Sunday, October 17, 2010

"दस तोला"

हाल में कई राजनीतिक दलों का प्रस्ताव आया कि मैं उनके लिए बिहार चुनावों में प्रचार करुं। लेकिन, मन माना नहीं। मीडिया के अलग-अलग चैनलों और अखबारों के जरिए मैंने अपना संदेश बिहार की जनता तक पहुंचाने की कोशिश की है। आशा है कि वो मतदान के अधिकार का सही इस्तेमाल करेंगे। सही उम्मीदवार को, बिना आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार का चुनाव करेंगे।

इस बीच मैं रामायण थ्री डी एनिमेशन फिल्म के प्रचार प्रसार में लगा। फिल्म इसी शुक्रवार को प्रदर्शित हुई है। उसकी भूरि भूरि प्रशंसा हो रही है। मैं सभी माताओं-पिताओं से अपील करुंगा कि वो बच्चों को यह फिल्म दिखाएं क्योंकि न केवल यह एनिमेशन की दुनिया में क्रांति है बल्कि बच्चों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से परीचित कराने का इससे बेहतर क्या माध्यम हो सकता है। इस फिल्म में मैंने भगवान राम के किरदार को अपनी आवाज़ दी है।

वैसे, अब मेरा पूरा ध्यान ‘दस तोला’ पर है। दस तोला एक छोटी किंतु बहुत ही सुंदर फिल्म बन पड़ी है। शायद सिनेमा के इतिहास में पहली बार एक सुनार फिल्म की कहानी के केंद्र में होगा। यह एक सुनार की कहानी है। सुनार के प्यार की कहानी है। सुनार के घरबार की कहानी है। अपनों से ही दुत्कार की कहानी है। उसके सोने के हार की कहानी है। कैसे एक दस तोले सोने का हार, जो बनाता है, उसके जीवन को पलट कर रख देता है। इसकी कहानी है दस तोला। पैंतीस दिनों की शूटिंग के बाद यह फिल्म बनी। ज्यादा ताम झाम नहीं है फिल्म में। सीधी सीधी कहानी और सीधा सीधा मनोरंजन है। कहानी का सार यही है कि शरीफ आदमी के धैर्य की परीक्षा न लें। शरीफ आदमी के प्यार की परीक्षा न लें। मैं इस फिल्म के चुनाव से बहुत संतुष्ठ और खुश हूं। खुश हूं कि मैंने ऐसी कहानी ही नहीं चुनी बल्कि ऐसा निर्देशक यानी अजय वर्मा को भी चुना, जो नयी कहानी कहाना चाहता है, नयी तरीके की फिल्म बनाना चाहता है। निर्देशक अजय लोककथाओं, कस्बों और गांवों की कहानी कहना चाहते हैं, जो आजकल कम ही दिखायी देते हैं सिनेमा के पर्दे पर। शहर के लोगों को उनकी जीवन की सारी सुविधाएं शहर में ही मिल जाती हैं. तो सिवाय विदेश जाने के वो किसी और चीज के बारे में सोचते ही नहीं। गांव जाना तो दूर की बात, गांव की सरहद से भी गुजरना वो उचित नहीं समझते। 

दस तोला में सभी कलाकारों ने बहुत ही अच्छा काम किया है। इस फिल्म के जरिए एक नयी लड़की का फिल्म जगत में आगमन हो रहा है। पल्लवी शारदा। पल्लवी आस्ट्रेलिया में पली बढ़ी हैं। कानून की शिक्षा ली है और भरतनाट्यम में पारंगत हैं। मैं तो बस इस फिल्म के प्रचार प्रसार में लगा हूं। सोमवार को इसी फिल्म के लिए दिल्ली और मेरठ जाना होगा। आप सोचेंगे कि मेरठ क्यों ? दरअसल, इस फिल्म के निर्माता मेरठ के हैं और उनकी बहतु सारी जमीन- जायदाद मेरठ में है। मजा आएगा मेरठ में। मैं पहली बार वहां इतनी देर रकूंगा। लोगों से रुबरु होऊंगा। मैं सबसे ज्यादा इंतजार कर रहा हूं बाजरे की रोटी, सब्जी और लहसन-मिर्जी का। उसके बाद एक ग्लास लस्सी मिल जाए तो कहना ही क्या ! पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खासियत है कि खाना जितना सादा होता है,उतनी ही मन को भाता है।

