Tuesday, October 13, 2009

वोट न डालने का अफसोस है

‘एसिड़ फैक्ट्री’ का प्रदर्शन हो चुका है। मेरे अभिनय की लोग तारीफ कर रहे हैं। अच्छा लग रहा है कि मेहनत सफल हुई। दुख इस बात का है कि जिसके ऊपर फिल्म के प्रचार की जिम्मेदारी थी, वो अपना काम पूरा नहीं कर पाए। अमूमन संजय गुप्ता की फिल्में ठीक तरीके से दर्शकों तक पहुंचा दी जाती है। संजय गुप्ता को इस काम में महारथ हासिल है। लेकिन चूंकि इस बार फिल्म किसी और ने खरीद ली थी और इसके प्रमोशन की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति के हाथों पर थी और हम सब एक असहाय दर्शक की भांति अपने ही बनाए गए काम को धराशायी होते देखते रहे।

ऐसा ही मेरी एक फिल्म ‘1971’ के साथ 2007 में हुआ था। और इस साल उसी फिल्म को बेस्ट हिन्दी फीचर फिल्म-2007 का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया। दुख इस बात का है कि ‘एसिड़ फैक्ट्री’ एक मनोरंजक फिल्म है और इससे दर्शकों को अवगत होना चाहिए। लेकिन फिर वही गलती दोहराई गई। बहुत दुखी हूं ये सोचकर कि इतनी मेहनत का फिर क्या फायदा। स्वाभाविक है मेरा दुखी होना। फिर भी, मैं अपने दोस्तों से कहूंगा कि एसिड फैक्ट्री को देखें। ये एक मनोरंजक फिल्म है,जो आपको हंसाएगी और रोमांचित करेगी।

पूरे महाराष्ट्र ने वोट डाला। मैं चूंकि हैदराबाद में शूटिंग कर रहा हूं इसलिए अपने इस अधिकार का उपयोग नहीं कर पाया। और वैसे भी वोटर लिस्ट में दो दो बार रजिस्ट्रेशन करा चुका है लेकिन अभी तक न तो मेरे पास वोटर कार्ड है, और न ही ऐसी कोई खबर है। लेकिन, इस बार मुंबई में हूं नहीं तो पता नहीं कर पाया कि मेरा लिस्ट में नाम है कि नहीं। हां आईडी नहीं मिला है ये तो पता है मुझे।

आशा करता हूं कि इस इस बार जनता ने सोच समझकर अपने प्रतिनिधि का चुनाव किया होगा। ताकि उसे पांच साल तक पछताना न पड़े। अगली बार विस्तृत पोस्ट लिखूंगा।

इसी के साथ
आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

12 comments:

सैयद | Syed said...

आपके अपनी फिल्म के लिए शुभकामनाएं.... हालाँकि अभी तक ये मूवी देख नहीं पाया... पर देखने की दिली ख्वाहिश है... इस सन्डे देखते है.... यकीनन बेहतर ही होगी...

शिवम् मिश्रा said...

मनोज भैया,
प्रणाम!
सब से पहेले माफ़ी चाहता हूँ कि आप की ‘एसिड़ फैक्ट्री’ अभी तक नहीं देख पाया हूँ, कारण मैनपुरी में अभी तक नहीं आई है किसी भी सिनेमा हाल में ! अब अगर आप कहे तो डीवीडी में देख सकता हूँ .......मालूम है आप एसा नहीं कहोगे !
खैर, इंतज़ार का फल मीठा होता है !
जैसा कि आप ने लिखा कि आपको अब तक वोटर कार्ड नहीं मिला है तो यह कोई अचरज की बात नहीं है ! आज भी भारत के लाखो वोटरों के पास कार्ड नहीं है केवल सरकारी ढील के कारण ! वैसे भी हम लोग वोट देते कुछ सोच कर है और होता कुछ है ! वोटरों के साथ तो हमेशा ही धोखा होता रहा है ! जब किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो ४ पार्टियों से मिल कर मिलीजुली सरकार बना ली.....कहाँ गया जनादेश ? बस अपने दिल को तसल्ली देने को हम भी वोट दे तो देते है पर सच कहे तो एक बार तो इस पूरे सिस्टम पर शक होता है ! राज बब्बर क्या यूँ ही हार गए ?? चिताम्बरम तो हार चुके थे फ़िर जीते कैसे ?? कोई है जवाब देने वाला ?? नहीं ...!!
सब को सब कुछ मालूम है पर फ़िर भी कोई कुछ नहीं कर सकता, क्यों कि हम प्रजा है और वो राजा !!
खैर भाई साहब, जाने दीजिए!!

