Monday, December 7, 2009

अधूरा रह गया दुबई देखने का ख़्वाब

पिछले हफ्ते दुबई में था। दुबई कभी गया नहीं था। उसके बहुत सारे कारण थे। जब भी ऐसे मौके मिले तो मैंने उस प्लान को खारिज कर दिया या वो प्लान खुद ही खारिज हो गया। इस बार मौका लगा तो मन में खुशी थी कि दुबई देखने का मौका मिलेगा। दुबई एयरपोर्ट पर उतरे, गाड़ी में बैठे और गाड़ी करीब दो घंटे चलने के बाद होटल हिल्टन पर रुकी। मैंने ड्राइवर से पूछा कि ये दुबई ही है न? तो उसने जवाब में कहा- दुबई एक अलग अमीरात है। हम दो अमीरात पार करके किसी तीसरे ही अमीरात में पहुंचे हैं। इसका नाम है रस अल खेमा।

आप सोच सकते हैं कि मैं कितना उदास रहा होऊंगा। एक छोटा और बहुत ही छोटा सा शहर जो अभी विकसित हो नहीं पाया है। लेकिन शूटिंग वहीं होनी थी। छह सात दिन की शूटिंग करके वापस दुबई हवाई अड्डे पर उतरा और फिर दिल्ली आ गया। दुबई देखने और घूमने की इच्छा अधूरी ही रह गई।

इधर,दिल्ली में प्रवासी भारतीय फिल्म फेस्टीवल की योजना बन रही है। जिसके अवॉर्ड की ट्रॉफी के अनावरण के उपलक्ष्य में समारोह रखा गया था, मुझे उसमें भाग लेना था। बहुत अच्छा समारोह रहा। श्री अशोक चक्रधर, श्री राजीव शुक्ला, श्री साबिर अली इन सभी लोगों ने अपने अपने भाषण से लोगों का मन मोह लिया। लेकिन जो सबसे बड़ी उपलब्धी थी इस समासोह की तो वो मॉरिशस के राष्ट्रपति महामहिम अनिरुद्ध जगन्नाथ की उपस्थिति। वो इस समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद थे। उनकी सादगी देखकर मैं आश्चर्यकित और भौचक रह गया।

ऐसे लोगों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। बचपन से सादगी मुझे लुभाती रहती है। ऐसे ही जीने की इच्छा है। जब बड़े पद पर बैठे लोग आपके सामने उदाहरण पेश करते हैं तो फिर व्यक्ति अपनी ही सादगी पर सवाल खड़े करना शुरु करता है और अपने आप को सुधारने की दिशा में काम करना शुरु करता है।

मुझे जीवन में आराम चाहिए। आधारभूत सुविधाओं की इच्छा रखता हूं। लेकिन, सादगी से एक सम्मोहन और एक आकर्षण रहा है। और आशा करता हूं कि मैं इसी तरह से आगे का जीवन भी व्यतीत करता रहूं। आप पाठकों की प्रतिक्रियाएं लगातार उत्साह बढ़ाती हैं, और मैं देखता हूं कि कुछ पाठक लगातार उत्साहवर्धन करते हैं। सभी की प्रतिक्रियाओं को लेकर बातचीत जल्दी ही।

फिलहाल, सादगी भर अभिनंदन के साथ आपका और आपका
मनोज बाजपेयी

17 comments:

Ram-Krishna said...

Dear Manoj Ji,
Lovely morning..!
Welcome back home.. hope that you had a pleasant , safe and comfort flight..!!
I am glad that you had a productive trip.and I am also disappointed a little to know that your desire did not fulfill!! I love the part about the culture of film making and the whole atmosphere which seems to be impressive to you.. fascinating.And moreover, you would have asked your colleauges to take a short city tour. You should not be so introvert..?Anyway, dont miss next chance!
I leave you with hope and trust… and a sincere prayer to the Almighty to keep you always healthy.. safe.. happy and forever on the top as much as you can reach.
Best,
Dr Ram-Krishna THAKUR
Expt. Nano-Tech.
Sr Scientist, The HKUST, Hong Kong

निर्मला कपिला said...

सादगी से बढ कर कोई धन संसार मे नहीं है बहुत अच्छा लगा जान कर बहुत बहुत शुभकामनायें और आशीर्वाद

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

कोई बात नहीं... फिर कभी देख लीजियेगा, अगर आर्थिक संकट के बाद बचा रहा तो..!

Priya said...

aapki post padh kar ek sher yaad aa gaya " sadgi hi to qayamat ki ada hot hai :-) Ye sada dili kise nahi bhayeki.......lekin banawat nahi honi chaiye....kyonki " tadne wale qayamat ki nazar rakhte hain".....aur nazre bezuban nahi hoti....aaj kuch zyada shayrana andaaz likh diya hamne.....bes uhi

Raviratlami said...

जिंदगी में बहुत से ख्वाब अधूरे रह जाते हैं. जैसे, कि मेरा ख्वाब - आपसे रूबरू मिलने, बातचीत करने का. आप राजनीति की शूटिंग के सिलिसिले में कई मर्तबा भोपाल आए, मगर मिलने का तारतम्य नहीं बन पाया. देखते हैं ये ख्वाब कब पूरा होता है...

creativekona said...

