Thursday, August 12, 2010

लिखने में नहीं लागे मन...

आजकल कुछ लिखने का मन नहीं करता। मस्तिष्क में ऐसी कोई बात नहीं आ रही है, जिसे ब्लॉग पर लिखकर मन की भड़ास निकाली जा सके। बुद्धि कुंद-सी है। न किसी तरह की क्रिया कर रही है और न किसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है। ऐसा होते-होते कुछ समय निकल गया। फिर लगा कि नहीं, लिखने के दबाव में ही कुछ-न-कुछ लिख दिया जाए।

शायद यह इसलिए भी हो रहा है कि अभी मेरा सारा ध्यान अपने परिवार की ओर लगा हुआ है। दूसरे काम मेरी प्राथमिकता के दायरे में आ ही नहीं रहे हैं... और अच्छा भी लगता है घर पर समय बिताना। आजकल किसी फ़िल्म की शूटिंग चल नहीं रही है। अनुराग कश्यप ने अपनी फ़िल्म की शूटिंग की तारीख़ आगे बढ़ा दी है और आज ही पता चला कि प्रकाश झा ने अपने अगली फ़िल्म ‘आरक्षण’ की शूटिंग जनवरी के मध्य से शुरु करने की घोषणा कर दी है। उनका इस संदर्भ में फ़ोन भी आया था।

उनके फ़ोन के बाद अचानक मैं अपनी नींद से जागा। अपने नाकारा बदन और मस्तिष्क को जगाने की कोशिश भी की कि इस बीच किया क्या जाए? क्योंकि जो पटकथा आजकल लोग मेरे पास लेकर आ रहे हैं, ज़्यादातर उनमें से नए लोग हैं। नए लोगों के साथ मैंने हमेशा काम किया है। कई लोगों की मदद की और उन्हें प्रोत्साहित किया। उनमें से कई अच्छा काम कर रहे हैं।

लेकिन जो लोग मुझे पटकथा दे रहे हैं, उसमें से एक भी ऐसी नहीं लगी कि जिसे मैं छू सकूँ। तो कुल मिलाकर बात यह है कि मुझे घर पर बैठना पड़ रहा है, जब तक अनुराग अपनी फ़िल्म की शूटिंग शुरु न करें। इसका फ़ायदा यह उठा रहा हूँ कि अपना वज़न मैंने कम भी किया अनुराग की फ़िल्म के लिए। और कम करुंगा। घर के काम में हाथ बंटाने में मज़ा भी आ रहा है और संतुष्टि भी है। बीच में दो-चार व्यावसायिक मुलाक़ात कर रहा हूँ, स्क्रिप्ट पढ़ता हूँ और एक्सरसाइज़ करता हूँ। दिन इसी में निकल जाता है।

इस आशा में बैठा हूँ कि कोई नया या पुराना निर्देशक ऐसी स्क्रिप्ट दे, जिसे पढ़कर मैं उछलकर कमरे से बाहर आ जाऊँ। अभी ऐसा हो नहीं रहा है। अभी मेरे पास कुछ कहने को नहीं है। लेकिन इसी आशा में बैठा हूँ कि शायद कोई अगले ही पल आएगा या भाग्य ऐसा मेहरबान होगा कि पूरी एक लंबी पोस्ट ब्लॉग पर देने का मसाला मिल जाएगा। अपने इस हाल से मैं परेशान भी हूँ और आश्वस्त भी। परेशान इसलिए हूँ क्योंकि काम करने की चाह हमेशा रहती है और आश्वस्त इसलिए हूँ कि जो मुझे अच्छा नहीं लगता, वो नहीं कर रहा हूँ। फिर भी अच्छा होने की उम्मीद है। अच्छा काम आने की उम्मीद है। इसी उम्मीद के साथ...

आपका और सिर्फ़ आपका

मनोज बाजपेयी

19 comments:

रानी पात्रिक said...