आपको और आपके परिवार को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

आप अपना ख्याल रखियेगा !
शेष शुभ |

आपका अनुज
शिवम् मिश्रा
मैनपुरी, उत्तर प्रदेश

रानी पात्रिक said...

ज़रूर देखूंगी एसिड फैक्ट्री।

राजीव तनेजा said...

अभी तक तो देखी नहीं है लेकिन शायद एक दो दिन बाद जाऊँगा देखने ऐसिड फैक्टरी ...


आप कामयाबी दर कामयाबी पाते रहें

हँसते रहो

chavanni chap said...

भाई फिल्‍म तो बुरी है और चोरी की हुई है। ऐसी फिल्‍म में इरफान और आप को देख कर दुख हुआ। बुरी फिल्‍म में बेहतरीन काम का तर्क समझ में नहीं आता।

nilesh mathur said...

मनोज भाई, प्रणाम
वोट नहीं डाल सके तो कोई बात नहीं वैसे भी गधे घोडे सब बराबर हैं, कुर्सी मिलते ही सब बदल जाते हैं, राजनीति का बेसब्री से इन्तजार कर रहा हूँ, और एक सुपर हिट की उम्मीद करता हूँ , शुभकामना!

रश्मि प्रभा... said...

hmmmm, apna adhikaar khona achha nahi lagta.....

नदीम अख़्तर said...

यही होता है। कोई काम आप मन लगा कर कीजिए और कोई दूसरा उसमें पानी फेर जाये, तो सिर धुनने का मन करने लगता है। खैर, आपकी मेहनत आपके काम में नज़र आती है। जिस संजीदगी के साथ आप काम में भिड़े हैं, उसमें निश्र्चित रूप से आप सफल होंगे, वैसे सफलता का कोई पैमाना है नहीं, जो कोई आपको बता दे या आप किसी को बता पायें। कभी रांची आना हो, तो पत्रकारों के साथ अनऑफिसियल मिलना जुलना जरूर तय कीजिए। कुछ विचारों का आदान-प्रदान हो।

creativekona said...

आदरणीय मनोज जी,
वोट न डाल पाने का अफ़सोस तो होगा ही --चलिये अगली बार सही। फ़िल्म देख लूं तो उस पर कुछ बात करूं। अभी तक देख नहीं पाया इसका अफ़सोस है।
आपको धनतेरस और दीपावली की हार्दिक मंगलकामनायें। यह दीपावली आपके समस्त परिवार के, और आपकी पूरी यूनिट के लिये हजारों खुशियां लाये। इसी मंगलकामना के साथ।
हेमन्त कुमार

raviwar said...

फ़िल्म देख ली और मुझे यह कहने के लिए माफ करें कि आपने भी जाने किस दबाव या प्रलोभन में इस नकल की फिल्म में काम करना स्वीकार कर लिया. आपका अभिनय हमेशा की तरह बहुत सुंदर है लेकिन जब बात संपूर्णता में होगी तो फिल्म की नकल को लेकर ही बात उठेगी.

Priya said...

aapka blog padh kar to aisa hi lagta hai ki aap hamare jaise hi hai.....arey aapne apna vote nahi dala iska afsoos hai.....kya pata ek vote se Maharashtra ka bhavishya badal jata .......Gande logon mein se kuch kam gande logo ko chunna ek challenge hi to hai....aapki film ka promotion properly nahi hua ye to notice kiya hai ...... will try to see.

Regards,

Priya

Tarkeshwar Giri said...

In busy life its not possible, u r right Mr M.B