Sunday, April 18, 2010

‘राजनीति’ के बहाने राजनीतिक विमर्श

राजनीति। ये ऐसा विषय है, खासकर हिन्दुस्तान में, जिस पर फिल्म बनाना अति कठिन कार्य है। दरअसल, राजनीति में सिर्फ राज की नीति शामिल नहीं होती। इसमें मानव व्यवहार के कई पहलू शामिल हो जाते हैं। लालच, दंभ, घृणा, साम, दाम, दंड, भेद और न जाने क्या क्या। और इन सभी पहलुओं को ढाई घंटे की एक फिल्म में दिखा पाना आसान काम नहीं है। लेकिन, प्रकाश झा की फिल्म ‘राजनीति’ ने इन तमाम पहलुओं को न केवल टटोलने की कोशिश की है, बल्कि राजनीति को कहीं गहरे देख गंभीर पड़ताल की कोशिश भी की है।

इस फिल्म के जरिए एक बार फिर देश की ‘राजनीति’ को देखना-समझना हुआ। पहले फिल्म की बात करता हूं। श्री प्रकाश झा ने ‘राजनीति’ के लिए जब मुझे बुलाया गया तो मेरे भीतर कई शंकाएं उभरीं। आखिर, राजनीति पर गंभीर लेकिन व्यवसायिक फिल्म बनाना आसान काम नहीं है ! लेकिन, जिस तरह से उन्होंने अपने व्यक्ति, निर्देशक, समाज सेवक और राजनीति के जीवन के अनुभव को पर्दे पर जीवंत किया, वो समचमुच बेमिसाल है। फिर महाभारत के कुछ एक पात्र भी हमारी इस फिल्म ‘राजनीति’ में दर्शकों को देखने को मिल जाएंगे। महाभारत के बहुत सारे चरित्र अपनी दुविधा और द्वंद के साथ लड़ाई करते हुए इस फिल्म में दिखेंगे। एक व्यापक अनुभव रहा इस फिल्म में काम करना। एक ऐसा अनुभव, जो कैमरे के पीछे से लेकर कैमरे के सामने तक एक अभिनेता के पूरे सपने की भरपाई करता है।

फिल्म की खासियत का बखान करना मेरा मकसद नहीं है। लेकिन, राजनीति की शूटिंग राजनीति से दूर रही, और हर काम तय शिड्यूल से हुआ। हां, एक उदाहरण जरुर देना चाहूंगा। इस फिल्म में भीड़ के दृश्य को जीवंत बनाने के लिए दस हजार लोगों की भीड़ भोपाल में इकठ्ठा की गई। दस हजार लोगों की भीड़ का ख्याल रखना, उनको ट्रेनिंग देना और उनको अपने निर्देशन के काबिल बनाना, उनसे सहायता लेना और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना- वहां ये सब ऐसे हो रहा था, जैसे पता नहीं कितने महीनों की अभिनय की क्लास लगाई गई हो। बाद में पता चला कि बहुत सारे छोटे-छोटे रोल, जो आपको इस भीड़ में दिखायी देंगे, उन सबके लिए बाकायदा आठ महीने तक एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। मैं हतप्रभ रहा गया और आज तक चकित हूं कि ये सब आखिर मुमकिन कैसे हुआ। अब जाकर मैंने अपनी डबिंग खत्म की है और लग रहा है कि कुछ बड़ा और अच्छा काम किया है।

लेकिन, फिल्म ‘राजनीति’ की शूटिंग के दौरान लगातार राजनीतिक चरित्रों के बीच खुद को घिरा हुआ पाया, और इसी दौरान एक राजनीतिक विमर्श भी शुरु हुआ कि आखिर भारतीय राजनीति इतनी पतित क्यों हो गई है? क्या आज की राजनीति सफलता पूर्वक अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रही है? राजनेताओं को समाज से जुड़े रहने में कठिनाई क्यों होती है? और विवाद से जुड़े होने में वो असहज क्यों नहीं होते ? और क्या हम जैसे सामान्य लोगों को अब राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की आवश्यकता महसूस नहीं होती?

