Tuesday, March 29, 2011

बहुत याद आएंगे आलोक तोमर

क्रिकेट की दुनिया का हाई वोल्टेज मैच होने को है। पूरी दुनिया और सारे समाचार चैनल पाकिस्तान पर दबाव बनाने में लगे हैं कि वो किसी तरह मैच हार जाए। हर दिन के प्रोग्राम और समाचारों से सेमीफाइनल की कीमत बढ़ायी जा रही है। इस सारे हो हल्ले के बीच मुझे एक दुखद खबर मिली है कि हमारे दोस्त और मशहूर जाबांज पत्रकार आलोक तोमर इस दुनिया में नहीं रहे। एक झटका सा लग गया। अचानक ये सारी क्रिकेट की धूम बेमानी सी लगने लगी है।

इस दौर में जहां पत्रकारिता की दुनिया बाजारु हो चुकी है, उस दौर में आलोक तोमर जैसे पत्रकार के जाने से गंभीर पत्रकारिता को एक और झटका लगा। मैं भगवान से दुआ करता हूं कि आलोक आप जहां भी रहें ऊपर वाला आपकी आत्मा को भरपूर शांति दे और आपके परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दे।

लेकिन सबसे बड़ा दुःख उन लोगों को हुआ है, जो अधिकांश चैनलों की बेहद सतही और रंगीन अखबारों की पीत पत्रकारिता के बीच गंभीर किस्म की पत्रकारिता को खोज रहे हैं। हिन्दी भाषा में सार्थक पत्रकारिता की आस की लगातार कोशिश करते रहने वाले आलोक के जाने से बहुत दुःख है। मुझे उनके साथ मंडी हाऊस में बिताए कई पल याद हैं। इसी तरह, उनके जनसत्ता के दिन भी मुझे आज भी याद आते हैं। मैं अपने शब्दों में यह लिख नहीं पा रहा हूं कि आलोक तामोर के निधन की खबर ने मुझे कितना हतोत्साहित किया है। फिर भी बकौल बच्चन साहब-जो बीत गई सो बात गई। जीवन में एक सितारा था, माना वो बेहद प्यारा था, वो टूट गया सो टूट गया। अंबर के तारों को देखो, जाने कितने तारे टूटे, जाने कितने प्यारे छूटे, जो छूट गए फिर कहां मिले, पर बोलो टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है !

लेकिन अंबर शोक मनाए न मनाए हम गमगीन हैं। आलोक के जाने का शोक पता नहीं हम कब तक मनाते रहेंगे। आप सबसे भी यही निवेदन है कि अपनी प्रार्थना में आलोक की आत्मा की शांति के लिए दुआएं जरुर करें। अपने प्यारे आलोक तोमर को भारी मन से अलविदा।

आपका

मनोज बाजपेयी

16 comments:

sandeep yadav said...

manoj bhaiya alok bhaiya nishchit roop se yad aayenge, aakash mai hui riktata ko koi ujala nahi bhar payega...tare chahe jitne chamak rahe ho lekin alok bhaiya ka ujala vistrat tha....shat shat naman unhe...

Siddharth Kalhans said...

मनोज भाई, फिल्मों के जरिए आपका पुराना फैन रहा हूं। बला नागा आपकी हर फिल्म देखता हूं। पत्रकार हूं आजकल बिजनेस स्टैंडर्ड के लिए उत्तर प्रदेश से काम कर रहा हूं। जब इंडियन एक्सप्रेस में था कुछ दिनों पहले तो इच्छा थी आपका साक्षात्कार लेने की कभी पूरी न हो सकी। चलिए फिर कभी सही।
आलोक तोमर को आपने याद किया। अपने साथ बिताए दिन साझा किया ब्लाग पर। बहुत खुशी हुयी। दादा का दायरा सचमुच बहुत बड़ा था। अक्सर अपराध पर रपट की झड़ी लगाते-लगाते वो मनोरंजन पर भी कुछ दाग देते थे। उनका निधन बड़ी क्षति है पत्रकारिता के लिए।
आज पहली बार आपका ब्लाग देखा। दुर्भाग्यशाली था अब तक नही देखा था। आगे से रोज चेक करता रहूंगा।

World of P.K.ROY said...