काम का ना होना तो जी को बहुत सालता है इसमें क्या शक। आपका काम हमेशा बेजाड़ रहता है। मेरी ह्दय से कामना है कि आपके मन का काम आप तक अवश्य औैर अतिशीघ्र पहुँचे। शायद यह समय परिवार के साथ बने रहने का है तो वह भी सौभाग्य ही है आप जैसे बड़े और व्यस्त फिल्म वालों के लिए।

anoop joshi said...

असल में सर आपकी गलती नहीं है. कल ही एक सर्वे देखा कि सावन में ओरतो का मन बहुत ही आन्दित रहता है. तो सर जाहिर सी बात है, आदमी का मन तो कुछ गंभीर तो रहेगा ही . और कुछ नहीं सर सावन को जाने दीजिये, सब सही हो जायेगा. आपना ख्याल रखियेगा, इस बरसात में..............

महफूज़ अली said...

मनोज जी... नमस्कार....

बहुत दिनों के बाद आप दिखाई दिए... वैसे मेरा भी ब्लॉग पर आना अब कम हो गया है.....आजकल टाइम शौर्टेज बहुत है... इसीलिए.... लास्ट टाइम आपकी पोस्ट देखी थी राजनीति पर.... हालांकि मैंने फिल्म नहीं देखी... और सच कहूँ तो .... मैं पिछले अट्ठारह सालों से कोई हिंदी फिल्म नहीं देखी.... आखिरी फिल्म शायद मैंने आमिर खान की "जो जीता वोही सिकंदर" देखी थी... उस वक़्त ग्यारहवीं में पढ़ता था शायद... और आपकी फिल्म सत्य भी देखी है... लेकिन टुकड़ों में... मैं तो आपकी एक्टिंग के साथ ... आपकी हिंदी और ज़मीन से जुड़ा होने की वजह से आपको पसंद करता हूँ... और वैसे भी हम गोरखपुरिये.... आपके फैन तो हैं ही... अच्छा जब आपकी फिल्म आई थी ना...सत्या.... तो मुझे कई लोगों ने कहा गोरखपुर में कहा कि देख आओ ....देख आओं... लेकिन ... हम ठहरे पढ्वैया किस्म के लोग... तो हॉल में जाना शान के खिलाफ समझते थे... लेकिन... जब आपको पहली बार देखा ... उस फिल्म में डांस करते हुए ... तो सच कह रहा हूँ... आपका मुरीद हो गया...

अच्छा .... कई बार मैं सोचता भी हूँ... कि आप जैसे एक्टर को कितना कौम्प्रोमाइज़ करना पड़ता होगा... अभी आप स्क्रिप्ट की बात कर रहे हैं... और बहुत डिलेमा में हैं... मैं समझ सकता हूँ... जहाँ कभी ओरिजिनल स्क्रिप्ट होती ही नहीं है... वहां आपका ओरिजिनल होना ... और लाइव एक्टिंग करना ... आपके टैलेंट को सेकंडरी कर देता होगा.... मेरे समझ में नहीं आता... कि हमारे यहाँ कहानी की कोई कमी नहीं है... फिर लोग हॉलीवुड को क्यूँ कॉपी करते हैं? शायद दिमाग नहीं खर्च करना चाहते होंगे... और कॉपी तो कॉपी ही होती है... उसमें वो बात कहाँ... जो ओरिजिनल कहानी में होती है... जो भी हिंदी फिल्म देखो या पढो... तो वो किसी ना किसी हॉलीवुड फिल्म की रिमेक ही निकलती है... मैं सच बता रहा हूँ... मैं हर हिंदी फिल्म को बता दूंगा कि वो किस हॉलीवुड या साउथ इंडियन फिल्म की रिमेक है... यहाँ तक की सीन तक चुरा लेते हैं.... तो ऐसे में आपको अच्छी स्क्रिप्ट कहाँ मिलेगी... और जब अच्छी स्क्रिप्ट नहीं मिलेगी... तो लाज़िमी है कि आप जैसे टैलेंटेड इन्सान को टेंशन तो होगी ही होगी... तो मैं यही सोचता हूँ कि घटिया रिमेक देखने से अच्छा है कि ओरिजिनल फिल्म देख लो... इसलिए सारा इंटरेस्ट हॉलीवुड या फिर साउथ इंडियन मूविज़ में चला जाता है... मैंने श्री. विनय शुक्ला जी से स्क्रिप्ट राईटिंग सीखी है... वोही विनय शुक्ला जी जिन्होंने विरासत और गौड़मदर जैसी फ़िल्में बनाई हैं... आखिरी फिल्म उन्होंने बनाई थी... "कोई मेरे दिल से पूछे" और उन्होंने कहा था कि बस अब कोई फिल्म नहीं बनाऊंगा... क्यूंकि 'कोई मेरे दिल से पूछे " बनाकर वो बहुत टेंशन में आ गए थे... मैंने ख़ुद उन्हें एक-दो स्क्रिप्ट लिख कर दी थी... और उन्होंने कहा कि कोई फायदा ही नहीं है... यहाँ सब को रिमेक की स्क्रिप्ट चाहिए... और तुम इतना स्ट्रगल कर नहीं पाओगे..