लेकिन, बात राजनीति या राजनेताओं की नहीं है। बात है आम लोगों की। लोकतंत्र ने जनता के हाथों में ऐसा हथियार दिया है, जिसके आगे बड़े बड़े निरंकुश राजनेताओं की भी बोलती बंद हुई है। ये है वोट। असल परेशानी यह है कि आम लोग भी छोटे छोटे स्वार्थों के लिए अपने साथ छल होने देते हैं। कभी उन्हें इसका अहसास नहीं होता, और कभी होता भी है,तो भी वो चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं। फिर, भारतीय राजनीति की वर्तमान व्यवस्था ने आम लोगों की सोच को भी बहुत हद तक जड़ बना दिया है। जिसे बदलना चाहिए। लोग सिस्टम को बदलने में नहीं, उसमें शामिल होने में यकीं रखने लगे हैं-ये असल दिक्कत है।

राजनीति की शूटिंग करते वक्त ये भी लगा कि क्या फिल्म राजनीतिज्ञों के लिए आइने का काम कर पाएगी? क्या आम लोग फिल्म के जरिए राजनेताओं के हथकंडों को समझ पाएंगे। अगर फिल्म ‘राजनीति’ ऐसा करती है तो मुझे अपनी फिल्म पर बहुत गर्व होगा। लेकिन, अगर लोग आइने में देखकर खिसियानी बिल्ली की तरह हंसी निपोर कर आगे लोग बढ़ जाएं तो फिर फिल्मों से ही क्यों शिकायत हो कि वो समाज को बदलने में कोई सहायता नहीं करती। फिल्म ‘राजनीति’ अपना काम करेगी। वो दर्शकों का मनोरंजन करेगी। उन्हें हंसाएगी, रुलाएगी और उद्देलित करेगी। फिल्म राजनीति उन सवालों से एक बार फिर दर्शकों को रुबरु कराएगी, जिन्हें जानते हुए भी वो शायद उनकी अहमियत समझ नहीं पाते या नादानी में उनकी तरफ देखना ही नहीं चाहते। अब ये उन लोगों के ऊपर है, जो इस देश को चलाना चाहते हैं या चला रहे हैं कि इस तस्वीर से कुछ सीख पाते हैं या नहीं। सीखने को बहुत कुछ है। जानने को बहुत है। और अपने फिल्मी अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि शायद ये पहली हिन्दी फिल्म होगी जो आज की राजनीति में कहीं गहरे उतर उसे टटोलने का प्रयास करेगी।

26 comments:

अजय कुमार झा said...

चलिए शुक्र है कि आपने राजनीति पर कलम को खोला तो सही । ये तो सच में ही दिलचस्प है, आज के दौर में राजनीति जैसे विषय पर फ़िल्म बनाना , मगर प्रकाश झा हमेशा से ही एक अलग थीम पर बहुत ही उम्दा पेश करके सबको चौंकाते रहे हैं । शूटिंग के दौरान भारत में दस हज़ार लोगों को एक साथ समेटे रखना , बडी बात है । हां जहां तक आपने इस फ़िल्म के प्रभाव की बात है , ये बडे ही दुख की बात है कि अच्छी से अच्छी पिक्चरें भी इतना प्रभाव नहीं डाल रही हैं जनमानस के उपर की वो उत्प्रेरक का काम करें । चलिए आपका साथ प्रकाश जी के साथ मिलकर तो डैडली कौंबो पैक की तरह हो जाता है ।अच्छा लगा , लिखते रहिए , और राजनीति के लिए शुभकामनाएं , शेष तो पिक्चर देखने के बाद ....
अजय कुमार झा

ravikumarswarnkar said...

लोग सिस्टम को बदलने में नहीं, उसमें शामिल होने में यकीं रखने लगे हैं-ये असल दिक्कत है।...

हम भी यही कर रहे हैं...

अभी देखनी बाकि है...राजनीति...

Tej Pratap Singh said...

Manoj Ji...agar aap sahi ke Manoj Ji hai..to sabse pahle mera sadar pranaam. YE MAIN NAHIN KAHTA GITA MAIN LIKHA HAI.
bahut aacha laga aap ko dekh ker yahan.

Tej Pratap Singh said...