आदरणीय मनोज जी,
आप लोग तो शूटिंग के सिलसिले में बाहर जाते ही रहते हैं--चलिये इस बार न सही अगली बार दुबई
घूम लीजियेगा।
और सादगी तो ऐसी चीज है जिसने इसे अपना लिया उसका जीवन धन्य हो गया।शुभकामनाओं के साथ।
हेमन्त कुमार

Sumeet Tyagi said...

Dear Manojji,

Good Evening! I have been searching your blog for quite long time and finally got it. I am new on your blog but your one of the biggest fan since the time of ‘Satya’. I have seen your all films and have also been moot-witness/spectator of your ups and downs of the life, as I wanted to see as to how you resolve those circumstantial problems……I feel proud to see that every time you have come out with more strength and positive attitude. Recently, I have seen your latest film “Jail”….your acting, expression was wonderful and matured as well as but would frankly say that the ‘First Impression’, I got after seeing your ‘Satya’….and ‘Zubeda’ was missing or I would say that I was searching for the same ‘Manoj Vajpai’ who look alike us i.e. a common man but acts like a true leader and a super-human being, who inspires lakhs of people by his daring sprit and brave acts while fighting against ‘Wrongs’ of the society and fill our heart with the feeling of “Desh-bhakti”. I would also like to see you in the comic roles, as I know you are a complete actor and therefore you should also prove it by performing all kind of roles including comic acts. I have expressed…whatever I felt by heart and soul for you….. I have now shifted from Delhi to Mumbai….and perhaps my dream to meet you could be fulfilled. May Supreme God Shiv fulfill your all dreams and also bless you with all happiness of life and eternal peace and joy of mind.


Sumeet Tyagi, Advocate
Supreme Court of India

Actor (Part-time)

अल्पना वर्मा said...

To aap Ras-al khaimah mein pahunch gaye!ha ha ha! wahan to pahad pahad dikhe honge!

:)
Dubai airport se utar kar Metro mein ek sire se dusre sire ka ticket le lete..dubai kuchh to dekh hi lete..[agar time kam tha!]

Sirf Dubai hi properly dekhna ho to ek week ka samay to le kar aana hi chaheeye...

Siddharth Singh said...

sabse pehle to ''PRANAAM'' kyunki main Bihar se belong karta hun to aap is shabd se parichit honge.Aaj pehli baar apke blog ko dekha aur kaafi khusi hui aapki bhezi hui posts dekhkar.Ummeed hai aap isi tarah aage bhi apne vichar aur rai zaahir karte rahenge.
Isse jyada kya likhun bus aapke liye dher sari well wishes..aur Bihar ko miss karte hain ya nahi??

RA said...

Manoj Ji,
Always appreciative of your writing,I am a silent reader of your blog.Today your reference of Ras Al Khaima made me write this comment. I have visited both Dubai and RAK and love RAK's small town feel simplicity when compared to Dubai's skyscrapers,traffic and fancy malls.

Among many star blogs yours truly stands out.Keep up the good work.

Rajnikant George said...

Dear Manoj sir,
welcome back in India and well wishes for next Dubai happy Trip ........

sir want to know about ur schooling or school life in Bettiah ( K.R High school )
pls share with Us ..
thanks with Regard
Rajnikant George

अबयज़ ख़ान said...

दुबई जाकर क्या करेंगे मनोज जी.. दुबई का संकट कम हो जाए.. तभी जाइये.. फिल्मी सितारे वैसे ही दुबई संकट में फंस रहे हैं.. वैसे रवीश जी के साथ एनडीटीवी पर आपका इंटरव्यू देखा था. बहुत अच्छा था.. काफ़ी कुछ जाना आपके बारे में.. ब्लॉग पर भी लिखिए अपने बारे में...

pankaj said...

HI MANOJ,HOW ARE YOU.I WANT TO CAST YOU IN MY MOVIE ALONG WITH IRRFAN(IN FUTURE) BECAUSE YOU BOTH ARE MY FAVORITE ACTORS.



YOUR BIGGEST FAN
PARIMAL MISHRA

sada said...

बिल्‍कुल सच कहा आपने, सादगी भी अपने आपमें एक मिसाल बन जाती है,कभी विचारों से, कभी व्‍यवहार से, कुछ लोग दिखावे से बिल्‍कुल जुदा होते हैं, आपका ख्‍वाब जल्‍दी ही पूरा हो .... शुभकामनायें ।

sathi said...

आदरणीय मनोज जी
प्रणाम
मैं बिहार के एक गांव शेखपुरा जिले के बरबीघा से आपका ब्लॉग पढ़ रहा हूं। बहुत अच्छा लगता है। खास कर यह जानकर की जिन्दगी के जिस मुकाम पर जाकर आदमी आदमियत भूल जाता है वहां से आप आदमियत और सादगी की बात करते है।
अरूण साथी

ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя said...

manoj bhaiya koi na....ab aap yaha tak a gaye hai to iske aage ka safar bhi accha hoga......
ndtv par aapka interview dekhkar dil se khushi hui...

aapka chota bhai
sanjay sen sagar

abhi said...

Manoji ,

Mere naam Abhiraj Mishra hai aur main Raju Srivastava ke saath peechle 2 saal se juda hun ...Main standup likhta hun aur saath hi saath Acting bhi karta hun....I would like to request to read a book named secret -law of attraction by Rhonda Byrne...
Rgds,
Abhi