वैसे आप परेशान मत होईये... कभी तो वक़्त बदलेगा... कोई ऐसी स्क्रिप्ट ज़रूर आएगी.... जिससे कि आप कमरे से बाहर निकल कर याहू स्टाइल में उछल पड़ें.... और जिस दिन उछलेंगे... तो बताइयेगा ज़रूर... मुझे उस दिन का इंतज़ार रहेगा...

महफूज़ अली said...

मनोज जी... नमस्कार....

बहुत दिनों के बाद आप दिखाई दिए... वैसे मेरा भी ब्लॉग पर आना अब कम हो गया है.....आजकल टाइम शौर्टेज बहुत है... इसीलिए.... लास्ट टाइम आपकी पोस्ट देखी थी राजनीति पर.... हालांकि मैंने फिल्म नहीं देखी... और सच कहूँ तो .... मैं पिछले अट्ठारह सालों से कोई हिंदी फिल्म नहीं देखी.... आखिरी फिल्म शायद मैंने आमिर खान की "जो जीता वोही सिकंदर" देखी थी... उस वक़्त ग्यारहवीं में पढ़ता था शायद... और आपकी फिल्म सत्य भी देखी है... लेकिन टुकड़ों में... मैं तो आपकी एक्टिंग के साथ ... आपकी हिंदी और ज़मीन से जुड़ा होने की वजह से आपको पसंद करता हूँ... और वैसे भी हम गोरखपुरिये.... आपके फैन तो हैं ही... अच्छा जब आपकी फिल्म आई थी ना...सत्या.... तो मुझे कई लोगों ने कहा गोरखपुर में कहा कि देख आओ ....देख आओं... लेकिन ... हम ठहरे पढ्वैया किस्म के लोग... तो हॉल में जाना शान के खिलाफ समझते थे... लेकिन... जब आपको पहली बार देखा ... उस फिल्म में डांस करते हुए ... तो सच कह रहा हूँ... आपका मुरीद हो गया...