Raajneeti ki liye subhkamnyen..

kamlakar Mishra Smriti Sansthan said...

मनोज भाई नमस्कार ,आपको फ़्लिम् के सफ़लता के लिये ढेर सारी शुभकामना ,फ़्लिम् अपना सार्थक संदेश लोगो को देने मे कामयाब् हो ॥ जहा तक राजनीति का प्रश्न है वह् हमारी जिन्दगी से अलग नही किया जा सकता ॥ ऐसा कहा जाता है कि जो काम सामाजिक चेतना १०० साल मे करती वह् काम राजनीतिक चेतना १० साल मे करती है ॥ अब जरूरत है एक प्रगतिशील बदलाव कि,,,,,,,,,,,,हम सभी के द्वारा

Kulwant Happy said...

नेतागन को बोल दिया होता.. पचास पचास रुपए पर मजदूरों को लाकर रैली में भीड़ दिखा देते मनोज भैया। अगर अमर सिंह किया होता तो और भी भला हो जाता, फिल्म को प्रचार भी मिल जाता। वैसे नेता तो थरूर भी अब काफी मीडिया का करीबी बन गया है। राजनीति में किरदारों के साथ तो राजनीति नहीं हुई मनोज भैया।

Tarkeshwar Giri said...

Manoj ji Apko mera Namashkar. Bahut accha likhate hain aap, magar kabhi-kabhi.

amitesh said...

बेसब्री से इंतज़ार है राजनीति का. प्रकाश झा अपने दौर के सजग फिल्मकार है. खासकर राजनीति से जुड़े होने के कारण राजनीति के करीबी चित्रण को देखने का इंतज़ार है. प्रोमो ने उम्मीदे बढ़ा दी है. जिस फिल्म में इतने उम्दा अभिनेता हैं, जो अपने चयन के लिए जाने जाते हैं वो फिल्म कैसी होगी देखना है.

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

मुझे क्षमा करें पर मैं कोई फ़िल्म इसलिये नहीं देखता
कि वो फ़लाने अभिनेता की है..जैसे कि गंगाजल और
अपहरण दोनों अजय की है और निर्देशक भी एक है
पर मुझे अपहरण ज्यादा सधी हुयी और दिलचस्प लगी
आज मैं क्योंकि पहली बार फ़िल्मों पर कमेंट कर रहा
हूँ तो अपनी एक बात जो सबको ही अजीव लगती है
वो ये कि खुदा गवाह तक अमिताभ की ज्यादातर फ़िल्में
मुझे कामिक्स पङने जैसी लगती है ये सच है कि अमिताभ
एक बेहतर कलाकार है पर ये भी सच है कि उनकी गिनी
चुनी फ़िल्मों को छोङकर बाकी बेकार हैं ..शायद मैं ही
अजीव हूँ मैनें मनोज की शूल कई बार देखी और सत्या से
मेरे सर में दर्द हो गया ..मुझे शूट आउट लोखन्डवाला
बेहद सधी फ़िल्म लगी दस भी बेहतरीन थी और ये तो
निर्विवाद ही है कि पंकज (कपूर ) नसीर साहब जैसे
बेहतरीन अभिनेता कम ही होते है..
वैसे मैं बीस साल से साधु जीवन जी रहा हूँ पर मैं ऐसा
साधु हूँ जो कम्प्यूटर ,इंटरनेट का इस्तेमाल करता हूँ
सुरति शब्द साधना जो आत्मग्यान की दुर्लभ और इकलौती
साधना होती है मेरा जीवन है..आज आपका ब्लाग देखकर
मैंने बाह्य विषयों पर बात की है अन्यथा मैं अध्यात्म पर ही
बात करता हूँ ये आप ब्लाग देखकर जान सकते हैं..शेष फ़िर
satguru-satykikhoj.blogspot.com

Mukesh hissariya said...

जय माता दी
हमारा लक्ष्य हमारें सामने किसी मछली की आंख की तरह बिलकुल स्पस्ट है ,बस जरुरत है आप जैसे द्रोनाचार्यों की जो हमें आपने लक्ष्य को पाने में पथ प्रदर्शक बनकर हमारा साथ दें और साथ चलें.


