडिया द्वारा बड़े ही रोमांचक ढंग से फैलाया जाता है....दरअसल विदेश से आई हुई हर इक चीज़ इस देश में किसी फ्लू की तरह फ़ैल जाती है.....दरअसल इस तरह से फ़ैल जाने पर ही तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के टीके,दवाईयां और अन्य प्रकार की सामग्री धडाधड मनमाने दामों में बिक जाती है...इस प्रकार हम देखेंगे की कैसे यकायक बीमारियां इजाद होती हैं....उनकी दवाईयां (जो शायद अभी प्रायोगिक स्तर पर ही हैं....!!)बन्दूक की गोलियों की तरह दनादन ख़त्म होती चली जाती हैं....उनका परीक्षण भी हो जाता है....और बेचना भी.....इसे ही कहते हैं....आमों के आम-गुठलियों के दाम......हा..हा..हा..हा..हा..किन्तु आप तनिक भी चिंता ना करें....ऐसा चला आ रहा है....ऐसा चलता ही रहेगा....कुछ लोग बेशक मर जाएँ....मगर इसीकी बिना पर तो कुछ लोग जिन्दा रहेंगे.....मालामाल बनेंगे...ऐश-मौज भोगेंगे....हा..हा..हा..हा..हा..!!

अनिल कान्त : said...

आपने सही कहा हो हल्ला ज्यादा मचा रहे हैं...

बाकी 'कमीने' तो मैं भी देखने जाऊंगा...क्योंकि यह विशाल भारद्वाज और शाहिद की फिल्म है

प्रवीण जाखड़ said...

मनोज भाई साहब बचके रहिएगा स्वाइन फ्लू से। चलिए आप छुट्टियां मनाइए। अच्छा है आपको रिलैक्स होने का अवसर मिला है। ...लेकि जाते-जाते आपने अपने दोस्त विशाल की फिल्म का प्रमोशन कर ही डाला। अब हमें भी देखनी ही पड़ेगी।

मनोज भाई आपकी टिप्पणी अभी भी किसी ब्लॉग पर देखने को नहीं मिली है। उम्मीद है इन छुट्टियों में आपके टिप्पणिकारों की इस जिज्ञासा को शांत करते हुए आप कुछ ब्लॉग्स पर टिप्पणियां जरूर देंगे।

mk said...

Manoj Ji,
Jai Shri Krishna.

AApne likha hai ki— SWAYAN FLU chaaron or phail raha hai. Bilkul sahi baat hai. Lekin sochane ki baat yah hai ki aisa kyon ho raha hai ?

Sach to yah hai ki-- jab is DHARTI par kuch galat hota hai to PRAKTI MATA kisi-na-kisi tarike se uskaa pratikaar karti hai. Jara dekhiye to sahi -- is DHARTI par kitna kuch galat ho raha hai—
1- Lagatar badti hui jansankhya—Puri DHARTI par 6 Arab ( 6,00,00,00,000 ) se bhi jyada log hain. Akele hamaare Bharat Desh mein hi 1 Arab 20 Karod ( 1,20,00,00,000 ) se jyada log hai.
2- Pedo (Trees) ki lagatar katai hona.
3- Prakartik sansadhno ka lagatar vidohan hona.
4- Jamin me se lagatar pani ka vidohan karna.
5- Jamin ko khokhalaa kar dena. Hamaare desh ki rajdhani Nai Delhi ki jamin puri tarah se khokhali ho chuki hai. Pani ki line, Gas ki line, Metro — in sabke liye jamin ko puri tarah khokhala kar diya gaya hai.

Is prakar ke anya kaaran bhi hain. Kul milakar kahna yah hai ki – Manav jis prakar ka vyavahaar DHARTI MATA ke saath mein karta hai, usi prakar ka pratiphal Manav ko milta hai.

Jab DHARTI par kuch galat hota hai to PRAKTI MATA tin prakar se uska pratikaar kar sakti hai------
1- Prakartik Aapdaon ke dwara. Jaise –- Bhukamp, Baad, Sukhaa, Sunaami aadi.
2- Bimaariyon ke dwara. Jaise –- Haija, Pleg, Chechak aadi. Jab Maanav ne in bimaariyon ke liye davaayen bana li to ab SWAYAN FLU.
3- Yudh ke dwara. Jaise –- Pratham vishwa yudh, Dwitiy vishwa yudh aadi.

In sabhi tariko ke dwara bahut badi sankhya mein log maare jaate hain. In tariko ke maadhyam se PRAKTI MATA sabhi Maanvon ko chetavani deti hai ki – sudhar jaao lekin maanav sudharta nahi hai.

Mein Mathura me rahata hoon. Yahan par bhagwaan Shri Krishan ka janm huaa tha. Inhi bhagwaan Shri Krishan ke saamne MAHABHARAT ka yudh huaa jisme lakhon log maare gaye. Lekin bhagwaan Shri Krishan ne MAHABHARAT ke yudh me kisi ko nahi maara, balki unhone to shastra naa uthaane ke pratigya ki thi. Lekin phir bhi vah yudh ko rok nahi paaye. Iska karan bhi yahi tha ki jab DHARTI par kuch galat hota hai to PRAKTI MATA uska pratikaar karti hi hai aur bhagvan bhi usko rok nahi sakte hain.