MANOJ VAJPAI HAD VARY WELL SAID IN RIGHT PERSPECTIVE THAT WE WILL ALWAYS REMEMBER ALOK TOMER, WHO WAS REALLY A MOST REMARKABLE JOURNALIST OF HINDI LANGUAGE.HE WAS DARING AND SHARP. NATURE HAS SNATCHED HIM FROM PERISHABLE EARTH.

ajay said...

achcha laga jaankar ki aap bhi blog per hain...likhte rahiyega...blog per hi aap se mulakaat ho jaya karegi....
aur bhagwaan alok ji ki aatma ko shanti de yahi humari ishwar se prarthna hai...
Ajay Sethi
NDTV

राजीव तनेजा said...

आलोक तोमर जी को विनम्र श्रधांजलि ...

अजय कुमार झा said...

हां सच कहा मनोज भाई आपके अचानक यूं आलोक जी का चले जाना स्तब्ध कर गया ।

संजय कुमार चौरसिया said...

aalok ji,ko hamari or se shradhanjali,

Minakshi Pant said...

आपका उनके प्रति इस कदर तड़प ही बयान कर रहा है की आपके पास उनके साथ बिताय वो खुबसूरत पल फिर से आपको उनकी याद दिला रहे हैं पर सृष्टि के नियम को आजतक कौन तोड़ पाया है दोस्त हम दुआ जरुर करेंगे की भगवान उनकी आत्मा को शांति दे |
किसी के बिछड़ने का दर्द सहा नहीं जाता ,
उसे भुलाने पर भी भुलाया नही जाता ,
यही एक दर्द ही तो एसा है यारों ,
जो चाह कर भी किसी को बताया नहीं जाता |

Abnish Singh Chauhan said...

यह दुखद समाचार है. आपने अपनी व्यस्तता में भी उन्हें याद किया, यह अच्छी बात है.

SANTOSH said...

वास्तव में राजेंद्र माथुर,प्रभाष जोशी जैसे पत्रकारों के बाद गिने-चुने लोग ही बचे थे जिनसे पत्रकारिता बची हुई है,आलोकजी के जाने के बाद ज़्यादा विकल्प नहीं बचे हैं !

MOKARRAM KHAN said...

आलोक तोमर मेरे बहुत अच्‍छे मित्र रहे हैं. मैं जब 1985-86 में दिल्‍ली में केंद्रीय शहरी विकास राज्‍यमंत्री का निजी सचिव था तब आलोक जी जनसत्‍ता में थे. व‍े एक कर्मठ, जीवंत तथा दृढ़निश्‍चयी पत्रकार थे. भारतीय पत्रकारिता में उनका महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है. वे मेरे प्रेरणास्‍त्रोत रहे हैं. आज मैं भी वरिष्‍ठ पत्रकार हूं, उनका असमय जाना मेरे लिये अपूर्णीय क्षति है

संजय कुमार चौरसिया said...

manojji, janmdin ki bahut bahut badhai

KAVITA said...

bahut badiya prastuti..
AApko janamdin kee bahut bahut haardik shubhkamnayne....

Sawai Singh Rajpurohit said...

जनमदिन की हार्दिक बधाई।

Pk Jain said...

प्रिय मनोज जी,
बेटी के जन्म की बहुत बधाई.
अंतरजाल के भ्रमण में मिल गया आपका यह चौपाल और फिर उंगलिया भी बरबस चल पड़ी जुड़ने को आपसे. प्रसन्नता हुई की कोई तो है फ़िल्मी दुनिया में जो हिंदी से जुड़ा है यूँ कहें के अपना सा है.
जुड़े रहेंगे अब, मिलते रहेंगे.

santosh said...

pranam sir aapka blog padha achcha laga ki aap ne apne desh ki baate ki ...and my best whishesh for the film.....