मेरा ब्लॉग mukesh-hissariya.blogspot.com

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

Adaraneeya Manoj ji,
sabase pahale to rajneeti film kee safalata ke liye shubhakamnayen sveekar karen.idhar kafee dinon se apke blog tak naheen pahunch pa raha tha ...
apka kahana sahee hai ki hamare desh men idhar kee rajnaitik paristhitiyon ne am janata ke andar jo jadata bhar dee hai use to tootana hee chahiye.bina is jadata ke toote9bina janata men jagarookata aye)yahan kuchh bhee nahee badalega.khaddardharee isee tarah yahan kee janata,usake paise,usakee bhavanaon,usakee asmita se khilavad karate rahenge.
lekin sochane valee bat yah hai ki yah badalav layega kaun?yaham kee janata,yahan ke naukarashah,khaddardharee ya fir buddhijeevi....?
shubhakamnaon ke sath.

प्रीतीश बारहठ said...

अगर आपको सच में लगता है कि यह फिल्म लोगों को राजनीतिक रूप से जागरुक करने में सक्षम है और कुछ ऐसा सिखाती है जो वह पहले से नहीं जानते हैं, तो इसे टैक्स फ्री कराने और गरीबों को मुफ्त में दिखाने की व्यवस्था करवाईये। 150रु. खर्च फिल्म देखने वाला दर्शक तो गाना ही देखना पसंद करेगा, या दो-चार डायलॉग सीख लेगा।

Sanjeet Tripathi said...

Janmdin ki badhai aur shubhkamnayein aapko.

HarPreet said...

Many many happy returns of d day.....Happy birthday manoj ji...may god bless u wid all d happiness of life....may ur upcoming movie be a super duper hit!!!god bless u!!

प्रबल प्रताप सिंह् said...

Wish u a very Happy Birthday...!!

Sanjay Kumar Chourasia said...

janm din ki bahut bahut badhai

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

जयकृष्ण राय तुषार said...

Bhikhu mhatreji blog ke bahane ab aapse bat hoti rahegi aapka blog maine apne blog se link kar diya hai

जयकृष्ण राय तुषार said...

Very nice post bhai manojji

jitendrajha jitu said...

umeed karte hai age ve aap dono ki jugalbandi bane rahe

Dr Shashank Sharma said...

manoj ji, pranam.....blog padkar achchha laga...aaj desh ki raajneeti ki jo halat hai us par kam se kam har kisi ko chinta to honi chahiye...
ab aap SHOOL jaisi film kyu nahi karte...........

Som Prakash Singh said...

Very very thanks!
Iam agree with comment of Preetish Barahath

jitendrajha jitu said...

promo best hai khaskar apka dilouge and recation.hum dosto ko pakka viswas hai ki apka kam best hoga.

tejas said...

congrats for 'Rajneeti'. Manojji, which are your favourite books ? it would be pleaure to read that which books you like most and how its help to understand the life.

अनिल कान्त : said...

आपके इस लेख में आपके विचार, राजनीति से जुड़े हुए नेता और आम लोगों की मानसिकता के बारे में काफी कुछ बयाँ होता है ....काफी हद तक आपने सही बातें कहीं. आने वाले वक़्त में आपकी यह फिल्म जरुर देखूँगा.

और हाँ सालगिरह मुबारक हो आपको (देरी के लिये माफ़ी )

Priya said...

film kam dekhte hain.....lekin iska intzaar hain....I hope kuch meaningful hoga...May god give you success.Have a nice time ahead..

regards,

Priya

Arbendra said...

Monoj ji Rajneeti me Virendra pratap ke kirdaar ke liye aapko dhanyawaad aur hardik badhai...Bahut dino baad aap ko ek acche aur damdaar kirdaar ke roop me dekhne ko mila....Rajneeti me mujhe jo kirdaar sabse damdaar laga wo Virendra pratap ka hee laga... Satya aur road jaisi filmo ke baad aapne apani acting ke madhyam se apne aapko ko phir se ek baar sabit kar diya.... Asha hai Bhavishya me bhi aap ko aise hi kirdaaro me dekhne ka mauqa milega... Aap isi tarah ke kirdaar nibhate rahe....dhanyawaad...
Arbendra....