Friday, August 28, 2009

रात की शूटिंग के नाम से सिहर जाता हूं..

काफी दिन हो गए लिखे हुए तो सोचा आज कुछ बात कर लूं आप लोगों से। आजकल किसी पार्टी में अंदरुनी कलह की बातें आ रही हैं, कहीं सलमान खान के आईपीएल टीम खरीदने की चर्चा जोर शोर से दिख रही है। समाचार देखते देखते ऊब जाता हूं। फिर सो जाता हूं। आप सोच रहे होंगे कि क्या कर रहा हूं। आजकल कुछ काम नहीं है क्या ?

दरअसल, मैं आजकल रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद में शूटिंग कर रहा हूं, जो शहर से एक-डेढ़ घंटे की दूरी पर है। आसपास कुछ भी नहीं है सिवाय स्टूडिया के। स्टूडियों में एक दो अच्छे होटल हैं, जहां पर आप, अगर शूटिंग नहीं कर रहे हैं तो, ठहरते हैं। और कुछ करने को है नहीं। शूटिंग पर बुलावे का इंतजार कर रहा हूं और इस बीच हर न्यूज चैनल को टटोलने की कोशिश भी कर रहा हूं। ये भी देख रहा हूं कि “एसिड फैक्ट्री” के प्रोमो आने शुरु हुए कि नहीं।

अभी अभी “एसिड फैक्ट्री” के निर्देशक से बात हुई तो उन्होंने बताया कि एसिड फैक्ट्री का एक गाना किसी खास चैनल पर आना शुरु हो गया है। अगले तीन चार दिनों में सारे प्रोमो आने शुरु हो गए जाएंगे। उत्साहित हूं। उत्सुकता भी है प्रोमो देखने की क्योंकि यही रामोजी राव स्टूडियो है, जहां पर एसिड फैक्ट्री की डेढ महीने की शूटिंग की थी हमनें। और काफी मजे भी किए थे यही पर।

यहां पड़े पडे उस समय की याद ताजा हो गई है। मैंने फिल्म खुद देखी। एक बहुत ही मनोरंजक फिल्म बन पड़ी है। मुझे फिल्म बहुत अच्छी लगी। एक तेज गति वाली भरपूर मनोरंजन देने वाली फिल्म है एसिड फैक्ट्री। इससे ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। बाकी जब लोग देखेंगे तो वो अपने आप निर्णय लेंगे। नहीं तो यह आरोप लग जाएगा कि मैं सिर्फ अपनी फिल्म का ही प्रचार कर रहा हूं अपने ब्लॉग पर।

कुछ दिनों के बाद भोपाल वापस जाना होगा। “राजनीति” की शूटिंग के लिए, जिसका बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। इंतजार कर रहा हूं अपने दोस्त विजय जाजोरिया से मिलने का, जो कॉलेज के दिनों के साथी हैं। भोपाल एक छोटा लेकिन बहुत सुंदर शहर है। पिछली बार शूटिंग कर चुका हूं। अच्छा लगेगा फिर से वापस जाने में।

आजकल मैं रात की शूटिंग कर रहा हूं और रात की शूटिंग करना मुझे बेहद नापसंद है। मैं चाहे कितनी भी कोशिश क्यों न करुं कि निर्देशक मेरा काम खत्म कर 12-1 बजे तक वापस भेज दे। फिर भी नाकाम ही रहता हूं। निर्देशक कभी ये सोच नहीं पाते कि मैं 12-1 बजे के बाद अपना काम ढंग से नहीं कर पाता। मैं अपनी ऊर्जा लगा नहीं पाता। न दिमाग लगा पाता हूं। ये मेरी परेशानी हमेशा से रही है। लेकिन, एक कमिटमेंट किया है तो उसे पूरा करना ही पड़ेगा।

आज रात मैं फिर जागना है। ये सोचकर ही मैं दहशत में हूं। खैर, आज इतना ही,

आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

Wednesday, August 12, 2009

बाप रे बाप...स्वाइन फ्लू...

स्वाइन फ्लू। स्वाइन फ्लू । स्वाइन फ्लू। स्वाइन फ्लू। चारों तरफ यही हाहाकार मचा हुआ है। डरने के बावजूद भी मास्क नहीं मिल रहे हैं। कोई आयुर्वेदिक दवाइयों की लिस्ट भेज रहा है तो कोई होम्यौपेथी की लिस्ट भेज रहा है-अपने अपने चहेतों को। सब के सब एक दूसरे को लेकर फिक्रमंद हैं।

इतने सारे सामाचार, इतने सारे संदेश- अब हर पल लोगों को चिंता में डाले जा रहे हैं। कहीं हमें न हो जाए ये बीमारी- सभी यही सोच रहे हैं। माथा गर्म है तो स्वाइन फ्लू होगा। पैर में दर्द है तो शायद स्वाइन फ्लू हो सकता है। हर तरफ इसी तरह की बेचैनी नजर आ रही है। सरकार अगर निजी हॉस्पीटल को ये अधिकार दे दे कि वो स्वाइन प्लू का टेस्ट कर सकते हैं, उनका इलाज कर सकते हैं और उनकी कड़ी निगरानी रखना शुरु कर दे तो मेरा मानना है कि आधे से ज्यादा लोगों की मन की परेशानी दूर हो सकती है। हर न्यूज चैनल पर लोगों को लंबी लंबी लाइनों में खड़ा देखकर मैं ही नहीं, हर कोई घबरा रहा है। ऐसा लगता है कि अगर उनमें से किसी को ये बीमारी लग गई तो टेस्ट होते होते ही उसकी जान जा सकती है।

खैर, यह मेरे मन की बात। मैं तेलुगु फिल्म की शूटिंग कर रहा था, उसका शिड्यूल कैंसल हो गया है। और इन दस दिनों के लिए शायद घर पर ही रखना पड़े। बाकी अभिनेताओं की तारीख की समस्या आन पड़ी है। हमारे पेशे में ऐसा अक्सर होता रहता है। ‘राजनीति’ की शूटिंग की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। इसे लेकर प्रकाश झा जी से एक मुलाकात हो चुकी है। कल फिर मिलने जाऊंगा। अभी मैंने अपनी एनिमेशन फिल्म ‘रामायण’ की बची घुची डबिंग खत्म की है। लेकिन,घर लौटकर जैसे ही टीवी खोला, वही स्वाइन प्लू की खबर देखने को मिली।

मेरे मित्र विशाल भारद्वाज की फिल्म रीलिज हो रही है-कमीने । उसे देखने हॉल में जरुर जाऊंगा। लेकिन, साथ में इतने लोगों के संपर्क में आने का डर भी बना हुआ है। लोगों से डर नहीं है। स्वाइन फ्लू से है। फिर भी एक जागरुक व्यक्ति होने के नाते मैं अपने मन को समझा रहा हूं कि बस सावधानी बरतनी है। लेकिन, ‘कमीने’ तो देखने जरुर ही जाऊंगा क्योंकि विशाल की फिल्में मुझे अच्छी लगती हैं।

इसी के साथ
आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी