Friday, June 15, 2012

'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के बारे में

आज कुछ ऐसी परिस्थिति है कि हवाई जहाज लखनऊ से दिल्ली आकर रुका है और कुछ देर में मुंबई उड़ान भरेगा। इसी बीच ख्याल आया कि काफी दिन हुए ब्लॉग पर कुछ लिखा नहीं है तो सोचा कि कुछ लिख ही दिया जाए। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' का प्रचार जोर शोर से चल रहा है। हम उसमें कुछ कमी करते भी हैं तो लोगों की उत्सुकता हमें उसमें लगा देती है। हवाई जहाज में जिस सीट पर बैठा हूं। दाएं में अनुराग कश्यप हैं। और बाएं में रिचा चड्ढ़ा, जो मोबाइल फोन पर ट्विटर व फेसबुक के खिलौने से खेल रही हैं।

थकान रग रग में है। फिर भी मुंबई पहुंचने की अभिलाषा खत्म नहीं हुई है। शायद इसकी वजह मेरी छोटी बेटी है। जिसके साथ सुबह सुबह दो घंटे खेलने का वक्त तो मिलेगा। फिर नागपुर की ओर रवाना होना है। यह यात्रा चलती रहेगी 22 तारीख तक। हम इस वक्त जहां भी जा रहे हैं,वहां गैंग्स ऑफ वासेपुर और निर्देशक अनुराग कश्यप की चर्चा उफान मारती दिख रही है। इससे यह भी आभास होता है कि हिन्दी सिनेमा में वो दौर आ पहुंचा है,जहां निर्देशक को इस माध्यम की समझ होने का पूरा सम्मान मिल रहा है। चाहे वो दिबाकर बनर्जी हों या नीरज पांडे या अनुराग कश्यप। इनके अलावा न जाने कितने निर्देशक, जो आज सिनेमा के माध्यम पर अपनी पकड़ रखते हुए दिख रहे हैं। और क्यों न हो, आखिर सही मायने में सिनेमा निर्देशक का ही माध्यम है।

गैंग्स ऑफ वासेपुर की चर्चा उत्साहित करने वाली है। लेकिन, पता नहीं फिल्म को लेकर अति उत्सुकतावश क्या क्या लिखा जा रहा है। एक मायने में यह अच्छा है, लेकिन दूसरी तरफ कई गलतफहमियां भी फैलती हैं। आज सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट मिल गया है। ए सर्टिफिकेट मिला है। यह बात हमें मालूम थी। हम सब संतुष्ट भी हैं। फिल्म के सेंसर बोर्ड में अटकने को लेकर जो अफवाहें थी, वो सही मायने में अफवाहें ही थीं।

कुछ जगह इस तरह की खबरें भी छपी हैं कि जैशान,जो हमारे साथ अभिनेता हैं, और लेखन में भी जिनका योगदान रहा, उन्हें धमकियां मिली हैं। मेरी जानकारी में यह खबर बेबुनियाद है। सब कुछ अच्छा है। फिल्म का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। मैं चाहूंगा कि आप सभी इस फिल्म को देखें और फिल्म की प्रतिक्रिया ब्लॉग के माध्यम से पहुंचाएं। मुझे विश्वास है कि यह न सिर्फ अलग तरीके और अलग ढंग से बनी फिल्म है बल्कि मनोरंजक फिल्म भी है। दोबारा जल्द मिलने के वादे के साथ आपसे विदा लेता हूं।

आपका और सिर्फ आपका
मनोज बाजपेयी
(कुछ देर पहले हवाई जहाज में बैठकर लिखाया गया)