Isliye jaroori yeh hai ki Maanav apni galtiyon ko sudhaare.

Aapne likha hai ki aapke mitr ne film banaai hai -- Kaminey. Jara apne mitr se kahna ki apni film ka naam kuch achchhaa saa rakhta. Is prakar ke naamo se hamaare desh ke chavi kharaab hoti hai.

Shubhkaamnayen.

Mukul Goyal Advocate
Mathura (U.P.)

Date : 13 August 2009

E-Mail : mukulgoyalmtr@gmail.com
Website : www.rojgarprakashan.com

pukhraaj said...

जाको रखे साईयाँ मार सके ना कोय ....फिर डरना कैसा

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

आप की बात एकदम सही है....विचारोत्तेजक और सोचने को मजबूर करता बहुत अच्छा लेख....बहुत बहुत बधाई....विशाल की फिल्में मुझे भी अच्छी लगती हैं...
मनोज जी,आप की अभिनय-कला के बारे में तो सारी दुनिया जानती है ,पर आप हमारे बारे में क्य जानते हैं......सीधा सा उपाय है...आप का मेरे ब्लाग पर स्वागत है.बस;बाकी वहीं पर... my blogs are-मेरी ग़ज़ल/प्रसन्नवदनचतुर्वेदी,
रोमांटिक रचनाएं और
मेरे गीत/प्रसन्नवदनचतुर्वेदी

sweet_dream said...

मनोज जी
अच्छा लिखते है
आगे लिखते रहे हम इंतजार में है

Deepak said...

Manoj ji! Namskar Aaj pahli bar apka koi bhi blog padha......yakin nahi huaa mujhe ki ye aap hi hai....Manoj Ji! mai apka bahut hi jabardast fan hu......Miane apki film Shool dekhi haiaur ha ek aur film ka jikra karna chahunga....AKS usme akpi performance dekhkar to bilkul maza hi aa gaya.......Swine Flu se bachkar rahiyega........waiase ye kuchh jyada hi badha cadha kar ke dikhaya gaya hai...

गिरीन्द्र नाथ झा said...

मनोज जी,
नमस्कार।

मैं गिरीन्द्र, पेशे से पत्रकार हूं। समाचार एजेंसी- इंडो-एशियन न्यूज सिवर्स (आईएएनएस) में काम कर रहा हूं। मैं हिंदी ब्लॉगिंग में बॉलीवुड के प्रवेश पर आपसे बात करना चाहता हूं। क्योंकि मेरी समझ से आप ही एक मात्र अभिनेता हैं जो हिंदी में ब्लॉगिंग कर रहे हैं। आशा है कि आप मेरा अनुरोध स्वीकर करेंगे। मैं मेल के जरिए भी आपसे बात कर सकता हूं, मेरा मेल आईडी है- girindra.j@ians.in मुझे खुशी होगी यदि आपकी ओर से प्रतिक्रिया मिले।
गिरीन्द्र
09868086126

अजय कुमार झा said...

का मनोज भाई..कहां हैं..इतना दिन से एक दम गायब हो गये हैं..बीच बीच में लिखा किजीये..सबको इन्तजार रहता है...

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

मनोज जी! नमस्कार,
आप से सच कहूँ तो ब्लाग ने एक ऐसा प्लेटफार्म दिया है जहाँ हम बेबाकी से अपनी राय दे सकते हैं,अपने दोस्तों से बात कर सकते हैं।आप ने भी ये महसूस किया होगा...है न...आप की पोस्ट पहले की तरह ही रोचक है...बहुत बहुत बधाई.....

आप को अपने ब्लाग पर प्रकाशित एक ग़ज़ल भेज रहा हूँ...आशा है आपको पसन्द आयेगी.....

बात करते हैं हम मुहब्बत की,और हम नफ़रतों में जीते हैं ।
खामियाँ गैर की बताते हैं ,खुद बुरी आदतों में जीते हैं ।

सबको आगे आगे जाना है,तेज रफ़्तार जिन्दगी की हुई;
भागते दौड़ते जमाने में, हम बडी़ फ़ुरसतों में जीते हैं ।

आज तो ग़म है बेबसी भी है,जिन्दगी कट रही है मुश्किल से;
आने वाला पल अच्छा होगा , हम इन्हीं हसरतों में जीते हैं ।

आज के दौर मे जीना है कठिन,और मरना बडा़ आसान हुआ;
कामयाबी बडी़ हमारी है , जो ऐसी हालतों में जीते हैं ।

मिट्टी लगती है जो भी चीज मिली,जो भी पाया नहीं वो सोना लगा;
जो हमें चीज मिल नहीं सकती ,हम उन्हीं चाहतों में जीते हैं ।