Thursday, June 2, 2011

बहुत हुआ आराम, अब काम

करीब तीन महीने घर पर रहने और अपनी पत्नी व बेटी के साथ समय बिताने के बाद ‘आरक्षण’ का बचा खुचा काम किया और अब समय आ गया है कि मैं काम पर निकलूं। मैं निकल रहा हूं बिजनौर की तरफ। वहां अगले एक महीने तक मेरी अगली फिल्म की शूटिंग है। फिल्म का नाम भी ‘बिजनौर’ ही है शायद। नाम अभी तय नहीं हुआ है। पहली बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश को करीब से देखने का मौका मिलेगा और उसे जीने का मौका मिलेगा।

मेरे साथ कुछ ऐसा संयोग रहा है कि यहां के निर्माता-निर्देशक मुझे उन फिल्मों में ही लेते हैं, जिनकी शूटिंग हिन्दुस्तान की जमीन पर ही हो सके। स्विटजरलैंड और इंग्लैंड में शूटिंग होने वाली फिल्मों में मेरे लिए कभी ज्यादा जगह नहीं रही। वैसे, यह अपने आप में सौभाग्य है कि मैं अपनी जमीन से जुड़ी फिल्मों का हिस्सा आज तक रहा हूं। मुझे गर्व होता है अपनी फिल्मों की सूची देखकर, जिसमें ज्यादातर फिल्में यहां के लोग और यहां के जीवन के बारे में बात करती दिखती है। मेरी फिल्में यहां के द्वंद और यहां के संघर्ष की बात करती दिखती हैं। यहां के हंसी मजाक को पर्दे पर लेकर आती हैं।

विदेश में शूटिंग करने का फायदा यह होता है कि आपको एक नया देश, एक नयी संस्कृति देखने का मौका मिलता है। लेकिन तभी एक दोस्त का कहा हुआ याद आता है। वह कहता था-जिसने अपने देश को नहीं देखा, उसे विदेश जाने का कोई हक नहीं । व्यक्ति बाहर के लोगों को नहीं समझ पाएगा, जब तक वह अपने देश के लोगों से न जुड़ा रहा हो। संयोगवश ही सही लेकिन मेरी फिल्मों ने मुझे यह सौभाग्य प्रदान किया है कि मैं देश के कोने कोने में घूम कर आ चुका हूं। बस बाकी है तो अतिपूर्व का इलाका। वहां जाने की बड़ी मंशा है। वहां के लोग, वहां की संस्कृति और वहां का खाना नजदीक से देखने की बड़ी इच्छा है। मैं लगातार ब्लॉग के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनुभव आप लोगों के साथ बांटता रहूंगा। अपनी फिल्म के किस्से भी ब्लॉग पर लिखता रहूंगा। आप दुआ कीजिए कि यह फिल्म अच्छी बनी, जिसे देखकर आप सभी मेरे चाहने वाले मुझ पर गर्व करें। कोशिश भी मेरी यही रही है क्योंकि कहीं न कहीं मेरा मानना कि सारी सफल फिल्में अच्छी नहीं होती और सारी विफल फिल्में बुरी नहीं होती। कोशिश इस बात की होनी जाहिए कि ऐसी फिल्म बनायी जाए, जिसे देखकर आपके बच्चों को भी गर्व हो सके। इस कोशिश में ही जुटने जा रहा हूं। आपसे लगातार ब्लॉग के जरिए मिलना होता रहेगा। तब तक आप सभी लोग अपना ख्याल रखें।

आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी

20 comments:

शिवम् मिश्रा said...

मनोज भईया ,
प्रणाम !

कभी मैनपुरी आना हो तो जरुर बताइयेगा ... वैसे आप अगर मैनपुरी आये तो पता तो सब को चल ही जायेगा !

आज बहुत दिनों बाद आप की पोस्ट पढने को मिली ... उम्मीद है काम के बीच में भी आपको कुछ ना कुछ लिखने की फुर्सत मिलती ही रहेगी !

शेष शुभ |

शुभकामनाओ सहित

आपका अनुज
शिवम् मिश्रा
मैनपुरी , उत्तर प्रदेश

amitesh said...

its good to read you after a long gap...

Pawan K Shrivastava said...

नमस्कार , सर
ये आपने बहुत सही बात कही की संयोगवस आपने वैसी फिल्मे की जिसमे वास्तविकता थी और वस्त्विच्क भरत दीखता हैं .. लेकिन हम तो इसे अपना सौभाग्य मानते हैं की आपने ऐसी फिल्मो को चुना और साहस दिखाया हैं जिसमे केवल अभिनय की गुंजाईश थी ना की किसी ग्लैमर और फ़िल्मी तमाशे की !! आपके अभिनय और परदे पे आपकी संजीदगी के हम कायल हैं , विस्वास हैं की आपकी अगली फिल्म में भी यही सब देखने को मिलेगा ..अभी से ही दिल रोमांचित हैं

पवन कुमार श्रीवास्तव.

riya thakur said...

its good,all d best...!

अंतर्मन said...

