Tuesday, April 6, 2010

लिखने-पढ़ने का मन नहीं

आज-कल न लिखने का मन कर रहा है, न पढ़ने का। बस, यूं ही फांके मस्ती का मन कर रहा है। और कोई काम जबरदस्ती नहीं होता मुझसे। दिल और दिमाग में सामंजस्य ने बैठे तो क्या फायदा। ब्लॉग पर पहले लिखने के बारे में सोचा, फिर अचानक लगा कि लिखा नहीं जाएगा। तो सोचा, कुछ मित्रों की बातों का जवाब दे दूं।

मैंने जबसे ब्लॉग लिखना शुरु किया है,तब से कई कमेंट में इसका जिक्र रहा है कि मुझे अपनी मुंबई यात्रा के बारे में लिखना चाहिए। किसी पोस्ट में पंकज शुक्ला जी ने कहा-आप मुंबई यात्रा को कलमबद्ध क्यों नहीं करते? वैसे, कुछ दोस्त कहते हैं कि मैं दिल्ली की यात्रा के बारे में लिखूं। कुछ कहते हैं कि रंगमंच से जो सीखा, उसके बारे में लिखूं। पंकज कह रहे हैं कि मुंबई की यात्रा पर लिखूं। सच कहूं तो अभी इन सबके बारे में कहने का मन नहीं है और न लगता है कि ऐसा महत्वपूर्ण कुछ किया है,जिसके बारे में लिखा जा सके। समाज से जुड़ी अपनी अंतरंग भावनाओं को ब्लॉग के जरिए आप लोगों से बांटता रहता हूं। वो ही काफी है। अपने बारे में, अपने संघर्ष के बारे में लिखना अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने जैसा लगता है। जिस दिन ऐसा लगेगा कि मेरे अनुभवों से बाकी लोगों को दिशा मिल सकती है या फायदा मिल सकता है तब अवश्य लिखूंगा।

कई लोगों की शिकायत है कि मुझे ब्लॉग जगत के लोगों से संवाद बनाना चाहिए। गिरजेश राव, महफूज अली, प्रिया और कई मित्र कमेंट भी यही कहते दिखे। अब मैं क्या कहूं ? लिखने के लिए समय निकालना ही काफी मुश्किल होता है। सोचना और लिखने के बाद फिर से अपने जीवन में लग जाना-ये भी आवश्यक है। कई सारी जिम्मेदारियां निभानी होती है। इस बीच जितना पढ़ पाता हूं और जितना लिख पाता हूं, उतना जरुर करने की कोशिश करता हूं। फिर, दिन में जितना समय और ऊर्जा बचती है, उसका उपयोग व्यक्तिगत और व्यवसायिक जीवन में लगा रहता है। मैं लेखक नहीं हूं, इसलिए ब्लॉग लिखने के लिए खुद तैयार करना भी मानसिक रुप में एक जिम्मेदारी भरा काम होता है। हिन्दी में कई ब्लॉग पढ़े हैं मैंने और कुछ मित्र लिंक भेजते हैं तो उन्हें भी देखता हूं....लेकिन ब्लॉगिंग से इतर कामों में बहुत वक्त लगता है।

कुछ मित्रों ने प्रकाश झा की 'राजनीति' के बारे में पूछा है। अभी 'राजनीति' के पहले प्रमोशन के लिए हम लोग दिल्ली गए थे एक दिन के लिए। काफी हंसी मजाक चला। प्रेस से मुखातिब भी हुए। एक बहुत ही महत्वपूर्ण फिल्म है मेरे लिए 'राजनीति'। क्योंकि मैंने प्रकाश झा के साथ काम किया है, जिनका गांव मेरे गांव के पास ही है। बहुत सारा सहयोग मुझे उनसे मिला। बहुत सारा प्यारा और विश्वास उन्होंने मुझ पर उड़ेला। वो मेरे अभिनेता से जिस कदर प्यार करते हैं, वो भी मेरे लिए अनमोल वरदान है। अच्छी फिल्म बन पड़ी है। मैं बस सिर्फ यह चाहता हूं कि आप लोग हॉल में जाकर उनके इस विशालकाय कार्य को देखें और सराहें।......

कई मित्रों के कमेंट नियमित दिखते हैं। उनका नाम लेना चाहता था, लेकिन फिर लगा कि कई छूट जाएंगे। कभी फुर्सत ने बाकी बातों पर चर्चा करुंगा।
इसी के साथ
आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

19 comments:

रोमेंद्र सागर said...

यह तो सही कहा आपने कि आप लेखक तो है नहीं....मगर मनोज भाई मेरे देखे आप कुछ कम भी नहीं हैं ...बहुत चालाकी से सब कुछ कह भी जाते हैं और जो नहीं कहना होता है उसे उतनी ही खूबसूरती से गोल भी कर जाते हैं ! बढिया है ....! लेकिन जो भी है हमें आपको पढ़ना अच्छा लगता है सो जो कुछ भी लिखेंगे , हम निष्ठा से पढेंगे ....! सो लिखते जाइए निशंक ........!

शुभकामनायें !!

शिक्षामित्र said...

भाग-दौड़ भरे जीवन में अक्सर ऐसी अनुभूति होती है मगर कोई बिरले ही इसे स्वीकारता है। समय निकालकर इतना लिखना भी कम नहीं। शुभकामनाएँ।

Arvind Mishra said...

मनोज जी आप लिखते भी बहुत अच्छा हैं अपनी सभी बाकी खूबियों के साथ !
आप जितना भी जो भी और जब भी समय निकाल सकें ब्लॉग जगत से संवाद बना रहे तो कितना अच्छा हो न !

anoop joshi said...

सर अछा लगता है जब आप जैंसे कलाकार आप के लेख पर कमेन्ट करने वाले पर टिपणी करते है. आप की तारीफ इसलिए नहीं कर रहा हूँ की आप सेलिब्रिटी है किन्तु इसलिए कर रहा हूँ की कहीं न कही हर आदमी आप से इफ्तेफाक रखता है. आप जैंसे थेटर के कलाकारों ने ही सही मानो में एक्टिंग को जीवंत रहा है. बस सर एक बात कहना चाहता हूँ अगर लिखने का मन भी न हो तब भी लिख दिया कीजिये आप के लेख में किसी को सब्दो से परभावित न करने वाली शैली ही आप के लेख को सुंदर और असली बनाती है धन्यबाद

Kulwant Happy said...

@महफूज अली जी ने बताया था। इसमें आपका भी कोई दोष नहीं, सारा कसूर तो लोगों का है। अगर कोई बड़ी हस्ती उनको छूकर भी निकल जाए तो वो कई दिनों तक मोहल्ले में हल्ला मचाते फिरते हैं, आज उस हस्ती से हाथ मिलाया था। अगर हस्ती संवाद निरंतर बनाना शुरू कर दे तो सामने वाला भूल जाता है कि सामने वाली हस्ती से किस सलीके में बात करनी है।

पर फिर गुजारिश है मनोज जी, आप कुछ न कुछ पढ़ते रहिए। जिन्दगी में असफलता और सफलता का दौर आता रहता है, मैं तो उसकी को असली हस्ती मानता हूँ जो दोनों में अपनी हस्ती को नहीं छोड़ती। सफलता में ज्यादा गरूर नहीं करती और असफलता में चकनाचूर नहीं होती, बल्कि उभरने का दम रखती है। आपने आज दिल की बातें रखीं अच्छा लगा। निजी तौर पर ना जाकर भले ऐसे ही दोस्तों का शुक्रिया अदा करते रहा करो। अच्छा लगता है, जब कुछ लिखने का मन न हो।

Yayaver said...

Manoj ji, Aap kabhi apne sangharsh ke dinon ka nahin likhte hain; Itihaas kitna bhi purana kyon na ho, jeevan ka hissa hota hai. Mujhe umeed hai ki aap humen khul ke apne baare mein batein, media to bas satya aur shool ke baad ki zindagi pe he focus karta hai. kuch pichle zindagi ke baare mein likheye..

Munna kumar "arya" said...

Good Morning Manoj bhaiya
Mai bahut dino se intejar kar rah tha ki Manoj bhaiya kab blog likhenge kyoki aapne ye wada kiya tha . Aap free bhi the socha ki aapka blog to aap dhakadhak aayega. Lekin jab ye blog pada to laga ki aapki kya preshani hai. AAp sahi kaha rahe hai ki aap lekhak nahi hai lekin kya lekhak hi blog likhta hai, nahi bhaya ye to kisi ki DIL se nikali hui aawaj hoti hai aur humsab aapke dil ki aawaj sunana chahte hai. Bus jab v time mile , aap aapne dil ki bato ko share jarue kigiye.
Aap itne busy rahte hai ki aapse baat to kiya ja sakta nahi so blog hi to ek sahara hai.So plz carry on.
Thanks
Munna Kumar Arya
President:-"KHWAB"-ek nai duniya ki
www.khwab.yolasite.com

Ashok Sharma said...