अच्छा .... कई बार मैं सोचता भी हूँ... कि आप जैसे एक्टर को कितना कौम्प्रोमाइज़ करना पड़ता होगा... अभी आप स्क्रिप्ट की बात कर रहे हैं... और बहुत डिलेमा में हैं... मैं समझ सकता हूँ... जहाँ कभी ओरिजिनल स्क्रिप्ट होती ही नहीं है... वहां आपका ओरिजिनल होना ... और लाइव एक्टिंग करना ... आपके टैलेंट को सेकंडरी कर देता होगा.... मेरे समझ में नहीं आता... कि हमारे यहाँ कहानी की कोई कमी नहीं है... फिर लोग हॉलीवुड को क्यूँ कॉपी करते हैं? शायद दिमाग नहीं खर्च करना चाहते होंगे... और कॉपी तो कॉपी ही होती है... उसमें वो बात कहाँ... जो ओरिजिनल कहानी में होती है... जो भी हिंदी फिल्म देखो या पढो... तो वो किसी ना किसी हॉलीवुड फिल्म की रिमेक ही निकलती है... मैं सच बता रहा हूँ... मैं हर हिंदी फिल्म को बता दूंगा कि वो किस हॉलीवुड या साउथ इंडियन फिल्म की रिमेक है... यहाँ तक की सीन तक चुरा लेते हैं.... तो ऐसे में आपको अच्छी स्क्रिप्ट कहाँ मिलेगी... और जब अच्छी स्क्रिप्ट नहीं मिलेगी... तो लाज़िमी है कि आप जैसे टैलेंटेड इन्सान को टेंशन तो होगी ही होगी... तो मैं यही सोचता हूँ कि घटिया रिमेक देखने से अच्छा है कि ओरिजिनल फिल्म देख लो... इसलिए सारा इंटरेस्ट हॉलीवुड या फिर साउथ इंडियन मूविज़ में चला जाता है... मैंने श्री. विनय शुक्ला जी से स्क्रिप्ट राईटिंग सीखी है... वोही विनय शुक्ला जी जिन्होंने विरासत और गौड़मदर जैसी फ़िल्में बनाई हैं... आखिरी फिल्म उन्होंने बनाई थी... "कोई मेरे दिल से पूछे" और उन्होंने कहा था कि बस अब कोई फिल्म नहीं बनाऊंगा... क्यूंकि 'कोई मेरे दिल से पूछे " बनाकर वो बहुत टेंशन में आ गए थे... मैंने ख़ुद उन्हें एक-दो स्क्रिप्ट लिख कर दी थी... और उन्होंने कहा कि कोई फायदा ही नहीं है... यहाँ सब को रिमेक की स्क्रिप्ट चाहिए... और तुम इतना स्ट्रगल कर नहीं पाओगे..

वैसे आप परेशान मत होईये... कभी तो वक़्त बदलेगा... कोई ऐसी स्क्रिप्ट ज़रूर आएगी.... जिससे कि आप कमरे से बाहर निकल कर याहू स्टाइल में उछल पड़ें.... और जिस दिन उछलेंगे... तो बताइयेगा ज़रूर... मुझे उस दिन का इंतज़ार रहेगा...

महफूज़ अली said...

मनोज जी... नमस्कार....

बहुत दिनों के बाद आप दिखाई दिए... वैसे मेरा भी ब्लॉग पर आना अब कम हो गया है.....आजकल टाइम शौर्टेज बहुत है... इसीलिए.... लास्ट टाइम आपकी पोस्ट देखी थी राजनीति पर.... हालांकि मैंने फिल्म नहीं देखी... और सच कहूँ तो .... मैं पिछले अट्ठारह सालों से कोई हिंदी फिल्म नहीं देखी.... आखिरी फिल्म शायद मैंने आमिर खान की "जो जीता वोही सिकंदर" देखी थी... उस वक़्त ग्यारहवीं में पढ़ता था शायद... और आपकी फिल्म सत्य भी देखी है... लेकिन टुकड़ों में... मैं तो आपकी एक्टिंग के साथ ... आपकी हिंदी और ज़मीन से जुड़ा होने की वजह से आपको पसंद करता हूँ... और वैसे भी हम गोरखपुरिये.... आपके फैन तो हैं ही... अच्छा जब आपकी फिल्म आई थी ना...सत्या.... तो मुझे कई लोगों ने कहा गोरखपुर में कहा कि देख आओ ....देख आओं... लेकिन ... हम ठहरे पढ्वैया किस्म के लोग... तो हॉल में जाना शान के खिलाफ समझते थे... लेकिन... जब आपको पहली बार देखा ... उस फिल्म में डांस करते हुए ... तो सच कह रहा हूँ... आपका मुरीद हो गया...