मनोज जी
आपकी काफी दिनों के बाद ब्लॉग पर वापसी सुखद लगी,
आपके जरिये बिजनोर को जानने का मौका हम लोगों को मिलेगा,
वैसे यह सुखद हे कहा जाए की आपको फिल्मो ने अपनी माटी से जोड़े रखा है.

ढेरो शुभकामनाओ सहित,
शांति दीप वर्मा

Er. सत्यम शिवम said...

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (04.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
स्पेशल काव्यमयी चर्चाः-“चाहत” (आरती झा)

SANJEEV KHANNA said...

शुभकामनाये... ईश्वर आपको कामयाबी दे

Sanjeev

SANJEEV KHANNA said...

शुभकामनाये ईश्वर आपको कामयाबी दे

RA said...

Wonderful post.
I agree with your thoughts on
1.सारी सफल फिल्में अच्छी नहीं होती और सारी विफल फिल्में बुरी नहीं होती। कोशिश इस बात की होनी जाहिए कि ऐसी फिल्म बनायी जाए, जिसे देखकर आपके बच्चों को भी गर्व हो सके। 2.Traveling and seeing one's own country is important.
(As a viewer I prefer to see India in Indian movies...still wish to see you in New Jersey some day soon.:-)
Happy parenting.What have you named the little one ?
Looking forward to read more.

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

मनोज जी,
आप भी ब्लाग लिखते है, जानकर काफ़ी अच्छा लगा.
आप हमारे नजदीक ही शूटिंग करने वाले है, बस सौ किलोमीटर की दूरी पर,
आप भी मेरी तरह अपने देश को देखने की इच्छा रखते हो,

ana said...

meri shubhakamnaye aapke saath ahi

jitendrajha jitu(akshra arts) said...

bhartenu ne vekaha tha ki nij bhasha ki unnati se hi desh ka bikas hoga..
waise ve mera manana hai ki jo ve film pasand ki gaye hai unki shooting india me hi hue hai aur forean me shoot ki hue filmo ka adhiktar hasra bura hua hai...
khair bahut dino apka blog nahi aya ..umeed hai ki aarakshan me ve apki tapish pura desh mahsush karega...
pichle dino apki purani film dekhe drohkal and sanshodhan...

sushma 'आहुति' said...

best of luck... for new starting...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

शुभकामनाएं!

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

"व्यक्ति बाहर के लोगों को नहीं समझ पाएगा, जब तक वह अपने देश के लोगों से न जुड़ा रहा हो।". आपके विचार बिलकुल अपने धरती और माटी के करीब है.... ऐसे विचारों पे आनंद विभोर हो जता हूँ...

आपकी ये फिल्म अच्छी बने और सफल भी हो ... हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं ...

Dinesh said...

कभी हमारे लायक काम हो (स्क्रिप्ट राइटिंग से सम्बंधित) तो हमें भी बताइए.

सुनील गज्जाणी said...

नमस्कार ,
मनोज जी !
आप के समक्ष यानी आप के ब्लॉग पे एल लम्बे अंतराल के बाद हाज़िर हुआ हूँ आप कि छुट्टियों कि माफिक , मनोज जी आप से एक अपना पण हो ग्या है आप के ब्लॉग से जुड़े के बाद आप कि फिल्मो से तो पहले से ही थे . आप के लिए स्क्रिप्ट शायद आप को ध्यान में ही रख कर लिखी जाती है और हां जो किरदार आप का होता है वो शायद ही अन्य अभी नेता कर सकता है ऐसा हामारा मानना है यानी के प्रशंसकों का !
हमारारी कामना है है कि ज़ल्द ही ऐसी कहानी आप के सामने आये जिसमे विदेशों कि शूटिंग हो ,ये सही है कि किसी दुसरे देश को समझने से पहले अपने देश को समझना ज़रूरी है हां ये भी सच है दुसरे देशो को भी जानना ज़रूरी होता है . घर में सभी कुशल मंगल होंगे . इश्वर कि सदा आप के पूरण परिवार पे रहे ये कामना है !
सादर

Rohit Bisht said...

your affection with our culture is a motivation for youth.it's nice to see dt you still mantain ur identity in show business & have sincere emotions about ur root.keep it up.

कौशलेन्द्र said...

वाजपेयी जी !
बिहार के बारे में अन्य प्रान्तों में आम लोगों की धारणा से बड़ा दुःख होता है. कभी संयोग ऐसा बनाइएगा कि बिहार के लोगों की मीठी भोजपुरी ....मधुर और आत्मीय प्रेम .....संवेदनशीलता ....सामाजिक जागरूकता ......और अध्ययनशीलता आदि अद्भुत गुणों को दर्शाती कोई फिल्म बन सके . हम आपसे उम्मीद करते हैं. बिहार के सकारात्मक पक्ष को आप बहुत बेहतर तरीके से सामने ला सकते हैं.

Dr. Chetan Bhandari said...

फिल्म जगत में आपका काम वाकई बहुत सराहनीय है... राजनीती में आपका अभिनय देख कर मन प्रफ्फुलित हो उठा. हम आपके उज्वल भविष्य और स्वस्थ जीवन और चिरायु होने की कामना करते है... मन आपसे भेंट करने को लालायित है... उम्मीद है की कभी तो आप हमसे रूबरू होंगे...