Thursday, September 16, 2010

एक सपना सर्वोत्तम बिहार का

कई दिनों से लिखना नहीं हो रहा है। न मन में कोई उम्माद उमड़ा और न किसी बात पर गुस्सा आ रहा था। न ही ऐसा लगा कि किसी व्यक्तिगत बात पर लिखूं। थोड़ी पारिवारिक व्यस्तताएं हैं, और थोड़ी व्यवसायिक उलझनें। इस बीच बिहार में चुनाव का ऐलान हो गया है। मीडिया से जुड़े कई लोगों ने मुझसे कहा कि मुझे बिहार के राजनीतिक हालात पर कुछ लिखना चाहिए। लेकिन, मेरा कहना है कि मैं कोई राजनीतिक समीक्षक तो हूं नहीं। सिर्फ एक आम बिहारी हूं, जो अपनी रोजी रोटी की तलाश में मुंबई आया हुआ है। मुंबई में बैठकर बिहार की राजनीतिक समीक्षा करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
वैसे, बिहार से कटा मैं कभी नहीं रहा। अपने गृह राज्य के बारे में पढ़ता रहता हूं। जो देखता-पढ़ता हूं, उसी को आधार बनाकर कभी कभार बातें भी कर लेता हूं। बहुत सारे मेरे बुद्धिजीवी मित्र हैं, जिनका बिहार से खास नाता है। उनसे लगातार बातचीत होती रहती है। और उनकी बातों से भी बिहार की स्थिति-परिस्थिति के बारे में पता चलता रहता है।

चुनाव जब भी आते हैं, लोग कहते हैं कि आप कुछ बोलें। कुछ टिप्पणी करें चुनाव से जुड़े मुद्दों पर। लेकिन चुनाव तो हर पांच साल बाद आते हैं और चले जाते हैं। सवाल यह है कि क्या कुछ काम हुआ? बात यह है कि क्या भविष्य में काम होगा ? अगर काम हुआ है तो उसकी भरपूर प्रशंसा होनी चाहिए। आम लोगों तक तरक्की के ग्राफ की सूचना पहुंचनी चाहिए। लेकिन, अगर काम नहीं हुआ तो उसकी भी खुले मन से निंदा होनी चाहिए।

मेरा मानना है कि अगर आप सरकार के राजकाज के तरीके से सहमत हैं या नहीं है तो इसे व्यक्त करें। सरकार की निंदा या प्रशंसा चुनाव के वक्त लोग अपने वोट के जरिए कर सकते हैं। मेरा निवेदन है हर बिहारवासी से कि वो चुनाव के दौरान थोड़ी तकलीफ उठाए और अपने मन के विचार को वोट में तब्दील कर ईवीएम का बटन दबाए।

निश्चित तौर पर मेरे लिए किसी भी राजनीतिक पार्टी का पक्ष लेना मुश्किल है। मेरा मानना है कि जो भी काम करेगा, बिहार में रहने वाली जनता उसका भरपूर साथ देगी। और जो जनता को विश्वास में नहीं लेगा, वो बाहर जाएगा। चुनाव में यही तो होता है। राजनेता चाहे जो समझें, पर जनता को धोखे में रखना संभव नहीं है।

मैं अपनी तरफ से सारी राजनीतिक पार्टियों से निवेदन कर सकता हूं कि वो राज्य के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। गरीबी हटाएं,भुखमरी हटाएं, बेरोजगारी हटाएं। किसानों को सुविधाएं दें। सबको समान शिक्षा दिलाने की व्यवस्था करें। पटना-गया-मुजफ्फरपुर-दरभंगा-हजारीबाग-बेतिया-इन सब शहरों का नवीनीकरण करें। पर्यटकों को लुभाने वाली जितनी भी योजनाएं हो सकती हैं, उन पर विशेष काम करें। बिहार का इतिहास कोई दस-पचास साल का तो है नहीं कि इसे करने में कोई बड़ी परेशानी हो। भगवान बुद्ध से लेकर सीता मैया और मौर्यवंश से जुड़े सारे अवशेष पड़े हैं। सारी जगह मौजूद हैं। नालंदा-गया को हवाई रास्ते से जोड़ना चाहिए। एक बार विश्व के नक्शे पर बिहार पर्यटकों के लिए बेहतरीन राज्य के तौर पर उभर गया तो फिर राजस्व का बढ़ा स्रोत मिलेगा। और कई किस्म के रोजगार निर्मित होंगे।

दरअसल, करने के लिए तो बहुत कुछ है। जो भी सरकार बनाए, वो इन सब बातों पर ध्यान दें। मैं तो एक काम आदमी के नाते यही निवेदन कर सकता हूं। मैंने पिछले दिनों मुख्यमंत्री जी को एक ज्ञापन दिया था। कई बातें थीं उसमें। मेरा निवेदन होगा कि अगर वो सरकार में वापस आएं तो उस पर जरुर ध्यान दें। कोई और सत्ता संभाले तो संभव हो तो वो भी ज्ञापन पर ध्यान दें। हर बिहारवासी की तरह से मेरी भी दिली तमन्ना है कि मैं अपनी ही जिंदगी में बिहार को सर्वोत्तम राज्य होते हुए देखूं। ये एक सपना है। क्या यह सपना कभी पूरा हो पाएगा? शायद होगा। जरुर होगा। आशावादी आदमी हूं इसलिए उम्मीद कभी नहीं छोडूंगा।