बहरहाल,अभी तो सिर्फ दस तोला ही दिमाग में घूम रही है। आगे की जानकारी से आप सभी को अवगत कराता रहूंगा। आप पूरे परिवार के साथ फिल्म देखिए और इसका पूरा आनंद उठाइए।

फिलहाल,इतना ही....

आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

21 comments:

Anand Rathore said...

मनोज जी मुबारक हो... कल आपको कॉल करता हूँ..अगर वक़्त हो तो मिल लीजिये... देल्ही आ रहे हैं तो एक और फिल्म की चर्चा हो जाए..

राजीव तनेजा said...

शुभ कामनाएँ 'दस तोला' के लिए ...
ऐसी ही ज़मीन से जुडी फिल्में करते रहिये... बड़े परदे पर आपको देखना एक सुखद एहसास देता है

Tarkeshwar Giri said...

मनोज जी आपको मेरा नमस्कार

सही कर रहे हैं आप, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगो कि बात ही निराली हैं, बहुत ही अच्छे दिल वाले लोग रहते हैं इधर. खूब अन्नंद लीजियेगा. कल महुवा चैनल पे आप को भोजपुरी में बात करते हुए देखा तो बहुत ही अच्छा लगा.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अगर राजनीति में जाने का विचार हो तो प्रचार ठीक है वरना तंबाकू की खपत बढ़ाने के लिए तुलसी के पौधे लगाने की क्या तुक ? और यूं भी राजनीति में लोग तभी जाते हैं जब कुछ और के काबिल नहीं बचते या कोई फिर कोई स्वार्थ निकालना ज़रूरी हो गया हो.
दस तोला हेतु ढेरों मंगलकामनाएं.

amitesh said...

फिल्म के चुनाव में बरति सतर्कता उचित ही है. रामायण में आपकी आवाज सुनने के लिए उत्साहित हूँ.

RA said...

बच्चों को सांस्कृतिक धरोहर से परिचित करवाने वाला ख्याल नेक है|
गाँवों एवं कस्बई शहरों को पृष्टभूमि बनाकर फ़िल्में बने तो उनमें एक(भारतीय)मौलिकता रहेगी अन्यथा तो ज़्यादातर हिन्दी सिनेमा हॉलीवुड की कहानियों की तोड़ मरोड़ बनकर रह जाते हैं|
Looking forward to watch Raamayan and Dus Tola. All the best to you and and do keep writing.

शैलेन्द्र नेगी said...

manoj ji bahut sahi likha aapne...

विरेन्द्र सिंह चौहान said...

मनोज जी... मैं भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही हूँ .आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा .
दस तौला के लिए आपको शुभकामनाएँ.

javed said...

भाई, बेहतरीन फिल्म है....शुभकामाएँ

T. Rajneesh said...

मनोज जी बधाई,
सुर संग्राम में आपको भोजपुरी में बोलते सुनकर तबीयत मस्त हो गई। गोपालगंज के बनियाछापर (सेमरा बाजार-कटयां) स्थित अपने गांव में बचपन की गर्मी की छुट्टियां याद आ गईं। इसी उच्चारण और मिठास से भरी होती थी लोगों की बतकही। आपकी बातें और संस्मरण सुनकर आपके संघर्ष का पता चला जो सबके लिए प्रेरक है। आपसे बातचीत करने की इच्छा एक पत्रकार के रूप में है। मेरा मोबाइल नंबर ०९४१५२२५२८१ है। यदि संभव हो तो कुछ पल निकालें और वार्ता करें।

रजनीश त्रिपाठी, उप समाचार संपादक, दैनिक जागरण, वाराणसी

punit said...