अच्छा .... कई बार मैं सोचता भी हूँ... कि आप जैसे एक्टर को कितना कौम्प्रोमाइज़ करना पड़ता होगा... अभी आप स्क्रिप्ट की बात कर रहे हैं... और बहुत डिलेमा में हैं... मैं समझ सकता हूँ... जहाँ कभी ओरिजिनल स्क्रिप्ट होती ही नहीं है... वहां आपका ओरिजिनल होना ... और लाइव एक्टिंग करना ... आपके टैलेंट को सेकंडरी कर देता होगा.... मेरे समझ में नहीं आता... कि हमारे यहाँ कहानी की कोई कमी नहीं है... फिर लोग हॉलीवुड को क्यूँ कॉपी करते हैं? शायद दिमाग नहीं खर्च करना चाहते होंगे... और कॉपी तो कॉपी ही होती है... उसमें वो बात कहाँ... जो ओरिजिनल कहानी में होती है... जो भी हिंदी फिल्म देखो या पढो... तो वो किसी ना किसी हॉलीवुड फिल्म की रिमेक ही निकलती है... मैं सच बता रहा हूँ... मैं हर हिंदी फिल्म को बता दूंगा कि वो किस हॉलीवुड या साउथ इंडियन फिल्म की रिमेक है... यहाँ तक की सीन तक चुरा लेते हैं.... तो ऐसे में आपको अच्छी स्क्रिप्ट कहाँ मिलेगी... और जब अच्छी स्क्रिप्ट नहीं मिलेगी... तो लाज़िमी है कि आप जैसे टैलेंटेड इन्सान को टेंशन तो होगी ही होगी... तो मैं यही सोचता हूँ कि घटिया रिमेक देखने से अच्छा है कि ओरिजिनल फिल्म देख लो... इसलिए सारा इंटरेस्ट हॉलीवुड या फिर साउथ इंडियन मूविज़ में चला जाता है... मैंने श्री. विनय शुक्ला जी से स्क्रिप्ट राईटिंग सीखी है... वोही विनय शुक्ला जी जिन्होंने विरासत और गौड़मदर जैसी फ़िल्में बनाई हैं... आखिरी फिल्म उन्होंने बनाई थी... "कोई मेरे दिल से पूछे" और उन्होंने कहा था कि बस अब कोई फिल्म नहीं बनाऊंगा... क्यूंकि 'कोई मेरे दिल से पूछे " बनाकर वो बहुत टेंशन में आ गए थे... मैंने ख़ुद उन्हें एक-दो स्क्रिप्ट लिख कर दी थी... और उन्होंने कहा कि कोई फायदा ही नहीं है... यहाँ सब को रिमेक की स्क्रिप्ट चाहिए... और तुम इतना स्ट्रगल कर नहीं पाओगे..

उद्गार said...

आरक्षण किस तरह की फ़िल्म है,सर? अमिताभ बच्चन जी इसमें कौन सी भूमिका निभा रहे हैं?

सुनील गज्जाणी said...

