Sunday, November 28, 2010

मुझे सपनों पर बहुत विश्वास है

बिहार में नीतीश कुमार जी की सरकार बनने के बाद बहुत सारे दोस्तों से बात हुई। सभी में उत्साह है। और उस उत्साह का पता टेलीविजन के माध्यम से भी पता चल रहा है। अमूमन ऐसा होता है कि हम उम्मीदें बहुत करते हैं और उस उम्मीद पर कोई जरा सी भी चूक रह जाती है तो हम फिर से आलोचना के लिए खड़े हो जाते हैं। उम्मीदें उतनी ही रखें जितना पांच साल में हुआ है। चाहे वो किसी की भी सरकार हो, चमत्कार तो कोई कर नहीं सकता। लेकिन, इस बात की खुशी है कि बिहार में रहने वाले बिहारवासी अपनी खुशी के लिए सचेत हुए हैं। और अब वो एक बेहतर जीवन चाहते हैं। इस जीत से मुझे इसकी भनक आती है। और अच्छा अहसास होता है। जिस बिहार ने कई सालों तक सपने देखना छोड़ दिया था, आज वो हर समय सपने बुन रहा है। यह खुद की सफलता और विकास के लिए पहला कदम है। लोग चाहे किसी की सरकार बनाए, लेकिन अपनी उम्मीदों के लिए, अपनी चाहत के लिए, लड़ाई लड़ना न छोड़े, ये सबसे बड़ी बात है।

इस सरकार को बहुत बड़ा मौका मिला है काम करने के लिए। और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए। सरकार अपना काम करेगी और अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरेगी, ये तो पांच साल में पता चलेगा। लेकिन लोग लगातार अपनी उम्मीदें जगाएं रहें, और अपनी चाहत बनाए रखें, ये सबसे आवश्यक है। प्रजातमंत्र का यह सबसे खूबसूरत पहलू है कि पांच साल के बाद आपको हर सरकार को तराजू पर तौलने का मौका मिलता है। और मैं काफी आशान्वित हूं कि जिस तरह से लोगों की उम्मीद पर पिछले पांच साल खरे उतरें है। आगे के पांच साल भी बिहार की बेहतरी के उस मापदंड पर नीचे नहीं जाएंगे।

इधर, मीडिया का उत्साह देखकर मजा भी आ रहा था। और लग रहा था कि लगातार कई सारे प्रोग्राम दोहराए जा रहे हैं। मीडिया को अचानक अपने स्लॉट को भरने का मौका मिला। एक हद तक खबर की ओर लौटने का मौका भी मिला। अच्छा यह लग रहा था कि पूरे दिन बिहार की बात हो रही थी। जिस बिहार के बारे में बातें करने के लिए किसी के पास समय नहीं था। जिस बिहार को हर कोई खासकर मीडिया नकार चुका था, भूल चुका था। आज अचानक वो बिहार को पूरा दिन दे रहा था। बहुत अच्छा लग रहा था। बस, ऐसे ही राज्य और राज्य के लोग प्रगति की राह पर चलते रहें। उम्मीदें बांधे रहें। सपने बुनते रहें। चाहत बरकरार रखें। इससे अधिक खुशी बिहार के बाहर रहने वाले एक व्यक्ति के लिए और क्या हो सकती है। आज मैं बहुत खुश हूं। बिहार जाने का मौका खोज रहा हूं। वहां की सड़कों पर अपनी यात्रा को मैं अभी से देख रहा हूं। सड़क के किनारे पर ढाबे पर चाय पीते खुद को पा रहा हूं। मैं भी सपने ही बुन रहा हूं। और बुनता हूं तो सच होता है। मुझे सपनों पर बहुत विश्वास है।

इसी के साथ

आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी