Thursday, August 12, 2010

लिखने में नहीं लागे मन...

आजकल कुछ लिखने का मन नहीं करता। मस्तिष्क में ऐसी कोई बात नहीं आ रही है, जिसे ब्लॉग पर लिखकर मन की भड़ास निकाली जा सके। बुद्धि कुंद-सी है। न किसी तरह की क्रिया कर रही है और न किसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है। ऐसा होते-होते कुछ समय निकल गया। फिर लगा कि नहीं, लिखने के दबाव में ही कुछ-न-कुछ लिख दिया जाए।

शायद यह इसलिए भी हो रहा है कि अभी मेरा सारा ध्यान अपने परिवार की ओर लगा हुआ है। दूसरे काम मेरी प्राथमिकता के दायरे में आ ही नहीं रहे हैं... और अच्छा भी लगता है घर पर समय बिताना। आजकल किसी फ़िल्म की शूटिंग चल नहीं रही है। अनुराग कश्यप ने अपनी फ़िल्म की शूटिंग की तारीख़ आगे बढ़ा दी है और आज ही पता चला कि प्रकाश झा ने अपने अगली फ़िल्म ‘आरक्षण’ की शूटिंग जनवरी के मध्य से शुरु करने की घोषणा कर दी है। उनका इस संदर्भ में फ़ोन भी आया था।

उनके फ़ोन के बाद अचानक मैं अपनी नींद से जागा। अपने नाकारा बदन और मस्तिष्क को जगाने की कोशिश भी की कि इस बीच किया क्या जाए? क्योंकि जो पटकथा आजकल लोग मेरे पास लेकर आ रहे हैं, ज़्यादातर उनमें से नए लोग हैं। नए लोगों के साथ मैंने हमेशा काम किया है। कई लोगों की मदद की और उन्हें प्रोत्साहित किया। उनमें से कई अच्छा काम कर रहे हैं।

लेकिन जो लोग मुझे पटकथा दे रहे हैं, उसमें से एक भी ऐसी नहीं लगी कि जिसे मैं छू सकूँ। तो कुल मिलाकर बात यह है कि मुझे घर पर बैठना पड़ रहा है, जब तक अनुराग अपनी फ़िल्म की शूटिंग शुरु न करें। इसका फ़ायदा यह उठा रहा हूँ कि अपना वज़न मैंने कम भी किया अनुराग की फ़िल्म के लिए। और कम करुंगा। घर के काम में हाथ बंटाने में मज़ा भी आ रहा है और संतुष्टि भी है। बीच में दो-चार व्यावसायिक मुलाक़ात कर रहा हूँ, स्क्रिप्ट पढ़ता हूँ और एक्सरसाइज़ करता हूँ। दिन इसी में निकल जाता है।

इस आशा में बैठा हूँ कि कोई नया या पुराना निर्देशक ऐसी स्क्रिप्ट दे, जिसे पढ़कर मैं उछलकर कमरे से बाहर आ जाऊँ। अभी ऐसा हो नहीं रहा है। अभी मेरे पास कुछ कहने को नहीं है। लेकिन इसी आशा में बैठा हूँ कि शायद कोई अगले ही पल आएगा या भाग्य ऐसा मेहरबान होगा कि पूरी एक लंबी पोस्ट ब्लॉग पर देने का मसाला मिल जाएगा। अपने इस हाल से मैं परेशान भी हूँ और आश्वस्त भी। परेशान इसलिए हूँ क्योंकि काम करने की चाह हमेशा रहती है और आश्वस्त इसलिए हूँ कि जो मुझे अच्छा नहीं लगता, वो नहीं कर रहा हूँ। फिर भी अच्छा होने की उम्मीद है। अच्छा काम आने की उम्मीद है। इसी उम्मीद के साथ...

आपका और सिर्फ़ आपका

मनोज बाजपेयी