Sir,
Hum aapki Dus Tola Movie jarur dekhenge. Aapki movie me hamesha kuchh nayapan hota hai...Sir aapko bahut dino ba TV Show Comedy Circus par dekha...Bahut achha laga..

सुनील गज्जाणी said...

regarding aur aur praiya
maonj jee
pranam !
aap ki '' das tole '' ki pratiksha hai , ek saaf suthari aur aam aadami ki film ki pratiksha hai ,
film ki saflta ki hum kaman karte hai , aur agreem badhai
thanks

Kunal........ Struggling For Her......... said...

Dear Bhaiya j,
very first i would like to salute you, for your dedication about right movies, always your movies are forcing we people to think for something.apke baare me mera ek vichhar hai,ki aap bettiah ke sacche saput hai, jo pehchan apne bettiah aur K.R.High school ko diya wo bade bade doctors engineers nahee de paye, jab kabhee aap bettiah K.R ka naam lete hai accha lagta hai.mai bhee K.R.se pass out hoo (2001 batch)Engineering kar ke job kar raha hoo delhi me, aur saath hee saath aapka bada fan hoo saree movies dekhta hoo apki, ek baat aur kehna chahta hoo jab bhee mai bahar ke state wale dosto means banlorian marathi logo se ye kehta hoo ki aap mere hometown se ho, toh wo kabhee is baat pe vishwas hee nahee ulte mujhe hee jhootha bata dete hai, aapek baar reply unsabko chup kar djye, nahee kar paye tab bhee koi baat nahee bihari hoon naa woh bhee bettiah ka khanti bhojpuriya "aaapan baat manwayee lame " hasee aayeel ki naa bhaiya aur ek baat ab se ham haneshe raura ke scrap kayeel karem regular. aur haa kabhee bettiah aayee ta k.r. jarroor ayyee bada accha lagi hamanee ke, aur last me bhagwan se prarthana ba ki rura carrer ke udan me Amitabh j se bhee aage jayee.
rauur
Kishor kunal
Wishing You Happy Dipawli
Bhabhee ke Bhee Bol Dem.

गिरीश बिल्लोरे said...

“नन्हें दीपों की माला से स्वर्ण रश्मियों का विस्तार -
बिना भेद के स्वर्ण रश्मियां आया बांटन ये त्यौहार !
निश्छल निर्मल पावन मन ,में भाव जगाती दीपशिखाएं ,
बिना भेद अरु राग-द्वेष के सबके मन करती उजियार !!
हैप्पी दीवाली-सुकुमार गीतकार राकेश खण्डेलवाल

ana said...

shubhakamnaaye

jitendrajha jitu(akshra arts) said...

eleaction me gaao me tha.pahli baar vote dala.hamesha apki film ka pahla sho dekhta hu..is baar nahi dkh paya.sorry....dvd lekar dekhunga..waise pichle dino jugaad ki dvd khardi..film behad bakwas the...patna me gyan bhaiya se milne gaya tha..apke bare me baat hue...anurag ke saath apki film ka besabri se intazar hai...

marziya jafar said...

hi manoj das tola is a very nice...

Poorviya said...

kuck kuch likha karo.

maahi said...

nice n absolutaly again i hv to say......nice acting keep it bajpai n try to hold d liabilities to do well ....

Kunal........ Struggling For Her......... said...

Dear Manoj j,
it's always be nice to say something, to you. Now i have been feeling you have to concentrate upon serious as well as funny movies, think for it.

Wishing for your Right and shining future.
Kishor Kunal
+91-9311742453

कौशलेन्द्र said...

बाजपेयी जी ! राजनीती से तनी बच के रहिह हो ....नीमन चीज़ नईं खे. काजल के कोठरी ह.
हम राउर के फिलम देखले बानी .....मौक़ा मिली त इहो देखब !
हमार शुभ कामना !
बिहार के ...भोजपुरी के अ देस के नाम ऊंचा करत रहिह ....