सम्मानिय मनोज जे ,
नमस्कार !
ये सही है कि एक अच्छे कलाकार को जब तक अच्छी कहानी नहीं मिल जाती वो संतुष्ट नहीं होता भले ही वो बेकार बैठा हो . महार सर आज अच्छी कहानी कम ही होती है जो होती है उसमे प्रयोग होते है , आप कि अकीद फैक्ट्री देखि थी , वैसे मैं आप कि लग भाग फिल्मे देखि है , आप स्तागे के कलाकार है इस लिए आप के लिए कोई भी मुश्किल नहीं है , आप के अभिनय को सलाम है , अच्छी कहानी के बारे में अपनी एक बात आप से सांझा करना चचुगा कि मैं एक ड्रामा व्रिटर हूँ और नेशनल लेवल कि नाट्य प्रतियोगिता में मेरा लेखन सराहा गया है वो भी '' प्रथम '' पुरस्कार से . मगर जब मैंने एक चेनेल से संपर्क किया सीरियल के लिए तो ताल मटोल कर गए . जब कि मेरी कहानी हट कर थी जो आज कि देखेजा रही कहानियों से अलग थी , जब कि नाट्य प्रदर्शन कि बात हो तो अगर कोई किसी ग्रुप से जुड़ा होतो आप कि कहानी कि मंचन भी होगा ,अन्यथा नहीं , ये मेरा निजी अनुभन है जो आप का साँझा कर सव्व्य्म का मान बढा रहा हूँ . मनोज जी आप कि एक फिल्म भी कई फिल्मो के बराबर है जैस एकी '' राज नीति '' आप कि इमागे ज़हन में रहती है , हम जैसे आप के प्रशंशक आप को हर समय ज़हन में रखते है , मगर एक फिल्म एक साल में शायद कम है , मगर दिलीप साब कि तरह एक भी भारी होती है बाकी हीरो पे . बस ऐसी कहानी हो जैसे कि'' सत्या ''' एक सवाल भी है कि आप कि इच्छा किस प्रकार कि कहानी कि है कि ये '' मेरी पसंद है '' सर ये आप से व्यक्तिगत है आप को इतना देखा है कि आप से अपना पण लगता है इस लिए आप से पूछने का साहस द किया . क्या आप हम से सांझा करंगे ? प्रतीक्षा में
सादर

सुनील गज्जाणी said...

सम्मानिय मनोज जे ,
नमस्कार !
ये सही है कि एक अच्छे कलाकार को जब तक अच्छी कहानी नहीं मिल जाती वो संतुष्ट नहीं होता भले ही वो बेकार बैठा हो . महार सर आज अच्छी कहानी कम ही होती है जो होती है उसमे प्रयोग होते है , आप कि अकीद फैक्ट्री देखि थी , वैसे मैं आप कि लग भाग फिल्मे देखि है , आप स्तागे के कलाकार है इस लिए आप के लिए कोई भी मुश्किल नहीं है , आप के अभिनय को सलाम है , अच्छी कहानी के बारे में अपनी एक बात आप से सांझा करना चचुगा कि मैं एक ड्रामा व्रिटर हूँ और नेशनल लेवल कि नाट्य प्रतियोगिता में मेरा लेखन सराहा गया है वो भी '' प्रथम '' पुरस्कार से . मगर जब मैंने एक चेनेल से संपर्क किया सीरियल के लिए तो ताल मटोल कर गए . जब कि मेरी कहानी हट कर थी जो आज कि देखेजा रही कहानियों से अलग थी , जब कि नाट्य प्रदर्शन कि बात हो तो अगर कोई किसी ग्रुप से जुड़ा होतो आप कि कहानी कि मंचन भी होगा ,अन्यथा नहीं , ये मेरा निजी अनुभन है जो आप का साँझा कर सव्व्य्म का मान बढा रहा हूँ . मनोज जी आप कि एक फिल्म भी कई फिल्मो के बराबर है जैस एकी '' राज नीति '' आप कि इमागे ज़हन में रहती है , हम जैसे आप के प्रशंशक आप को हर समय ज़हन में रखते है , मगर एक फिल्म एक साल में शायद कम है , मगर दिलीप साब कि तरह एक भी भारी होती है बाकी हीरो पे . बस ऐसी कहानी हो जैसे कि'' सत्या ''' एक सवाल भी है कि आप कि इच्छा किस प्रकार कि कहानी कि है कि ये '' मेरी पसंद है '' सर ये आप से व्यक्तिगत है आप को इतना देखा है कि आप से अपना पण लगता है इस लिए आप से पूछने का साहस द किया . क्या आप हम से सांझा करंगे ? प्रतीक्षा में
सादर

जयकृष्ण राय तुषार said...

manoj ji aisa sabhi lekhakon ke saath hota hai lekh achcha hai

Anand Rathore said...

sach kahun toh udaas hoon bhi nahi...aur chain se din kat rahe ho yun bhi nahi....

kabhi kabhi aisa hota hai...hope to meet you soon with good script...main tripathiji ke madhayam se aapse sampark jaldi karunga.. best of luck

शिवम् मिश्रा said...