मनोज भाई आप कुछ कम भी नहीं हैं ...बहुत चालाकी से सब कुछ कह भी जाते हैं और जो नहीं कहना होता है उसे उतनी ही खूबसूरती से गोल भी कर जाते हैं ! बढिया है ....!
Aap to bas aap hain.....

Tarkeshwar Giri said...

अगर कोई बड़ी हस्ती उनको छूकर भी निकल जाए तो वो कई दिनों तक मोहल्ले में हल्ला मचाते फिरते हैं, आज उस हस्ती से हाथ मिलाया था।

chavanni chap said...

लिखना कदापि बंद न करें। कम लिखें,लेकिन लिखें।

jitendrajha jitu said...

bas aap isi tarah kam karte rahe aur hume apki achi movi dekhte rahe

CHANDAN LAL GUPTA said...

ap jis tarah se ak kirdar me jan dalte hae wakae lajawab hae.ap apne kimti wakte se kuch pal jo nikalte hae apne darsako ke lia likhne me prasansania hae.hamari subhkamnae apke sath hae apka chota bhae... CHANDAN LAL GUPTA

आनंद said...

सर जी, आपकी दिल्‍ली और मुंबई की यात्रा के बारे में हम सीरियसली जानना चाहते हैं। यदि हमें किसी महान व्‍यक्ति की महान संघर्षगाथा जानने का शौक होता तो महात्‍मा गांधी या नेल्‍सम मंडेला की जीवनी पढ़ते। आप लेखक नहीं है, एक सीधे-सादे जीव हैं इसीलिए तो आपसे प्‍यार करते हैं और आपके बारे में जानने की इच्‍छा रखते हैं। कोई जरूरी नहीं कि आप तभी बताएँ जब देश और दुनिया के लिए महत्‍वपूर्ण युद्ध जीत लें। हमें तो अभी ट्राएल एंड एरर पर जीने वाले मनोज वाजपेयी को ही पढ़ना है... उन्‍हीं की जीवन-यात्रा सुननी है। हम जानना चाहते हैं कि पिंजर में बहुत कम संवादों द्वारा अभिनय करने वाले मनोज वाजपेयी का इन दिनों किन स्‍तरों पर संघर्ष चल रहा है? यहाँ तक पहुँचने के लिए क्‍या-क्‍या पापड़ बेले हैं, और इरादे क्‍या-क्‍या हैं, वगैरह...

- आनंद

HarPreet said...

Manoj ji ....you are realy gud at writing so please never stop it! I love ur writings.

HarPreet said...

Manoj ji ....you are realy gud at writing so please never stop it! I love ur writings.

RA said...

We look forward to reading your crisp and to the point writings.
One request I have is to keep some posts gets translated in English as well,like the one on Mr.Nirmal Pande or the recent one on Raajneeti.
Hope you had a good Taurus birthday.
Best wishes and regards.

Priya said...

Itna sab kuch likh diya hai ji...kya solid bahana mara hain...kahir chaddo ji....vadde log vaddi-vaddi gallaa- shalla ......asi bhi busy-shizy type the...type kya ji exactly busy they....so aa ni paaye itthey....Changa ji....tusi lage raho apne kaam naal....No complain

पंकज शुक्ल said...

इस पोस्ट में आपने मेरे सुझावों का भी ज़िक्र किया, अच्छा लगा। जिन दिनों मैं अमर उजाला में फिल्म समीक्षा लिखा करता था, तब सत्या के वक्त साथी अनिल सिंह आपकी तारीफ किया करते थे। सत्या के वक्त वो खासतौर से मेरे पास आए और पूछा कि फिल्म कैसी लगी। मैंने तब ही कह दिया था कि मनोज बाजपेयी एक ऐसा अभिनेता है, जिसने अगर स्टार बनने की अंधी दौड़ से खुद को अलग रखा तो अदाकारी के नए मानदंड स्थापित करेगा। मुझे खुशी है कि मेरा कहा सही साबित होता रहा है, आगे भी आप कथानक और किरदार पर ध्यान दीजिए। सितारे तो आप हैं ही।

neha said...

hello manoj je muje aapke acting bhut pasand hai aap bhut ache insaan bi hai sab m bhut attitude hota hai bt aapme bilkul bi nahi hai isliye aap muje bhut pasand hai
manoj je kya muje koe job de sakte hai m bhut pareshan hu bt aap muje galat mat samjna i m good girl bas kuch karna chate hu life m kise per depend nahi hona chate sab mere marriage karna chate hai bt muje nahi karne abi m jisse pyar karte hu uske parents ko bi dehaj chaye isliye vo mujse marriage nahi kar pa raha hai usme itne himmat nahi hai ke vo unke kilaf ja sake plz help me