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

Hindia said...

आपके पास समस्या यह है कि कोई छू-लेने लायक पटकथा नहीं आ रही और मेरी समस्या है कि मेरी पटकथाएं जिन्हें मै मानता हूँ कि सर माथे पर उठा लेना चाहिऐ था उन्हें किसी को भेजता हूँ तो वो पढता नहीं है और ऑफिस या घर जाओ तो मिलता नहीं है.. हालाँकि हम दोनों कि समस्या चिट-पट (हेड एंड टेल्स) जैसी है, जबकि आपने इस कुंद से बचने के लिए घर के कामों में हाथ बंटाकर क्षणिक संतुष्टी का रास्ता ढूंडा है और मैने अपना हाथ तोड़कर जिससे मै कभी लिखा करता था, खेर प्लास्टर चढ़ा है महीने भर मै उसे ठीक हो जाना चाहिऐ.

din.sourabh@gmail.com

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

आदरणीय मनोज जी, यह तो प्रायः हर क्रियेटिव आदमी के साथ होता है। कभी कभी कुछ भी नया लिखने करने का मन नहीं करता--लेकिन कुछ ही समय के लिये यह स्थिति रहती है। जैसे ही दिमाग में नया आइडिया आया और ---तुरंत व्यक्ति सक्रिय।----सोचता हूं कभी आपके साथ कुछ काम कर सकूं ---चाहे स्क्रिप्ट पर या प्रोडक्शन में। क्या आप बच्चों के लिये कोई फ़िल्म कभी करेंगे? आप अपना कुछ पता दें तो आपसे बात करने का सौभाग्य मिले। शुभकामनायें।
drkumarhemant@yahoo.com

काजल कुमार Kajal Kumar said...

लिखा तो खै़र तभी जाएगा जब कुछ कहने को हो...बहरहाल, मैं ऐसे में पढ़ता हूं :-)

rahul said...

very good

rahul said...

very very good.. u r very very honest actor best luck..

Nitin Tyagi said...

Bhaiya Raam Raam, Aaj Subah Subah Aapki Photo Time of India Main Dekhi to man kiya kuch baat ki jaye
Aap Aajkal Khali hai sunbar man kuch khatta sa hua, lakin kabhi kabhi khali samay bhi hona zaroori hai usme aadmi apna aatm chintan kar saqta hai apni family to full time de saqta hai, hum log to bas dua kar saqte hain ke aapo koi badhiya rol offeer kare, aap tehre maje hua, zameen se jude hua kalakaar, aap ko aira gaira rol to karna bhi nahi chahiye aur na aap karenge, himmat raakho jab andhera hota hai to ek nannhi se roshni andhere ko chirte hue naya ujala laati hai

रूप said...

शानदार पोस्ट है, साधुवाद, कभी यहाँ भी पधारें. roop62 .blogspot .com

dheeraj bawra said...

dear manoj bhai namashkar apka blog mujhe bahut accha lagta hai meri har samasya ka samadhan apke blog main hai main apko bahut aadar deta hun mera naam dheeraj bawra hai main mathura main rehta hun aur ek divoshnal aur gazal singer hun sangeet jagat ke kai awards jeete hai par man kuch karne ke liye abhi asantust hai aap kabhi mathura aaye to jarur sampark karen mujhe banke bihari ke darshan karake anand ki anubhuti hogi. dheeraj bawra8057526152